राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट ने धरना स्थल पर पहुंचकर दिया आश्वासन, बोले—सामूहिक प्रयास से शासन स्तर पर होगी प्रभावी पैरवी
15 दिन में शासनादेश जारी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को लेकर तहसील परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को सातवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और स्थानीय ग्रामीणों का समर्थन मिल रहा है।
रविवार को राज्यमंत्री चंडी प्रसाद भट्ट धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की। उन्होंने पीएचसी ऊखीमठ के उच्चीकरण की मांग को क्षेत्र की आवश्यकताओं से जुड़ा बताते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे तथा शासन स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी।
आंदोलनकारियों ने कहा कि ऊखीमठ समेत आसपास के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पीएचसी पर निर्भर है। गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग, श्रीनगर अथवा अन्य बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करना पड़ता है। ऐसे में पीएचसी का उच्चीकरण होने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी और क्षेत्रवासियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव की ओर से 15 दिन के भीतर पीएचसी ऊखीमठ के उच्चीकरण का शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित अवधि में शासनादेश जारी नहीं होता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांग के संबंध में समयबद्ध शासनादेश चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था लोगों की मूलभूत आवश्यकता है और पीएचसी का उच्चीकरण क्षेत्र के व्यापक जनहित से जुड़ा मुद्दा है।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने कहा कि शासन स्तर से निर्धारित समय सीमा के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।









