रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड), 11 फरवरी 2026: उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग जनपद में खनन माफिया का आतंक चरम पर चल रहा है lअलकनंदा और मंदाकिनी जैसी जीवनदायिनी नदियां अवैध खनन की भेंट चढ़ रही हैं, वहीं सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। सूत्रों और जांच रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है कि जिले में 8 निजी क्रेशर और 4 ई-टेंडरिंग खनन पट्टे चल रहे हैं, लेकिन इनकी आड़ में निर्धारित क्षेत्र और मात्रा से कहीं ज्यादा खनन हो रहा है। नतीजा? नदियां खुर्द-बुर्द हो रही हैं, सड़कें खतरे में हैं, और पर्यावरण का विनाश हो रहा है!
गंगा के उद्गम स्थल के करीब रुद्रप्रयाग में यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। जांच में पता चला है कि खनन पट्टों में निर्धारित घन मीटर से अधिक सामग्री निकाली जा रही है, जिससे नदियों का प्रवाह बाधित हो रहा है और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। क्रेशरों में भंडारण की सीमा से ज्यादा माल रखा जा रहा है, और रॉयल्टी में भारी हेराफेरी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह सब राजस्व विभाग, खनन विभाग, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से संभव हो रहा है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि माफिया दिन-रात मशीनें चलाते हैं, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। करोड़ों की कमाई में सबका हिस्सा है!
उत्तराखंड में अवैध खनन का यह सिलसिला नया नहीं है। जून 2024 में रुद्रप्रयाग प्रशासन ने अवैध खनन पर बड़ा एक्शन लिया था, जहां एक स्टोन क्रेशर को सीज कर 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन इसके बावजूद कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी जुलाई 2025 में हरिद्वार में गंगा नदी पर अवैध खनन के लिए 48 स्टोन क्रेशर बंद करने के आदेश दिए थे, जो दर्शाता है कि पूरे राज्य में यह समस्या कितनी गंभीर है। एक स्टिंग ऑपरेशन ने उत्तराखंड में माइनिंग माफिया की धमकियों और अवैध गतिविधियों को उजागर किया है, जहां पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है।
राजस्व की लूट का आंकड़ा चौंकाने वाला है। उत्तराखंड सरकार ने अवैध खनन की निगरानी और रॉयल्टी वसूली को प्राइवेट कंपनियों को सौंपा है, लेकिन इससे समस्या और बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च 2025 में राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मुद्दा उठाया था, जिससे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। सीपीसीबी की रिपोर्ट में गंगा नदी पर अवैध खनन की पुष्टि हुई है,जो पर्यावरणीय आपदा की ओर इशारा करती है। रुद्रप्रयाग में हाल ही में ऊखीमठ में खनन और राजस्व विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाही की, लेकिन यह सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है।
सरकार और प्रशासन को इस माफिया राज को तुरंत रोकना चाहिए, वरना देवभूमि का विनाश तय है। जांच की मांग तेज हो रही है – क्या अब कार्रवाई होगी या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?










