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Sunday, March 15, 2026


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मुख्यमंत्री ने ताड़ीखेत में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत आयोजित बहुद्देश्यीय शिविर में किया प्रतिभाग*

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*मुख्यमंत्री ने किया 77.25 करोड़ रुपये की 32 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास*

*रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के लिए की अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएँ*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत सोमवार को अल्मोड़ा जिले के ताड़ीखेत में आयोजित बहुद्देश्यीय शिविर में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय जनता से संवाद करने के साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण भी किया। इस शिविर में पात्र लोगों को सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के साथ ही जनसमस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया गया ।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जिले की लगभग 77.25 करोड़ रुपये की लागत की 32 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। जिसमें रू. 47.85 करोड़ की लागत की 9 योजनाओं का शिलान्यास तथा रू. 29.40 करोड़ की लागत की 23 योजनाओं का लोकार्पण शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में विकासखण्ड भिकियासैंण में गगास नदी तथा रामगंगा नदी पर तटबन्ध निर्माण एवं पैदल पथ के नव निर्माण कराने सहित देवलीखेत, चौनलिया, खिरखेत एवं भुजान स्थित राजकीय इंटर कॉलेजों में मिनी स्टेडियमों का निर्माण कराने, सनणा सिंचाई लिफ्टिंग योजना का उच्चीकरण करने, रानीखेत में एनसीसी ग्राउंड/स्टेडियम के निर्माण हेतु एक करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत करने, रानीखेत स्थित रानीझील के विस्तारीकरण एवं सौंदर्यीकरण का कार्य कराने, रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत हैलीपैड निर्माण कराने की घोषणा सम्मिलित हैं।
शिविर में हजारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रशासन से जुड़े सभी कार्य और सेवाएँ जनता को उनके ही क्षेत्र में सुलभ कराने हेतु सरकार निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए सरकार की अधिकांश सेवाओं को ऑनलाइन करने के साथ ही समय-समय पर बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन कर जनता की समस्याओं को मौके पर ही त्वरित समाधान भी सुनिश्चित कराया जा रहा है। सरकार ने “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान शुरू कर शासन-प्रशासन को सीधे आमजन के बीच ले जाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने अभियान के तहत न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी समस्याओं और सुझावों को निःसंकोच साझा करें, ताकि शासन-प्रशासन उन्हें शीघ्र और प्रभावी ढंग से सुलझा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास और समृद्धि के नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सुदूर पर्वतीय गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रही है। मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के भी पुनरुत्थान एवं सौंदर्यीकरण हेतु संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिकता एवं पावनता को संरक्षित रखने के लिए सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ों से पलायन को रोकने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु ठोस कार्य किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रतिबद्ध प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश विभिन्न क्षेत्रों में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राज्य में मातृशक्ति के कल्याण के लिए भी समर्पित होकर कार्य कर रही है। हर क्षेत्र में की महिलाओं की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित कर सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। अनेक योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु कारगर कदम उठाए गए हैं। राज्य की 1 लाख 68 हजार से अधिक बहनों ने “लखपति दीदी’’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में नया इतिहास रचा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रानीखेत विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए भी अनेक महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। क्षेत्र में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 17 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से भवानी देवी पेयजल योजना तथा 5 करोड़ रुपये की लागत से भतरौजखान रामगंगा पम्पिंग पेयजल योजना का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
इस अवसर पर केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री श्री अजय टमटा, क्षेत्रीय विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, दायित्वधारी कैलाश पंत, अनिल शाही, ब्लॉक प्रमुख श्रीमती बबली मेहरा, जिलाधिकारी श्री अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री देवेन्द्र पींचा, मुख्य विकास अधिकारी श्री रामजीशरण शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री घनश्याम भट्ट भी उपस्थित रहे।

प्रत्येक जनपद में वन्यजीव नसबन्दी केन्द्र की होगी स्थापना : मुख्यमंत्री धामी।

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देहरादून ।*वन्य जीवों के खोले जाएंगे रेस्क्यू व रिहैबीलीटेशन सेण्टर*

*वन विभाग को जाल, पिंजरा, ट्रेकुलाईजेशन गन आदि संसाधन की उपलब्धता के लिए मिलेंगे ₹ 5 करोड़*

*सोलर फेंसिंग और सेंसर बेस्ड अलर्ट सिस्टम से मिलेगी ग्रामीणों को सुरक्षा*


*मानव–वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए रेंजर स्तर के अधिकारियों को मिलेंगे अधिक अधिकार*

राज्य में मानव वन्य जीव संघर्ष के मामलों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस चुनौती से निपटने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की घोषणा की है।

जिसके तहत सोलर फेंसिग एवं सेंसर बेस्ड अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाएगा।

साथ ही आधुनिक वन्यजीव बंध्याकरण (नसबन्दी) केन्द्र एवं जिलों में रिहैबीलीटेशन सेण्टर खोले जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राज्य में मानव जीवन संघर्ष के कई मामले सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखण्ड राज्य के उन क्षेत्रों में जहाँ वन्य जीव जैसे हाथी, नीलगाय, भालू, गुलदार एवं बंदर आदि के द्वारा कृषि एवं उद्यान फसलों, भौतिक अवस्थापनाओं, मानव जीवन आदि की क्षति की जाती है, वहाँ चरणवार एवं योजनाबद्ध रूप में सोलर फेंसिग एवं सेंसर बेस्ड अलर्ट सिस्टम से सुरक्षा तंत्र विकसित कर मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव लंगूर, बन्दर, सुअर, भालू आदि के जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रत्येक जनपद में वन विभाग के अंतर्गत आधुनिक वन्यजीव बंध्याकरण (नसबन्दी) केन्द्र की स्थापना की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश के समस्त जनपदों में मानव, वन्य जीव संघर्ष में चिन्हित वन्य जीवों के रेस्क्यू व रिहैबीलीटेशन सेण्टर खोले जायेंगे।

इस हेतु पर्वतीय वन क्षेत्र में न्यूनतम 10 नाली व मैदानी वन क्षेत्र में न्यूनतम 1 एकड़ भूमि आरक्षित की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपरोक्त सभी कार्यों की आवश्यकता को देखते हुए इन्हें शीर्ष प्राथमिकता से किया जाएगा एवं 2 सप्ताह की अवधि में उक्त योजनाओं को क्रियान्वित करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।

उन्होंने कहा इसके लिए वन विभाग को जाल, पिंजरा, ट्रेकुलाईजेशन गन आदि संसाधन की उपलब्धता के लिए ₹ 5 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी रोकथाम हेतु केन्द्रीय वन्य जीव अधिनियम के सुसंगत प्राविधानों में हिंसक जीवों को निषिद्ध करने हेतु अधिकारों के विकेन्द्रीकरण कर वन विभाग के रेंजर स्तर के अधिकारियों को सशक्त बनाया जाएगा।

इस हेतु नियमों में आवश्यकतानुसार संशोधन किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से भी गतदिवस वार्ता हुई है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी, मानव-वन्यजीव संघर्ष पर जिला प्रशासन अलर्टl

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*मानव-वन्यजीव संघर्ष की सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई के लिए डीएम ने बनवाया त्वरित रिस्पांस ग्रुप,*

*मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने को हाईटेक कदम, डीएम ने आधुनिक उपकरणों के लिए बजट किया मंजूर*

*संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के लिए वन विभाग को अतिरिक्त मैनपावर और वाहन भी,*

*राईका होरावाला क्षेत्र में गुलदार का भय, छात्रों की सुरक्षा में डीएम ने स्कूल समय में बदलाव के दिए निर्देश*

*मानव-वन्यजीव संघर्षः अब तक के प्रयासों और चुनौतियों पर डीएम ने की गहन समीक्षा*

*देहरादून /
मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने शनिवार को ऋषिपर्णा सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। जिसमें विभागों द्वारा अब तक किए गए प्रयासों, उनकी आवश्यकताओं और सामने आ रही चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। साथ ही वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाने, रात्रि गश्त बढ़ाने, त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या है, जिसके समाधान के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सर्तकता बरतने, नियमित निगरानी बढ़ाने तथा त्वरित प्रक्रिया प्रणाली को और सुदृढ करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने संवेदनशील क्षेत्रों एवं रिहायशी इलाकों से जंगली जानवरों को दूर भगाने के लिए सेंसर्स बेस्ड तेज आवाज करने वाले उपकरण एनाइडर, सोलर लाइट, कैमरे, फोकस लाइट सहित अन्य आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए मौके पर ही वन विभाग को बजट की स्वीकृति प्रदान की। साथ ही संवदेनशील क्षेत्रों में सतत गश्त बढ़ाने हेतु मैनपावर और वाहनों की डिमांड शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने कहा कि नियमित गश्त से समय रहते घटनाओं को रोका जा सकता है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि कही पर भी मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़ी सूचनाओं के तुरंत आदान प्रदान के लिए त्वरित रिसपोंस ग्रुप बनाया जाए। गु्रप में सीएमओ, पुलिस, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के अधिकारियों को शामिल किया जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटना होने पर रिसपोंस टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करें। ताकि जन-हानि और वन्यजीवों को नुकसान से बचाया जा सके और पीड़ित को त्वरित उपचार एवं राहत पहुंचायी जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि सहसपुर ब्लाक के राइका होरावाला क्षेत्र में गुलदार के भय से छात्रों की सुरक्षा के दृष्टिगत स्कूल का समय भी बदला जाएगा।

बैठक में डीएफओ ने बताया कि जनपद देहरादून में वन विभाग के अंतर्गत 84059.2 है0 वन क्षेत्र है, जिसमें 49871.88 है0 वन क्षेत्र आरक्षित है। जिले में वर्ष 2010 से 2025 तक वन्यजीवों के हमले में मानव मृत्यु के प्रकरणों में 91 लाख, मानव घायल के प्रकरणों में 17 लाख, फसल क्षति में 85.58 लाख का मुआवजा धनराशि वितरित की गई है। इस वर्ष अभी तक मानव वन्य जीव संघर्ष के कारण 04 लोगों की मृत्यु और 08 लोग जख्मी हुए है। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभाग द्वारा सोलर फेंसिंग, हाथी रोधी सुरक्षा खाई खुदान, सतत गश्त, जन जागरूकता गोष्ठी तथा वन्यजीवों के वास स्थल का सुधार कार्य किए गए है। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपकरणों, मैनपावर और वाहनों कमी की समस्या भी रखी। जिस पर जिलाधिकारी ने विभाग को बजट की स्वीकृत प्रदान करते हुए प्रोएक्टिव तरीके से मानव वन्यजीव संघर्ष पर नियंत्रित करने के निर्देश दिए।

बैठक में डीएफओ अमित कंवर, डीएफओ मयंक गर्ग, डीएफओ वैभव कुमार सिंह, एसएलएओ स्मृता परमार, एसडीएम अपर्णा ढ़ौडियाल, सीओ मनोज असवाल, तहसीलदार रूपसिंह, एसीएफ अभिषेक मैठाणी, सरिता भट्ट, डीडीएमओ ऋषभ कुमार सहित वर्चुअल माध्यम से अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

निरंजनपुर मंडी होगी शिफ्ट, मुख्य सचिव ने दिए नयी जगह तलाशने के निर्देश

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*आढ़त बाजार पुनर्निर्माण कार्य का 20 जनवरी तक जीओ जारी करने के निर्देश*

*परिवहन विभाग को एसपीवी रजिस्टर कर, जनवरी में पहली बोर्ड बैठक आयोजित किए जाने के निर्देश दिए।*

*मुख्य सचिव ने ली देहरादून शहर यातायाता संकुलन को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक*

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में देहरादून मोबिलिटी प्लान के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के साथ बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून शहर का यातायात संकुलन कम करने के लिए लगातार नए कदम उठाने होंगे। उन्होंने आढ़त बाजार, इंदिरा मार्केट आदि विभिन्न कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली।

मुख्य सचिव ने निरंजनपुर मंडी को अन्यत्र शिफ्ट किए जाने हेतु एमडीडीए को नयी जगह तलाशने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने आढ़त बाजार के पुनर्निर्माण कार्य को शीघ्र शुरू किए जाने की भी बात कही। कहा कि 20 जनवरी तक इसका शासनादेश जारी कर दिया जाए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को शहर के 6 जंक्शनों के सुधार के लिए 15 जनवरी तक जीओ जारी किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने शहर के भीड़-भाड़ वाले महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में बनी पार्किंग के 100 प्रतिशत उपयोग न होने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि अब तक तैयार पार्किंग का 100 प्रतिशत उपयोग होना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नगर निगम द्वारा लागू की जा रही ऑन रोड पार्किंग को अन्य मार्गों में भी लागू किए जाने की बात कही, ताकि लोग अपने वाहनों को सड़कों के बजाय पार्किंग में लगाने को प्रेरित हों।

मुख्य सचिव ने परिवहन विभाग को दिसम्बर माह में एसपीवी रजिस्टर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनवरी में पहली बोर्ड बैठक आयोजित कर ली जाए। उन्होंने आशारोड़ी में सीज वाहनों को रखने के लिए बनायी जा रही पार्किंग को शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने उम्टा (UMTA) द्वारा तैयार मोबिलिटी प्लान के तहत चिन्हित नए पार्किंग स्थलों की ग्राउण्ड ट्रुथिंग भी कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि ये स्थल पार्किंग के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं तो इनको तैयार किया जाए। उन्होंने परेड ग्राउण्ड में अंडरग्राउण्ड पार्किंग का फीजिबिलिटी परीक्षण शीघ्र कराए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने शहर के खम्बों में लटकी बिना परमिशन और अवैध तारों के जालों शीघ्र हटाए जाने की भी बात कही। कहा कि शहर में जहां-जहां अंडरग्राउण्ड इलेक्ट्रिसिटी केबल का कार्य पूर्ण हो गया है, सड़कों को तत्काल दुरूस्त किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, अपर सचिव श्री अहमद इकबाल, श्री विनीत कुमार, वीसी एमडीडीए श्री बंशीधर तिवारी एवं एसपी देहरादून श्री अजय सिंह सहित अन्य सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
*सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग*

मुख्यमंत्री के निर्देश पर विकास की कसौटी पर जिलों की रैंकिंग की व्यवस्था शुरू।

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*एस.डी.जी. के संकेतकों के आधार पर पहली बार जारी मासिक रैंकिग में जनपद चम्पावत पहले स्थान पर*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य में सतत विकास लक्ष्य (एस.डी.जी.) के तहत चिन्हित विकास के लक्ष्यों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर मासिक रैंकिंग करने की व्यवस्था प्रारंभ की गई है। शुरूआती मासिक रैंकिंग में जनपद चम्पावत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

मुख्यमंत्री द्वारा विकास के मोर्चे पर जिलों के प्रदर्शन के आकलन हेतु एस.डी.जी. के संकेतकों की कसौटी पर रैंकिंग करने की हिदायत दी गई थी। जिसके अनुपालन में नियोजन विभाग के सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेस (सी.पी.पी.जी.जी.) द्वारा एस.डी.जी. की अवधारणा के अनुसार मासिक रूप से अनुश्रवण किए जाने योग्य चिन्हित संकेतकों की जनपदवार रैंकिंग शुरू की गई है। जिसके लिए सी.पी.पी.जी.जी. द्वारा इस वर्ष अप्रैल से अक्टूबर माह तक 11 सतत् विकास लक्ष्यों के कुल 39 संकेतकों का डाटा प्राप्त करते हुए समसामयिक लक्ष्यों के आधार पर पहली बार जिलों की रैंकिंग जारी कर दी गई है।

मासिक रैंकिग के आधार पर जनपद चम्पावत ने 96 अंक प्राप्त कर प्रथम, जनपद बागेश्वर ने 94 अंक प्राप्त कर द्वितीय तथा जनपद नैनीताल ने 92 अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान प्राप्त किया है। सी.पी.पी.जी.जी. के विशेष कार्याधिकारी अमित पुनेठा ने कहा है कि रैंकिंग में पिछड़े जनपदों से वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में सभी एस.डी.जी. में तय लक्ष्यों को प्राप्त कर करने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग के लिए चिन्हित 39 संकेतकों के अलावा आवश्यतानुसार समसामयिक लक्ष्यों के सापेक्ष योजनाओं का अनुश्रवण करने के लिए भविष्य में अन्य संकेतकों को भी शामिल किया जा सकता है।

*एस.डी.जी. को लेकर उत्तराखंड में प्रतिबद्ध प्रयास : राष्ट्रीय स्तर पर बनी अलग पहचान*

वर्ष 2030 तक गरीबी, भुखमरी, बीमारी और अभाव से मुक्त विश्व की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से सतत विकास लक्ष्य, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों द्वारा सितंबर 2015 में स्वीकृत और अपनाए गए थे। एसडीजी के चार प्रमुख आयाम हैं : सामाजिक समानता; समावेशी आर्थिक विकास; पर्यावरण संरक्षण; और शांतिपूर्ण एवं समावेशी समाज।
इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उत्तराखंड राज्य में गंभीरता के साथ प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके फलस्वरूप उत्तराखंड विभिन्न विकास क्षेत्रों में अग्रणी बनकर उभरा है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। नीति आयोग द्वारा जारी एस.डी.जी. इंडिया इंडेक्स वर्ष 2023-24 में उत्तराखंड ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रयासों की सार्थकता सिद्ध की है।

*सतत विकास के चिन्हित लक्ष्य*

एसडीजी सं. 1 गरीबी उन्मूलन
एसडीजी सं. 2. शून्य भुखमरी
एसडीजी सं. 3. उत्तम स्वास्थ्य
एसडीजी सं. 4. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
एसडीजी सं. 6. स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता
एसडीजी सं. 7. संवहनीय स्वच्छ ऊर्जा
एसडीजी सं. 8. उत्तम कार्य एवं आर्थिक उन्नति
एसडीजी सं. 9. उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना विकास
एसडीजी सं. 10. असमानता दूर करना
एसडीजी सं. 11. संवहनीय शहर एवं समुदाय
एसडीजी सं. 15. भूमि पर जीवन

प्रदेश में सतत विकास के लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करने के लिए योजनाओं के बेहतर निर्माण के साथ ही उनके सफल क्रियान्वयन के लिए प्रभावी एक्शन प्लान बनाया गया है। इससे हम आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार के साथ राज्य के समग्र विकास की संकल्पना को साकार करने में भी सफल हो सकेंगे। इसी के दृष्टिगत सभी विभागों एवं जिलाधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार एस.डी.जी. के निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने हेतु कार्य करने की अपेक्षा की गई है। जिलों की पहली रैंंकंग में प्रथम स्थान पर रहने वाले चंपावत जिले सहित अच्छा प्रदर्शन करने वाले अन्य जिलों को बधाई। सभी जिले बेहतर प्रदर्शन के लिए निरंतर प्रयासरत रहें। जिन लक्ष्यों व इंडिकेटरों में हमें सुधार की आवश्यकता है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाय।*

 

रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए प्रवासी पंचायतों का राज्यभर में आयोजन किया जाए- मुख्यमंत्री।

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ग्रामीण आजीविका बढ़ाने के लिए राज्य सरकार कर रही है ठोस प्रयास*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग, उत्तराखण्ड की 10वीं बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि पलायन की समस्या राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन पिछले चार–पाँच वर्षों में रिवर्स पलायन को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार ने कई महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका के साधन बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गई हैं। इन योजनाओं के अंतर्गत ऋण लेने पर पात्र लाभार्थियों को अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।

*प्रवासी पंचायतों और वेडिंग डेस्टिनेशन विकास पर विशेष बल*

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्यभर में प्रवासी पंचायतों का आयोजन किया जाए, जिनमें देश एवं विदेश में कार्यरत प्रवासियों को आमंत्रित किया जाए। उन्हें राज्य सरकार की रिवर्स पलायन से जुड़ी पहलों की जानकारी दी जाए और उनके सुझाव भी प्राप्त किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ने आयोग के सदस्यों से अन्य राज्यों में जाकर रिवर्स पलायन के लिए राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी देने के साथ ही पलायन रोकने और रिवर्स पलायन से जुड़े नवाचारों का अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि त्रियुगीनारायण की तर्ज पर राज्य के 25 नए स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाए। इन स्थलों में सभी मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए लघु उद्योगों के संवर्धन पर भी बल दिया गया।

*रिवर्स पलायन की दिशा में उत्साहजनक परिणाम*

ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ॰ एस.एस. नेगी ने बताया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में अब रिवर्स पलायन का रुझान देखने को मिल रहा है। अब तक लगभग 6282 व्यक्ति वापस अपने गाँवों में लौटे हैं। इनमें देश के भीतर और विदेशों से लौटे लोग भी शामिल हैं। अधिकतर लोग पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बैठक में आयोग के सदस्यों ने रिवर्स पलायन को और गति देने के लिए कई रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।

बैठक में सचिव श्री विनय शंकर पाण्डेय, श्री धीराज गर्ब्याल, डॉ॰ श्रीधर बाबू अद्दांकी, श्री सी. रविशंकर, अपर सचिव श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ॰ मेहरबान सिंह बिष्ट, श्री चन्द्र सिंह धर्मशक्तू, श्री संतोष बडोनी, श्री सुरेश जोशी, ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के सदस्य श्री अनिल सिंह शाही, श्री दिनेश रावत, श्री सुरेश सुयाल, श्री राम प्रकाश पैन्यूली एवं श्रीमती रंजना रावत उपस्थित रहे।

बीस हज़ार रिश्वत की मांग कर रहे खंड शिक्षा अधिकारी को विजिलेंस टीम ने दबोचा, रिश्वत देने वाले शिक्षक को भी पकड़ा।

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विजिलेंस की कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप, पुलिस मॉडर्न स्कूल का मान्यता प्रमाण पत्र जारी करने को मांग रहे थे रिश्वत

हरिद्वार। देहरादून से आई विजिलेंस की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बहादराबाद खण्ड खंड शिक्षा अधिकारी बृजपाल सिंह राठौड़ व शिक्षक मुकेश को 20 हज़ार की रिश्वत की मांग करते गिरफ्तार किया गया। विजिलेंस की कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। गिरफ्तार हुए खंड शिक्षा अधिकारी की पत्नी देहरादून में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर तैनात है। वह पूर्व में हरिद्वार में भी तैनात रह चुकी है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार को देहरादून विजिलेंस की टीम ने रिश्वतखोर अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बहादराबाद खंड शिक्षा अधिकारी व प्रभारी प्रधानाध्यापक मंगोलपुर श्यामपुर मुकेश को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पुलिस मॉडर्न स्कूल की मान्यता प्रमाण पत्र जारी करने की आवाज में बीस हज़ार रुपए की रिश्वत की मांग कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए राजस्व वसूली बढाने के निर्देश ।

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*राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा कर कहा समय से तय लक्ष्य पूरा करें*

*कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का किया जाय उपयोग*

*बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व वसूली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरे किये जाएं। संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जिलाधिकारियों द्वारा जनपदों में इसकी नियमित निगरानी की जाए। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी कार्यों का डिजिटाइजेशन किया जाए। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का जिलाधिकारियों एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए। रजिस्ट्री के दौरान संपति का उचित मूल्य दर्ज हो इसकी जाँच के लिए संपतियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा जाए।

प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस लेने की कार्यवाही में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने परिवहन विभाग को ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का सही उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन तथा जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व में बढोतरी करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जो राज्य के सही दिशा में बढ़ने का परिचायक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक प्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से आगामी अवधि में लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समन्वित और सक्रिय प्रयास किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष बल दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने के लिए नीति सुधार, नवाचार तथा नई तकनीकों पर निरंतर ध्यान दिया जाना जरूरी है। पारदर्शिता, जवाबदेह और जनहित में ठोस परिणाम देने वाला प्रशासन हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए सभी अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य में जुटे रहना होगा।

बैठक में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव श्री आर.के.सुधांशु, श्री एल. फैनई, सचिव श्री दिलीप जावलकर, श्री युगल किशोर पंत, श्री सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्रा अपर सचिव श्री अहमद इकबाल, श्रीमती सोनिका, श्री हिमांशु खुराना, श्रीमती अनुराधा पाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, श्री मनमोहन मैनाली, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

रामपुर (न्यालसू) में भालू के हमले पर जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई।

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*घायल को तत्काल उपचार, क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम*

रुद्रप्रयाग जनपद के रामपुर (न्यालसू) निवासी 55 वर्षीय मंगल सिंह चौहान पर आज भालू द्वारा हमला किए जाने की सूचना प्राप्त होते ही जिला प्रशासन ने त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की।

घटना की जानकारी मिलते ही घायल व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फाटा में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार दिया गया। घायल की स्थिति को देखते हुए बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र श्रीनगर रेफर किया गया है। प्रशासन द्वारा घायल को समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल शुक्ला को निर्देशित किया कि वन विभाग, पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीम के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना किया जाए तथा क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जिलाधिकारी के निर्देशों के क्रम में एसडीएम ऊखीमठ अनिल शुक्ला, पुलिस एवं वन विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में वन्यजीव की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है तथा संभावित खतरे को देखते हुए कल क्षेत्र में पिंजरा लगाए जाने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

इसके अतिरिक्त एसडीएम ऊखीमठ एवं वन विभाग की टीम द्वारा घायल व्यक्ति के परिजनों के आवास पर जाकर उनसे भेंट की गई। प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान करने तथा घायल को समुचित उपचार एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया।

जिला प्रशासन द्वारा क्षेत्रवासियों से भी अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, विशेषकर सुबह एवं सायं के समय अकेले वन क्षेत्रों की ओर न जाएं तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

जिला प्रशासन मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए पूर्णतः सजग है और जनसुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जा रहे हैं

मुख्यमंत्री की पहल पर राज्यभर में ‘‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’’ अभियान का शुभारंभ।

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*न्याय पंचायतों में कैम्प आयोजित कर जन-कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही जरूरतमंद लोगों को मौके पर ही विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने की मुहिम*

*अभियान को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह, पहले ही दिन हजारों लोग लाभान्वित*

*पैंतालीस दिनों तक चलने वाले इस अभियान में शमिल हैं 23 विभाग*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में ‘‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’’ अभियान का बुधवार को शुभारंभ हो गया है। न्याय पंचायतों में कैम्प आयोजित कर आम लोगों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही जरूरतमंद लोगों को मौके पर ही विभिन्न योजनाओं के लाभ प्रदान करने के लिए यह महत्वाकांक्षी अभियान पैंतालीस दिनों तक संचालित किया जाएगा। अभियान में राजस्व, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि, समाज कल्याण सहित 23 विभाग शामिल रहेंगे। अभियान के पहले दिन राज्य के सभी जिलों में तय कार्यक्रम के अनुसार चयनित न्याय पंचायतों में आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में आम लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। राज्य सरकार की इस महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी पहल से शुरूआती दिन राज्य के विभिन्न स्थानों पर आयोजित शिविरों में हजारों ग्रामीणों को लाभान्वित किया गया।

*पिथौरागढ*
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत पिथौरागढ़ जिले के विकास खंड बिण की न्याय पंचायत दौला में आयोजित शिविर का शुभारंभ कुमाऊँ मण्डल के आयुक्त श्री दीपक रावत द्वारा किया गया। इस शिविर में 800 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग कर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाया तथा अपनी समस्याएँ आयुक्त के समक्ष रखीं, जिनमें से अधिकांश का मौके पर ही निस्तारण किया गया। इस अवसर पर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप इस अभियान के दौरान जनसमस्याओं का स्थायी, पारदर्शी एवं समयबद्ध समाधान का प्रभावी माध्यम सुनिश्चित किया जाय। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि पिथौरागढ़ जिले की सभी 64 न्याय पंचायतों में शिविरों के आयोजन की व्यवस्था की गई है।
इस अवसर पर दायित्वधारी गणेश भंडारी, अध्यक्ष जिला पंचायत जितेंद्र प्रसाद, मेयर नगर निगम श्रीमती कल्पना देवलाल ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा संचालित इस योजना को जनता के हित में प्रभावी एवं दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इससे शासन की योजनाएँ सीधे आमजन तक पहुँचेंगी और नागरिकों को त्वरित लाभ प्राप्त होगा।

*चम्पावत*
“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान की अंतर्गत चम्पावत जिले के सिमल्टा में आयोजित शिविर में 500 से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया। शिविर में जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याओं व शिकायतों को गंभीरता से सुना और मौके पर ही 100 से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी द्वारा बाल विकास विभाग की बालिका जन्मोत्सव मनाने की पहल को आगे बढाते हुए नन्हीं बालिकाओं के साथ केक काटा गया।
इस शिविर में श्रम विभाग से 13, चिकित्सा विभाग से 100 से अधिक, महिला एवं बाल विकास से 30, ऊर्जा विभाग से 3, सहकारिता से 6, पशुपालन से 56, समाज कल्याण से 4, डेयरी विभाग से 70, वन विभाग से 19, राजस्व विभाग से 3, बैंक एवं वित्तीय संस्थानों से 6, ग्राम विकास विभाग से 10, पंचायती राज से 6, कृषि विभाग से 25, आयुष विभाग से 80, होम्योपैथी से 57, मत्स्य विभाग से 4, सेवायोजन विभाग से 11 तथा आपदा प्रबंधन विभाग से 17 लाभार्थियों को सेवाएँ प्रदान की गईं। शिविर में 6 आधार कार्ड भी बनाए गए और से कृषि यंत्र भी बांटे गए। शिविर में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के अंतर्गत पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम के दौरान सिंग्देव नौले में व्यापक स्वच्छता एवं संरक्षण अभियान भी चलाया गया।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख चम्पावत श्रीमती अंचला बोहरा सहित अनेक जन-प्रतिनिधिगण, मुख्य विकास अधिकारी डॉ जी.एस.खाती, अपर जिलाधिकारी श्री कृष्ण नाथ गोस्वामी भी उपस्थित रहे।

*अल्मोड़ा*
अभियान के पहले दिन अल्मोड़ा जिले में 11 विकासखंडों की 13 न्याय पंचायतों में शिविरों का आयोजन किया गया। न्याय पंचायत सल्लाभाटकोट के अंतर्गत रा.इ.का. भल्यूटा में आयोजित शिविर में मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा , डीएफओ प्रदीप कुमार धौलाखंडी , पुलिस उपाधीक्षक जीडी जोशी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी गई तथा प्राप्त शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शिविर में दिव्यांगों को एक व्हीलचेयर एवं दो छड़ियाँ वितरित की गईं तथा 77 लोगों को चिकित्सीय परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया गया। शिविर में राजस्व विभाग द्वारा 15 भूमि प्रमाणपत्र निर्गत करने के साथ ही नाम संशोधन का कार्य भी संपादित करने के साथ ही विभन्न विभागों द्वारा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

*बागेश्वर*
बागेश्वर में जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में न्याय पंचायत गढ़सेर के अंतर्गत ब्लॉक सभागार गरूड़ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आमजन को केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई तथा पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही आवेदन, शिकायत निस्तारण एवं लाभ स्वीकृति की सुविधा उपलब्ध कराई गई। शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर विभागीय सेवाओं एवं योजनाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित किया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा, एसडीएम वैभव कांडपाल सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

*ऊधमसिंहनगर*
ऊधमसिंहनगर जिले में मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शाशनी के नेतृत्व में खटीमा में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टाल लगाकर योजनाओं की जानकारियां दी गयी व पात्र लोगों को योजनाओं से लाभान्वित किया गया। इस अवसर पर 73 शिकायतें दर्ज की गई, जिसमे से 38 मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शिविर में एनआरएलएम योजनान्तर्गत 09 महिला स्वयं सहायता समूहों को रू. 36 लाख 15 हजार की धनराशि के चैक विततरित किए गए। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा सहित अनेक जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।
अभियान के दौरान रूद्रपुर में उप जिलाधिकारी मनीष बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में भूमि जांच से सम्बन्धित 03 शिकायतों का निस्तारण करने के साथ ही खतौनी-वितरण के 46, स्थायी निवास के 21, जाति प्रमाण पत्र के 07, आय प्रमाण पत्र के 08, उत्तरजीवी प्रमाण पत्र के 02 तथा 01 हैसियत प्रमाण पत्र बनाकर शिविर में उपलब्ध कराये गये।

*देहरादून*
देहरादून जिले में अभियान का शुभारंभ विकास खंड चकाराता की सूदूरवर्ती न्याय पंचायत क्वांसी से हुआ। शिविर में 109 समस्याएं प्रस्तुत की गई। डीएम सबिन बंसल ने शिविर में उपस्थित रहकर जनता की समस्याओं व शिकायतों को सुना और अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का संकल्प के अनुरूप सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक नागरिक तक सरकार की योजनाओं का लाभ पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पहुँचे तथा कोई भी व्यक्ति बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। शिविर में 658 से अधिक लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दिव्यांग एवं अन्य प्रमाण पत्र निर्गत करने के सेवाएं उपलब्ध कराई गई। शिविर में जिलाधिकारी ने तीन लाभार्थियों को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर पावर वीडर प्रदान किए। वयोश्री योजना के अंतर्गत पीएम दिव्यांग केंद्र की तरफ से 50 बुजुर्गो को निःशुल्क 250 सहायक उपकरण वितरित किए। साध ही 15 लाभार्थियों को किशोरी व वेबी किट प्रदान किए। शिविर में पहुंची असहाय 90 वर्षीय दिव्यांग महिला रामू देवी का आधार कार्ड न बनने की समस्या पर डीएम ने समाज कल्याण अधिकारी को बुजुर्ग महिला को आधार केन्द्र तक ले जाकर आधार कार्ड बनवाने के निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें दिव्यांग पेंशन सुविधा से भी लाभान्वित किया जाय।
शिविर में दायित्वधारी श्री गीता राम गौड़ सहित अन्य जन प्रतिनिधि तथा अधिकारी मौजूद रहे।

*रुद्रप्रयाग*
जनपद रुद्रप्रयाग में राजकीय इंटर कॉलेज, तैला में जिलाधिकारी प्रतीक जैन की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों द्वारा लगभग 100 से अधिक समस्याएं प्रस्तुत की गई जिनमें से अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर लंबित समस्याओं के शीघ्र निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए। शिविर में क्षेत्र पंचायत प्रमुख विनीता चमोली, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, अपर जिलाधिकारी श्याम सिंह राणा, उप जिलाधिकारी जखोली अनिल सिंह रावत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

*उत्तरकाशी*
उत्तरकाशी जिले में इस अभियान की शुरूआत दूरस्थ विकासखण्ड मोरी के न्याय पंचायत नानई से की गई। मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित नानई में आयोजित शिविर में 42 शिकायतें प्रस्तुत की गई, जिनमें से मौके पर ही निस्तारण करने के बाद शेष मामलों पर संबंधित विभागों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए गए। शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 59 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा राजस्व विभाग द्वारा 20 लोगों के जाति व आय प्रमाण पत्र निर्गत किए गए है। इस अवसर पर कृषि और उद्यान विभाग द्वारा कृषि उपकरण और रसायनों का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रमुख रणदेव सिंह राणा, उपजिलाधिकारी मुकेश चन्द रमोला, सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

*टिहरी गढ़वाल*
टिहरी गढ़वाल जिले में अभियान के अंतर्गत जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में न्याय पंचायत दिखोलगांव के श्रीदेव सुमन राजकीय इंटर कॉलेज चम्बा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में विकासखंड देवप्रयाग की पलेटी न्याय पंचायत अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज, हिण्डोलाखाल में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसी क्रम में जिला विकास अधिकारी मो. असलम की अध्यक्षता में विकासखंड कीर्तिनगर के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज, मलेथा में तथा परियोजना निदेशक डीआरडीए पी.एस. चौहान की अध्यक्षता में विकासखंड कार्यालय थत्यूड़ में और मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराडी की अध्यक्षता में विकासखंड नरेंद्रनगर के मुख्यालय फकोट में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन शिविरों में लगभग दो दर्जन विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर अपनी-अपनी विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही विभागीय सुविधओं एवं सेवाओं को उपलब्ध कराया गया। इस अवसर पर क्षेत्र पंचायत प्रमुख चंबा सुमन सजवान सहित भारी संख्या में जनता उपस्थित रही।

*हरिद्वार*
जनपद हरिद्वार में विकास खंड बहादराबाद, नारसन, खानपुर के अंतर्गत बहुउद्वेशीय शिविरों का आयोजन कर विभागों योजनाओं एवं सेवाओं से सैकड़ों लोगों को लाभान्वित किया गया। बहादराबाद में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों से सम्बन्धित 40 शिकायतें दर्ज करायी गयी। जिलाधिकारी द्वारा 18 प्रकरणों का मौके पर निस्तारण कर शेष समस्याओं पर संबंधित अधिकारियों को त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए। इस अवसर पर विधायक रानीपुर आदेश चौहान, दायित्वधारी देशराज कर्णवाल भी उपस्थित रहे।
विकासखण्ड नारसन के जूनियर हाई स्कूल मूण्डलाना में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों से सम्बन्धित 28 शिकायतें दर्ज करायी गयी। जिसमें से 12 शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया। विकासखण्ड खानपुर में उपजिलाधिकारी सौरभ असवाल की अध्यक्षता में शिविर का आयोजन किया गया।

*चमोली*

अभियान के तहत चमोली जिले में न्याय पंचायत बैरांगना में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन कर 23 विभागों के स्टॉल लगाकर ग्रामीणों को सरकार की जनोपयोगी योजनाओं की जानकारी दी गई। साथ इस दौरान दर्ज 181 शिकयातें एवं आवेदन पत्र प्राप्त हुए। अधिकांश शिकायतों का मौके पर निस्तारण कर शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी की उपस्थिति में आयोजित इस शिविर में विभागीय सेवाओं से ग्रामीणों को लाभान्वित करने के साथ ही विभिन्न योजनाओं के पात्र लाभार्थियों के लिए आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर निशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया।

पौड़ी जनपद में अभियान की शुरूआत गुरूवार को यमकेश्वर ब्लॉक के गंगा भोगपुर मल्ला न्याय पंचायत से होगी।