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Saturday, March 14, 2026


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अभिषेक डिमरी के लेफ्टिनेट बनने पर जिलासु के ग्रामीणों द्वारा गांव पहुंचने पर भब्य स्वागत किया गया l

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भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त करने के बाद जब लेफ्टिनेंट अभिषेक डिमरी अपने पैतृक गांव जिलासू, ब्लॉक पोखरी, जिला चमोली पहुंचे, तो पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला। गांव में उनके सम्मान में भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने लेफ्टिनेंट डिमरी को सम्मानित करते हुए उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

कार्यक्रम में बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र के सभी प्रधान (ग्राम प्रधान) भी मौजूद रहे और उन्होंने इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताया।

इस स्वागत समारोह में लेफ्टिनेंट अभिषेक डिमरी के परिवार के सदस्य भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें उनकी दादी, माता, चाची, भाई और बहन सहित अन्य रिश्तेदार शामिल थे। गांव और आसपास के क्षेत्र के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

लेफ्टिनेंट अभिषेक डिमरी की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और सभी ने उनके उज्ज्वल सैन्य भविष्य की कामना की।

धामी सरकार के चार साल में बने 819 पंचायत भवन,प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्त

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*धामी सरकार के चार साल में बने 819 पंचायत भवन*

*प्रदेश में सात हजार किमी से अधिक सड़कें हुईं गड्डा मुक्

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूसरे कार्यकाल के बीते चार साल में प्रदेश में 819 पंचायत भवनों का निर्माण पुननिर्माण किया गया है।
प्रदेश में पंचायत भवनों की संख्या 5867 है। इसमें से 1134 पंचायत भवन लंबे समय से जीर्णशीर्ण चल रहे थे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचायतीराज विभाग को अभियान चलाकर जीर्ण- शीर्ण भवनों का पुनर्निमाण करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद गत चार वर्ष में विभाग ने 819 पंचायत भवनों का निर्माण- पुननिर्माण कर लिया है। शेष भवनों पर भी कार्य किया जा रहा है। मंगलवार को विभागीय मंत्री सतपाल महाराज ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह जानकारी सदन के सामने रखी।

*7 हजार किमी से अधिक सड़कें गड्डा मुक्त*
प्रदेश में लोकनिर्माण विभाग नवंबर के प्रथम सप्ताह तक सात हजार से अधिक किमी सडकों को गड्डा मुक्त कर चुका है। सदन में विभाग की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार प्रदेश की सड़कों को गड्डा मुक्त करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों के क्रम में विभाग ने वर्ष 2025-26 में मानसून काल से पूर्व 3134 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। जबकि मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी लंबी सड़कों को गड्डा मुक्त किया। इस दौरान अकेले हरिद्वार जनपद में 313 किमी से अधिक लंबी सड़कों को गड्डामुक्त किया गया।

*रोपवे परियोजनाओं पर काम तेज*

प्रदेश में विभिन्न तीर्थ स्थलों को रोपवे से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान है। पर्यटन मंत्री ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि विभाग ने कद्दूखाल से सुरकंडा देवी मंदिर के लिए पीपीपी मोड़ में रोपवे का संचालन शुरु कर दिया है। इसके अलावा जनपद चम्पावत में ठुलीगाड़ से पूर्णागिरी रोपवे भी पीपीपी मोड में निर्माणाधीन है। साथ ही जनपद उत्तरकाशी में जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक के लिए भी रोपवे पीपीपी मोड में विकसित किया जा रहा है। साथ ही साथ गौरीकुंड से केदारनाथ धाम, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए भी रोपवे निर्माण की प्रक्रिया गतिमान है।

ज्ञान मॉडल से समग्र विकास का रोडमैप, गरीब-युवा-किसान-महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस -समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य: सीएम

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*ज्ञान मॉडल से समग्र विकास का रोडमैप, गरीब-युवा-किसान-महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस*

*समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य: सीएम*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प GYAN मॉडल के माध्यम से राज्य के समग्र विकास को आगे बढ़ाना है। इस मॉडल में गरीब, युवा, अन्नदाता (किसान) और नारी सशक्तिकरण को विकास के चार प्रमुख स्तंभ के रूप में रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। इसी दृष्टि से बजट में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं।

*गरीब कल्याण पर विशेष ध्यान*
गरीब वर्ग के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। अन्नपूर्ति योजना के लिए ₹1300 करोड़, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लिए ₹298.35 करोड़ और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए ₹56.12 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आवास के लिए ₹25 करोड़, परिवहन निगम की बसों में निर्धारित श्रेणी के यात्रियों को निःशुल्क यात्रा सुविधा के लिए ₹42 करोड़ तथा रसोई गैस पर अनुदान के लिए ₹43.03 करोड़ रखे गए हैं।

साथ ही दिव्यांग, तीलू रौतेली और अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लिए ₹167.05 करोड़ तथा आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

*युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास*
प्रदेश के युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई योजनाओं को मजबूती दी गई है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के लिए ₹60 करोड़, पलायन रोकथाम योजना के लिए ₹10 करोड़ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए ₹62.29 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा गैर सरकारी महाविद्यालयों को सहायता के लिए ₹155.38 करोड़, शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए ₹10 करोड़ तथा मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के लिए ₹10 करोड़ निर्धारित किए गए हैं।

*किसानों की आय बढ़ाने पर जोर*
किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई योजनाओं को बजट में शामिल किया गया है। ट्राउट प्रोत्साहन योजना के लिए ₹39.90 करोड़, मिशन एप्पल के लिए ₹42 करोड़, दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए ₹32 करोड़ तथा दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए ₹42.50 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए ₹160.13 करोड़, मिलेट मिशन के लिए ₹12 करोड़ तथा किसान पेंशन योजना के लिए ₹12.06 करोड़ भी निर्धारित किए गए हैं।

*महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता*
महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। नंदा गौरा योजना के लिए ₹220 करोड़, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए ₹47.78 करोड़ और मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए ₹30 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना, महिला पोषण योजना, आंचल अमृत योजना और स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण जैसी योजनाओं के लिए भी बजट रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञान मॉडल के माध्यम से गरीबों के उत्थान, युवाओं के सशक्तिकरण, किसानों की समृद्धि और महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी तथा उत्तराखंड विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन सतर्क

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*खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन सतर्क*

*सूचना साझा करने हेतु जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर*

वर्तमान में इजरायल और ईरान के मध्य चल रहे युद्ध जैसे हालातों के दृष्टिगत विभिन्न अरबीय युद्ध प्रभावित खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पूर्ण रूप से सतर्क एवं प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा लगातार स्थिति की निगरानी की जा रही है तथा विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

प्राप्त निर्देशों के क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग के किसी भी विकासखंड, तहसील अथवा ग्राम क्षेत्र से यदि कोई व्यक्ति रोजगार, व्यवसाय, शिक्षा या अन्य किसी उद्देश्य से उक्त प्रभावित खाड़ी देशों में रह रहा है अथवा किसी प्रकार की समस्या में फंसा हुआ है, तो उसकी सूचना जिला प्रशासन को उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि ऐसे नागरिकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी के लिए आवश्यक अग्रिम कार्यवाही की जा सके।

जिला प्रशासन ने जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य या परिचित व्यक्ति इन देशों में फंसा हुआ है, तो उसकी जानकारी नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट नंबर एवं अन्य आवश्यक विवरण सहित निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों पर उपलब्ध कराएं।

जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा ने बताया कि मा० मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वर्तमान में इजराइल, ईरान सहित अन्य खाड़ी देशों में युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए वहां निवास कर रहे उत्तराखंड के नागरिकों विशेषकर जनपद रुद्रप्रयाग के निवासियों की सुरक्षा के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनपद के किसी व्यक्ति के परिजन इन देशों में रह रहे है और उनके संबंध में यदि किसी को कोई जानकारी देनी हो या कुशलक्षेम जाननी हो, तो वे इसके लिए जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग के आपदा कंट्रोल रूम एवं जिला प्रशासन के जिला नियंत्रण कक्ष के माध्यम से भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इन नंबरों पर संपर्क कर लोग अपने परिजनों से संबंधित सूचना उपलब्ध करा सकते हैं तथा यदि किसी के परिजन युद्ध से प्रभावित देशों में फंसे हुए है तो उसकी जानकारी भी प्रशासन को दे सकते हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि मा० मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार यह कंट्रोल रूम एवं हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे संचालित रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग की पूरी टीम इस संबंध में पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रशासन हर परिस्थिति में प्रभावित लोगों के साथ खड़ा है।

संपर्क हेतु हेल्पलाइन नंबर:

1. जिला आपदा कंट्रोल रूम, रुद्रप्रयाग
मो0: 8958757335
दूरभाष: 01364-233727

2. जिला नियंत्रण कक्ष, रुद्रप्रयाग
मो0: 7579257572

3. निरीक्षक LIU, रुद्रप्रयाग
मो0: 9412939886

जिला प्रशासन ने जनपद के समस्त नागरिकों से अपील की है कि इस संबंध में प्राप्त किसी भी सूचना को तत्काल प्रशासन के साथ साझा करें, ताकि प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।

टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्रः सीएम, टिहरी लेक फेस्टिवल’ शुरू, सीएम नेे की घोषणा-कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे निर्माण होगा

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*टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्रः सीएम*

*टिहरी लेक फेस्टिवल’ शुरू, सीएम नेे की घोषणा-कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे निर्माण होगा*

*नौ मार्च तक चलने वाले ‘टिहरी लेक फेस्टिवल’ की भव्य शुरूआत*

*सीएम ने किया कोटी डोबरा पर्यटन मार्ग का वर्चुअल शिलान्यास*

पर्यटन, साहसिक खेल के साथ ही पर्यावरण और संस्कृति के स्पष्ट संदेश के बीच ‘हिमालयन 0.2 द टिहरी लेक फेस्टिवल’ का भव्य शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन करते हुए विश्वास प्रकट किया कि सुंदर टिहरी झील आने वाले समय में देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में साहसिक खेलों और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी। इस मौके पर उन्होंने घोषणा कि कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे का निर्माण कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में देश-विदेश से आए खिलाड़ियोें के साथ ही अन्य मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा आध्यात्मिकता और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम रही है। हमारी नदियां, हमारे पर्वत, हमारी झीलें और हमारी परंपराएं पूरे विश्व को आकर्षित करती रही हैं। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टिहरी झील के किनारे आयोजित ये महोत्सव पर्यटन, खेल और स्थानीय संस्कृति तीनों को एक मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसी टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण होने के साथ- साथ साहसिक खेलों के आयोजन स्थल के रूप में तेजी से उभर रही है। यहां आयोजित होने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न जल क्रीड़ा प्रतियोगिताएं न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रही हैं, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने का काम भी कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने टिहरी को लेकर अपनी सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है कि टिहरी को वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए टिहरी झील में कयाकिंग, कैनोइंग, जेट-स्की, पैरा-सेलिंग, स्कूबा डाइविंग और अन्य साहसिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ताकि हमारे युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा कि टिहरी झील के आसपास विकसित हो रहा यह खेल और पर्यटन तंत्र स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर पैदा कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि टिहरी झील केवल एक पर्यटन स्थल ही न रहे, बल्कि खेल, संस्कृति और प्रकृति के संगम का वैश्विक केंद्र भी बने। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव जगजाहिर है और उन्होंने स्वयं यहां आकर हमें प्रेरित और प्रोत्साहित किया है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन और साहसिक खेलों को प्रोत्साहन देेने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का खास तौर पर जिक्र किया। इस क्रम में उन्होंने आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई-एल्टीट्यूड मैराथन, माणा में एमटीबी चैैलेंज, एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी जैसे बडे़ स्तर के आयोजनों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि हमारे युवा केवल अवसरों की प्रतीक्षा न करें, बल्कि अपने सामथ्र्य और परिश्रम से नए अवसरों का सृजन भी करें। उन्होंने कहा कि आज टिहरी में 400 से अधिक युवा पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह जानकारी खुशी देने वाली है। पूर्ण विश्वास है कि ये युवा भविष्य में उत्तराखंड को वैश्विक पैराग्लाइडिंग मानचित्र पर स्थापित करने में अवश्य सफल रहेंगे।

अपने संबोधन में उन्होंने टिहरी क्षेत्र में विकास कार्यों की तस्वीर को सामने रखा। उन्होंने बताया कि टिहरी क्षेत्र के के समग्र विकास हेतु लगभग 1300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर कार्य गतिमान है। इसमें टिहरी झील का विकास, रिंग रोड का निर्माण, तिमाड़ गांव को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित करने जैसे प्र्रमुख कार्य शामिल हैं। इसके अलावा यहां भिलंगना विकासखंड की सुनारगांव ग्राम पंचायत को एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। विशिष्ट पहाड़ी शैली में एक नया आंगनबाड़ी भवन भी बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में जिले के सभी ब्लाक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 10 कॉम्पेक्टर केंद्रों और 4267 कूड़ा संग्रहण केंद्रों की स्थापना का भी जिक्र किया।

इस मौके पर कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, क्षेत्रीय सांसद श्रीमती माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक श्री किशोर उपायाय, श्री विक्रम सिंह नेगी, श्री विनोद कंडारी, श्री शक्तिलाल शाह, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री संजय नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण, जिलाधिकारी श्रीमती नितिका खंडेलवाल, नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत व चंबा की अध्यक्ष सोबनी धनोला, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इससे पहले, मुख्यमंत्री का यहां पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सीएम ने देवडोलियों से आशीर्वाद भी लिया ।

*कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का शिलान्यास*
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का रिमोट दबाकर वर्चुअल शिलान्यास किया। यह मार्ग एशियन डेवलपमेंट बैंक के स्तर पर वित्त पोषित है,जिसकी कुल लागत 318 करोड़ है। इस मार्ग की लंबाई करीब 15 किलोमीटर है।

*नौ मार्च तक होंगी विभिन्न गतिविधियां*
-टिहरी लेक फेस्टिवल में नौ मार्च तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साहसिक खेल व पर्यटन गतिविधियों के अलावा लोक संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

वसंतोत्सव 2026 में कपिल शर्मा को राज्यपाल पुरस्कार,फल, सब्जी एवं पुष्प उत्पादन में उत्कृष्ट योगदान के लिए हुए सम्मानित

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अगस्त्यमुनि।
देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित ‘वसंतोत्सव 2026 – फ्लोरल हीलिंग: नेचर्स पाथ टू वेलबीइंग’ कार्यक्रम के दौरान रुद्रप्रयाग जिले के ग्राम टिमरिया, (अगस्त्यमुनि) निवासी प्रगतिशील कृषक कपिल शर्मा को फल, सब्जी एवं पुष्प उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

कपिल शर्मा ने अपने क्षेत्र में आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने संरक्षित खेती (पॉलीहाउस), ड्रिप सिंचाई प्रणाली, उन्नत बीजों का प्रयोग तथा जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के माध्यम से लागत घटाते हुए गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार किया है। उनके खेतों में मौसमी सब्जियों, उच्च गुणवत्ता वाले फलों तथा विभिन्न प्रजातियों के पुष्पों का उत्पादन किया जाता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी उनका योगदान सराहनीय है। उनके कृषि कार्यों से क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने आसपास के किसानों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर आधुनिक कृषि की ओर प्रेरित किया है।

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि कपिल शर्मा द्वारा अपनाई गई उन्नत पद्धतियां अन्य कृषकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं और इससे राज्य में उद्यानिकी को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

27 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक चले इस तीन दिवसीय वसंतोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कृषकों, उद्यान विशेषज्ञों, स्वयं सहायता समूहों और कृषि से जुड़े उद्यमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पुष्प प्रदर्शनी, कृषि नवाचारों की झलक, जैविक उत्पादों के स्टॉल तथा तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और बाजार प्रबंधन जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

सम्मान प्राप्त करने के बाद कपिल शर्मा ने कहा कि यह पुरस्कार उनके परिवार और क्षेत्र के सभी किसानों के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच को अपनाएं तो कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में नवाचार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कृषि एवं उद्यान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। समारोह ने प्रदेश में कृषि और पुष्प उत्पादन को नई दिशा देने का संदेश दिया।

रुद्रप्रयाग में ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ का बड़ा खुलासा! बांग्लादेश का पीतल सोने के नाम पर बेचने का आरोप, सराफा बाजार में मिलावट का खतरनाक खेल?

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रुद्रप्रयाग में ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ का बड़ा खुलासा!
बांग्लादेश का पीतल सोने के नाम पर बेचने का आरोप, सराफा बाजार में मिलावट का खतरनाक खेल?

रुद्रप्रयाग जिले के सराफा बाजार में इन दिनों आभूषणों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कुछ कारोबारी असली सोने और चांदी के नाम पर मिलावटी धातु बेचकर ग्राहकों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक चर्चा है कि सस्ती धातु या पीतल को सोने की परत चढ़ाकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

चांदी में ‘सिल्वर’ का खेल, सोने पर तांबे की परत!

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में शुद्धता की अनदेखी कर ग्राहकों के विश्वास को तोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि—
चांदी में सस्ती धातुएं मिलाकर गुणवत्ता घटाई जा रही है।
तांबे या अन्य धातु पर सोने की परत चढ़ाकर उसे असली सोना बताकर बेचा जा रहा है।
वजन पूरा दिया जा रहा है, लेकिन शुद्धता कम पाई जा रही है।
कुछ आभूषण समय के साथ काले पड़ रहे हैं या एलर्जी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
हॉलमार्क और BIS की अनदेखी?
विशेषज्ञों के अनुसार असली चांदी पर 925 अंकित होता है, जिसका अर्थ है कि उसमें 92.5% शुद्ध चांदी है। वहीं सोने के आभूषण 18, 20 या 22 कैरेट हॉलमार्क के साथ आते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क आभूषण की शुद्धता की सरकारी गारंटी माना जाता है। बिना हॉलमार्क के आभूषण खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

चांदी में कैसे होती है मिलावट?
चांदी में मजबूती और चमक बनाए रखने के लिए एलॉय मिलाना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन यदि निकृष्ट या अत्यधिक सस्ती धातुएं मिलाई जाएं, तो—

चमक तो बनी रहती है
लेकिन शुद्धता कम हो जाती है
कीमत असली जैसी ही वसूली जाती है।

सोने में तांबे का खेल कैसे?
सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में तांबे या अन्य सस्ती धातु पर सोने की पतली परत चढ़ाकर उसे असली सोने के रूप में बेचा जाता है। बाहर से चमकदार दिखने वाला आभूषण भीतर से कम मूल्य का हो सकता है।

रासायनिक प्रक्रियाओं से तांबे को सुनहरा रंग देना संभव है, लेकिन यदि यही तकनीक ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए इस्तेमाल हो, तो यह सीधी-सीधी धोखाधड़ी मानी जाएगी।

प्रशासन और निगरानी विभागों पर सवाल?
ग्राहकों का कहना है कि सराफा दुकानों की नियमित जांच, सैंपल टेस्टिंग और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि समय-समय पर जांच अभियान चलें, तो मिलावटखोरी पर लगाम लग सकती है।

असली-नकली की पहचान कैसे करें?
✔ केवल हॉलमार्क युक्त आभूषण खरीदें
✔ 925, 18K, 22K जैसे अंकन अवश्य देखें
✔ खरीद का पक्का बिल और शुद्धता प्रमाणपत्र लें
✔ अत्यधिक सस्ती कीमत से सावधान रहें
✔ संदेह होने पर अधिकृत जांच केंद्र में परीक्षण कराएं
✔ चुंबक परीक्षण करें — चांदी चुंबकीय नहीं होती।

विश्वास पर चोट का मामला–
सोना-चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि लोगों की मेहनत की कमाई और विश्वास का प्रतीक है। यदि मिलावट और फर्जीवाड़ा सच साबित होता है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक भरोसे पर सीधा हमला है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ पर कब और कितनी सख्ती दिखाता है।
सतर्क रहें, जागरूक बनें — क्योंकि चमक के पीछे सच्चाई छिपी भी हो सकती है।

रुद्रप्रयाग में ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ का बड़ा खुलासा! बांग्लादेश का पीतल सोने के नाम पर बेचने का आरोप, सराफा बाजार में मिलावट का खतरनाक खेल?

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कारोबारी असली सोने और चांदी के नाम पर मिलावटी धातु बेचकर ग्राहकों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ कर रहे हैं। यहां तक चर्चा है कि सस्ती धातु या पीतल को सोने की परत चढ़ाकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।

चांदी में ‘सिल्वर’ का खेल, सोने पर तांबे की परत!

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में शुद्धता की अनदेखी कर ग्राहकों के विश्वास को तोड़ा जा रहा है। बताया जा रहा है कि—
चांदी में सस्ती धातुएं मिलाकर गुणवत्ता घटाई जा रही है।
तांबे या अन्य धातु पर सोने की परत चढ़ाकर उसे असली सोना बताकर बेचा जा रहा है।
वजन पूरा दिया जा रहा है, लेकिन शुद्धता कम पाई जा रही है।
कुछ आभूषण समय के साथ काले पड़ रहे हैं या एलर्जी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
हॉलमार्क और BIS की अनदेखी?
विशेषज्ञों के अनुसार असली चांदी पर 925 अंकित होता है, जिसका अर्थ है कि उसमें 92.5% शुद्ध चांदी है। वहीं सोने के आभूषण 18, 20 या 22 कैरेट हॉलमार्क के साथ आते हैं।
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क आभूषण की शुद्धता की सरकारी गारंटी माना जाता है। बिना हॉलमार्क के आभूषण खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

चांदी में कैसे होती है मिलावट?
चांदी में मजबूती और चमक बनाए रखने के लिए एलॉय मिलाना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन यदि निकृष्ट या अत्यधिक सस्ती धातुएं मिलाई जाएं, तो—

चमक तो बनी रहती है
लेकिन शुद्धता कम हो जाती है
कीमत असली जैसी ही वसूली जाती है।

सोने में तांबे का खेल कैसे?
सूत्रों के अनुसार कुछ मामलों में तांबे या अन्य सस्ती धातु पर सोने की पतली परत चढ़ाकर उसे असली सोने के रूप में बेचा जाता है। बाहर से चमकदार दिखने वाला आभूषण भीतर से कम मूल्य का हो सकता है।

रासायनिक प्रक्रियाओं से तांबे को सुनहरा रंग देना संभव है, लेकिन यदि यही तकनीक ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए इस्तेमाल हो, तो यह सीधी-सीधी धोखाधड़ी मानी जाएगी।

प्रशासन और निगरानी विभागों पर सवाल?
ग्राहकों का कहना है कि सराफा दुकानों की नियमित जांच, सैंपल टेस्टिंग और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि समय-समय पर जांच अभियान चलें, तो मिलावटखोरी पर लगाम लग सकती है।

असली-नकली की पहचान कैसे करें?
✔ केवल हॉलमार्क युक्त आभूषण खरीदें
✔ 925, 18K, 22K जैसे अंकन अवश्य देखें
✔ खरीद का पक्का बिल और शुद्धता प्रमाणपत्र लें
✔ अत्यधिक सस्ती कीमत से सावधान रहें
✔ संदेह होने पर अधिकृत जांच केंद्र में परीक्षण कराएं
✔ चुंबक परीक्षण करें — चांदी चुंबकीय नहीं होती।

विश्वास पर चोट का मामला–
सोना-चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि लोगों की मेहनत की कमाई और विश्वास का प्रतीक है। यदि मिलावट और फर्जीवाड़ा सच साबित होता है, तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक भरोसे पर सीधा हमला है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘गोल्ड–सिल्वर गेम’ पर कब और कितनी सख्ती दिखाता है।
सतर्क रहें, जागरूक बनें — क्योंकि चमक के पीछे सच्चाई छिपी भी हो सकती है।

लोकल फॉर वोकल अभियान से सशक्त हो रहीं ग्रामीण महिलाएं

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*रुद्रप्रयाग में स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे प्राकृतिक हर्बल रंग*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लोकल फॉर वोकल अभियान को जनपद रुद्रप्रयाग में निरंतर सफलता मिल रही है। इस अभियान के अंतर्गत स्थानीय महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में जनपद रुद्रप्रयाग में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों सहित होली की मिठाई गुजिया का निर्माण किया जा रहा है।
रुद्रप्रयाग जनपद के जवाड़ी, कुमोली, मायकोटी, मेदनपुर एवं ऊखीमठ क्षेत्र के गांवों में महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। इन रंगों को जनपद मुख्यालय, आसपास के स्थानीय बाजारों तथा विकास भवन सहित हिलान्स आउट लेट के माध्यम से विक्रय हेतु उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को स्वरोजगार का नया अवसर प्राप्त हो रहा है, वहीं रसायनयुक्त रंगों से दूर रहने का संदेश भी आमजन तक पहुँच रहा है।
महिलाओं द्वारा पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी एवं लाल रंग तथा गेंदा फूल से केसरिया रंग तैयार किए जा रहे हैं। इन प्राकृतिक रंगों की बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल रही है, विशेष रूप से आगामी होली पर्व को देखते हुए।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा समूह से जुड़ी महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। प्रशिक्षण उपरांत अब महिलाएं अपने-अपने गांवों में हर्बल रंगों का निर्माण कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका सशक्त हो रही है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अनूप कुमार, ने बताया कि प्राकृतिक रंगों के विक्रय से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी तथा यह पहल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि होली पर्व पर स्वदेशी एवं प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करें।उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्राकृतिक रंग निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया है। अब वे अपने गांवों में ही हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। होली पर्व पर इन रंगों की बिक्री से महिलाओं की आजीविका और अधिक सशक्त होगी।”
हर्बल रंग बना रही संगीता ,मोनिका कप्रवाण निवासी , जवाड़ी गांव ने बताया कि हर्बल रंग बनाने से हमें घर बैठे रोजगार मिला है। लोग हमारे बनाए रंगों को पसंद कर रहे हैं और हमें अपनी मेहनत का अच्छा लाभ मिल रहा है।

 

लोक गीतों की धुनों के बीच सीएम आवास में निखरे होली के रंग

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मुख्यमंत्री आवास में सोमवार को होली के रंगों की बहार नजर आई।
प्रदेश भर से आए लोक कलाकारों और होल्यारों ने अपनी अपनी धुनों से माहौल को उत्सवमय कर दिया। इस दौरान एक तरफ, हारूल नृत्य करते जौनसारी कलाकार थे तो दूसरी तरफ, अपनी ही धुन में मगन होली गीत गाते कुमांउनी होल्यारों की टीम। इन सबके बीच पौड़ी जिले के राठ क्षेत्र से आई सांस्कृतिक टोली ने भी अपना रंग जमाया। इस दौरान आम और खास ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को रंग लगाकर शुभकामनाएं प्रेषित की।

मुख्यमंत्री आवास का प्रांगण सोमवार को होली के रंगों में सराबोर नजर आया। इस दौरान प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि और एकता के भी दर्शन हुए। पूर्वाह्न से ही प्रदेश भर के लोक कलाकारों, संस्कृति कर्मियों की टोलियां होली गायन करते हुए, सीएम आवास पहुंचती रही। एक तरफ गढ़वाल-कुमाऊं से लेकर जौनसार तक का होली गायन था, नृत्य था। इस दौरान होली के गीत गूंजे। पारंपरिक गायन हुआ। ढोल, मंजीरे बजे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगत ने होली गीतों के प्रभाव को और बढ़ा दिया। आओ दगड़ियो, नाचा गावा, आ गई रंगीली होली का आह्वान यदि कुमांउ से आए कलाकारों ने किया, तो राठ क्षेत्र के कलाकारों ने गाया-आई डान्ड्यू बसंत, डाली मा मौल्यार।

इस दौरान जो भी यहां पहुंचा लोक के रंगों में खो गया। लोक संस्कृति का वह प्रभाव भी था, जो उत्तराखंड को सांस्कृतिक तौर पर विशिष्टता प्रदान करता है। लोक कलाकार इस बात से बेहद खुश दिखे कि उन्हें विशेष तौर पर बुलाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लोक कलाकारों के संग होली के रंगों में पूरी तरह से रंगे नजर आए। मुख्यमंत्री खुद लोक कलाकारों के साथ थिरकने को मजबूर हो गए।

*लोक संस्कृति पर सीएम कर रहे अच्छा काम*
उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों से आए लोक कलाकारों ने इस मौके पर कहा कि लोक संस्कृति पर सीएम अच्छा काम कर रहे हैं। राज्य सरकार लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए, लोक कलाकारों को संरक्षण प्रदान कर रही है।