उत्तराखंड- उत्तराखंड में नगर निकायों के चुनाव को लेकर अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्राप्त हो रही जानकारी के मुताबिक राज्य में अक्तूबर के आखिरी सप्ताह में निकाय चुनाव होंगे। सरकार ने इस टाइमलाइन के साथ तैयारियां तेज कर दी हैं। ओबीसी आरक्षण से लेकर निकायों के परिसीमन आदि की सभी तैयारियां 15 सितंबर से पहले पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को पत्र भेज दिया जाएगा। वहीं, सरकार ने निकाय चुनाव से पहले अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ को नगर निगम बनाने की कवायद भी तेज कर दी है। प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों का कार्यकाल पिछले साल दो दिसंबर को पूरा हो गया था। छह माह यानी दो जून तक के लिए निकाय प्रशासकों के हवाले हो गए थे।
इस अवधि में चुनाव न होने के चलते सरकार ने तीन माह के लिए अवधि बढ़ा दी थी। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश आए और सरकार ने अंतिम टाइमलाइन तय कर ली है। राज्य में अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में निकाय चुनाव होंगे। इससे पहले 15 सितंबर तक ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए नियमावली आदि का काम पूरा होगा.निकायों का परिसीमन, वोटर लिस्ट का काम भी तब तक पूरा करने की समय सीमा रखी गई है। उधर, सचिव शहरी विकास नितेश झा ने बताया, निर्धारित समय सीमा में निकाय चुनाव कराने के लिए तैयारी तेज कर दी गई हैं।
29 अक्तूबर को दिवाली मनेगी,इससे पहले ही नगर निकायों के नेताओं की दिवाली मनेगी⤵️
सरकार ने तय किया कि दिवाली से पहले ही सभी निकायों में नए बोर्ड गठित कर दिए जाएंगे। दून नगर निगम का परिसीमन 15 दिन के भीतर शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नगर निगम देहरादून के 54 वार्डों का परिसीमन 15 दिन के भीतर सुधार कर शासन को भेजा जाए। इस समय सीमा में ओबीसी आरक्षण व वोटर लिस्ट का काम भी पूरा करना है, ताकि निकाय चुनाव में कोई अड़चन पेश न आए।
दो नए नगर निगम बनाने की तैयारी⤵️
नगर पालिका अल्मोड़ा और नगर पालिका पिथौरागढ़ को नगर निगम बनाने के लिए शासन स्तर से जिलाधिकारी को पत्र भेज दिया गया है। डीएम की ओर से इन निकायों को निगम बनाने के लिए सीमांकन संबंधी पूरी प्रस्ताव शासन को भेजा जाना है। माना जा रहा कि चुनाव से पहले ही सरकार इन्हें निगम बनाएगी। उधर, नगर पालिका रामनगर और नगर पालिका कर्णप्रयाग के परिसीमन में भी कुछ बदलाव होंगे।
कुछ क्षेत्र जोड़े जाएंगे या कुछ हटाए जाएंगे⤵️
दो नगर निगम बनने के बाद राज्य में 11 नगर निगम (देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, कोटद्वार, श्रीनगर, हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर, पिथौरागढ़ व अल्मोड़ा) हो जाएंगे। नगर पालिका की संख्या 41 और नगर पंचायतों की संख्या 50 होगी। सरकार ने पिछले दिनों ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए एक्ट में संशोधन को मंजूरी दी थी। अब इस संशोधन को लागू करने के लिए नियमावली लागू करने की तैयारी है। नियमावली का प्रस्ताव आगामी कैबिनेट में लाया जाएगा, ताकि निर्धारित समय सीमा में ओबीसी आरक्षण लागू हो सके।
अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ नगर पालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम करने पर राज्य सरकार विचार कर रही है। इसी तरह गढ़वाल मंडल के डोईवाला नगर पालिका को तृतीय म श्रेणी से उच्चीकृत कर प्रथम श्रेणी में करने का विचार किया जा रहा है। कहा, यदि ऐसा हुआ तो इन क्षेत्रों का विकास तो होगा ही, साथ में अच्छी सुविधाएं मिलेंगी। बृहस्पतिवार को शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया, समय-समय पर नगर निकायों का उच्चीकरण किया जाता है। ऐसे में हमारी सरकार अल्मोड़ा नगर पालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम और पिथौरागढ़ नगर पालिका को उच्चीकृत कर नगर निगम में करने का विचार कर रही है। उन्होंने बताया, देहरादून के डोईवाला की तृतीय श्रेणी की नगर पालिका को उच्चीकृत कर प्रथम श्रेणी में करने का विचार किया जा रहा है। कहा, अल्मोड़ा में कुछ लोग नगर निगम बनाने को लेकर सीमा विस्तार जैसी भ्रांतियां फैला रहे हैं, जो गलत है। अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, सिर्फ नगर पालिकाओं का उच्चीकरण पर विचार कर नगर निगम बनाया जाएगा।













उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों द्वारा क्षतिग्रस्त केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग को खोलने के लिए कार्य त्वरित गति से किया जा रहा है किन्तु मौसम साथ न देने के कारण मजदूरों की सुरक्षा के दृष्टिगत कार्य निरंतर नहीं हो पा रहा है।


जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नन्दन सिंह रजवार ने बताया कि सोनप्रयाग मन्दाकिनी नदी पर सेना द्वारा केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए जो पैदल पुल तैयार किया गया था, वह पुल कल बीती रात लगातार भारी बारिश होने से नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण बह गया है।

समिति ने सड़क संघर्ष का गठन करने पश्चात सड़क निर्माण के लिए शासन-प्रशासन व सरकार से पत्राचार कर मांग की जायेगी। यदि मंग पूरी नही हुई तो अग्रिम बैठक में आन्दोलन करने के लिए रणनीति बनायी जायेगी।बैठक में समस्त क्षेत्र लोगो ने कहा कि मोहनखाल-कानातोली- तक 13 किमी0 सड़क स्वीकृत थी,जिसमें से 10 किमी0 सड़क का निर्माण 1989/80 में किया गया था। इसी दौरान 1980/81 में वन अधिनियम बना तो इस सड़क का निर्माण बंद हो गया था। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यो में वन अधिनियम में सरलीकरण किया गया है। वक्ताओ ने कहा कि मोहनखाल-कानातोली-चोपता सड़क बनने से तीर्थाटन और पर्यटन की अपार संभावनाएं है। कहा कि इस सड़क के निर्माण से सैलानियों की चहल कदमी से स्थानीय लोगो को रोजगार भी मिलेगा, और स्थानीय लोगो का पलायन भी रुकेगा।




