देहरादून। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग को लेकर राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (NOPRUF) उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को मुख्य सचिव से मुलाकात कर विस्तृत वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल ने NPS, UPS और OPS के विभिन्न पहलुओं के साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
वार्ता के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड समेत उन राज्यों के शासनादेशों की प्रतियां मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत कीं, जहां पुरानी पेंशन व्यवस्था को लेकर निर्णय लिए गए हैं। संगठन ने इन राज्यों की प्रक्रिया, वित्तीय व्यवस्था और कर्मचारियों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा का अध्ययन उत्तराखंड के संदर्भ में किए जाने की मांग की।
प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड पहाड़ी राज्य है और बड़ी संख्या में कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद अपने गांवों में रहते हैं। ऐसे में निश्चित पेंशन व्यवस्था केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। उन्होंने राज्य की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए OPS पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने NPS के तहत कर्मचारी और सरकार के अंशदान तथा निवेश व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि लंबे सेवाकाल के बाद कर्मचारी को सेवानिवृत्ति पर पर्याप्त एवं सुरक्षित आर्थिक संरक्षण मिलना चाहिए। विभिन्न राज्यों के शासनादेशों का अध्ययन कर उत्तराखंड के लिए व्यवहारिक मॉडल तैयार किए जाने की मांग भी उन्होंने रखी।
प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि NPS, UPS और OPS की तुलना केवल वित्तीय भार के आधार पर नहीं की जानी चाहिए, बल्कि कर्मचारी की पूरी सेवा अवधि, सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन, परिवार की सुरक्षा और महंगाई के प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष शंकर भट्ट ने NPS और OPS के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के शासनादेशों और वास्तविक आंकड़ों के आधार पर उत्तराखंड में पेंशन व्यवस्था को लेकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
प्रदेश सचिव माखन लाल शाह ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के बुढ़ापे की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि 2 नवंबर 2026 को देहरादून में प्रस्तावित प्रदेशव्यापी रैली से पहले सरकार OPS बहाली की दिशा में सकारात्मक पहल करती है तो कर्मचारियों में सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मांग के स्थायी समाधान की अपेक्षा जताई।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से NPS, UPS और OPS का वित्तीय, सामाजिक एवं प्रशासनिक तुलनात्मक अध्ययन कराने, विभिन्न राज्यों की पेंशन व्यवस्था का अध्ययन करने तथा उत्तराखंड की परिस्थितियों के अनुरूप OPS बहाली के लिए समयबद्ध रोडमैप तैयार करने की मांग की। साथ ही कर्मचारी संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित करने पर भी जोर दिया।
NOPRUF ने कहा कि पुरानी पेंशन का मुद्दा किसी राजनीतिक दल के समर्थन अथवा विरोध से जुड़ा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सेवानिवृत्ति सुरक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा से संबंधित है। संगठन ने कहा कि वह तथ्यों और विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आधार पर सरकार के साथ संवाद जारी रखेगा।
वार्ता में प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी, प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल, प्रदेश सचिव माखन लाल शाह, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष शंकर भट्ट, शिव सिंह राणा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।









