बारिश के चलते पहाड़ी से आया मलबा और पत्थर, यात्रियों की आवाजाही पर रोक
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा के बीच मौसम ने एक बार फिर परेशानी बढ़ा दी है। गत रात्रि हुई बारिश के कारण चीरबासा हैलीपैड के समीप केदारनाथ पैदल मार्ग पर मलबा और पत्थर आने से मार्ग पुनः अवरुद्ध हो गया है। मार्ग अवरुद्ध होने के बाद प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल सोनप्रयाग और गौरीकुंड में यात्रियों की आवाजाही रोक दी है।
मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिलते ही जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) ने संबंधित जेई और डीडीएमए गुप्तकाशी को तत्काल इसकी जानकारी दी। क्षेत्र में अभी भी बारिश जारी होने के कारण फिलहाल मार्ग खोलने का काम शुरू नहीं किया जा सका है।
प्रशासन के अनुसार मौसम सामान्य होने के बाद चीरबासा क्षेत्र में पहुंचे मलबे और पत्थरों को हटाकर पैदल मार्ग को सुरक्षित तरीके से सुचारू करने की कार्रवाई की जाएगी। मार्ग की स्थिति सामान्य होने तक यात्रियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि मौसम और यात्रा मार्ग की स्थिति को देखते हुए धैर्य बनाए रखें तथा प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करें। यात्रियों से अनावश्यक रूप से अवरुद्ध मार्ग की ओर आगे न बढ़ने को कहा गया है।
चीरबासा हैलीपैड के पास फिर अवरुद्ध हुआ केदारनाथ पैदल मार्ग..
72 लाख की सड़क दो साल में गड्ढों में! आखिर किसकी जेब भरी और किसने भुगता खामियाजा?
तिलवाड़ा। सरकार सड़कें गड्ढामुक्त करने के दावे कर रही है, लेकिन तिलवाड़ा-सूर्यप्रयाग-मुसाडुंग मोटर मार्ग की तस्वीर इन दावों को आईना दिखा रही है। वर्ष 2023 में करीब 72 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद जिस सड़क का डामरीकरण दो साल भी नहीं टिक पाया, वह आज बारिश में तालाब और जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।
सुमाड़ी कस्बे से सटी सड़क की हालत इतनी खराब है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। बारिश होते ही सड़क पर बने गड्ढे पानी से भर जाते हैं और वाहन चालकों को
अंदाजा तक नहीं रहता कि गड्ढा कितना गहरा है। ऐसे में हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
72 लाख का काम आखिर कितने दिन चला?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सड़क सुधार और डामरीकरण के लिए 72 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी तो आखिर वह पैसा कहां और कैसे खर्च हुआ?
यदि काम नियमों और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार हुआ था तो महज दो वर्ष के भीतर सड़क की यह दुर्दशा कैसे हो गई? क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई थी? क्या कार्य की तकनीकी जांच की गई? क्या अधिकारियों ने मौके पर जाकर कार्य की गुणवत्ता परखी थी?
इन सवालों का जवाब आज जनता मांग रही है।
ईई, एई और जेई की निगरानी पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में ठेकेदार के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग के ईई, एई और जेई की निगरानी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। यदि विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी और निरीक्षण के बावजूद सड़क दो साल में उखड़ गई तो फिर जिम्मेदारी किसकी है?
लोगों में यह भी आरोप है कि विभागीय निर्माण कार्यों में कथित कमीशनखोरी और ठेकेदारों से मिलीभगत के चलते गुणवत्ता से समझौता किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निगरानी और सत्यापन करने वाले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
जनता सड़क पर, विभाग ‘बजट’ के पीछे!
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली को लेकर कई बार लोक निर्माण विभाग को सूचना दी जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिल रहे हैं। अब विभाग बजट का अभाव बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचता नजर आ रहा है।
जनता का सवाल है—जब सड़क निर्माण के लिए लाखों रुपये का बजट उपलब्ध था, तब सड़क की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? और अब सड़क टूटने के बाद फिर से बजट की जरूरत क्यों पड़ रही है?
अगर हर दो-तीन साल में सड़क के लिए नया बजट चाहिए तो पुराने बजट से हुए काम की गुणवत्ता की जवाबदेही कौन लेगा?
वाहनों की मरम्मत का बढ़ा खर्च
गड्ढों के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वाहन चालकों के अनुसार खराब सड़क के कारण वाहनों के पट्टे, चेबर और अन्य महत्वपूर्ण कल-पुर्जे आए दिन खराब हो रहे हैं। यानी सरकारी सड़क की खराब गुणवत्ता का आर्थिक बोझ भी अब आम जनता और वाहन मालिकों की जेब पर पड़ रहा है।
कस्बे की सड़क का यह हाल तो गांवों की हालत क्या होगी?
सुमाड़ी कस्बे से सटी मुख्य सड़क की यह हालत देखकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सवाल यह भी है कि यदि विभाग प्रमुख कस्बों और बाजारों से जुड़ी सड़कों की मरम्मत नहीं कर पा रहा है तो दूरस्थ गांवों की सड़कों का जिम्मेदार कौन है?
जांच हुई तो खुल सकती है ’72 लाख’ की पूरी कहानी
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और शासन से मांग की है कि वर्ष 2023 में स्वीकृत 72 लाख रुपये के कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। सड़क की वर्तमान स्थिति का तकनीकी सर्वे कराया जाए और यह जांचा जाए कि निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
साथ ही ईई, एई, जेई और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की भी जांच की जाए। कार्य की एमबी, भुगतान, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान कराया जाए। यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता, सरकारी धन के दुरुपयोग, लापरवाही या कमीशनखोरी के आरोपों की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक सड़क के गड्ढों का नहीं है—सवाल 72 लाख रुपये के सरकारी धन और उस पैसे से जुड़े जनता के अधिकार का है।
सरकार कहती है ‘गड्ढामुक्त सड़क’, लेकिन तिलवाड़ा-सूर्यप्रयाग-मुसाडुंग मार्ग पूछ रहा है—घोषणाओं से सड़कें बनेंगी या गुणवत्ता और जवाबदेही से?
विद्यालयों में 15 सितंबर तक चलेगा स्वच्छता पखवाड़ा, सीईओ रुद्रप्रयाग ने दिए जरूरी निर्देश
रुद्रप्रयाग। जिले के विद्यालयों में एक से 15 सितंबर तक स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। इसको लेकर मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी ने जिले के सभी खंड एवं उप शिक्षा अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करते हुए ब्लॉकवार रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
सीईओ ने कहा कि स्वच्छता पखवाड़े का उद्देश्य विद्यार्थियों में विद्यालय की स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, शौचालयों की सफाई, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। सभी विद्यालयों में स्वच्छता आधारित गतिविधियां आयोजित कर विद्यार्थियों को स्वच्छता की शपथ दिलाने और इसके महत्व की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। 
उन्होंने पीएम पोषण योजना के तहत रसोईघर के अंदर-बाहर साफ-सफाई रखने, खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखने, भोजन बनाने में स्वच्छ पेयजल का इस्तेमाल करने तथा पके भोजन का वितरण स्वच्छ स्थान पर कराने के निर्देश दिए।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने विद्यार्थियों में भोजन से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने, नाखून व दांतों की नियमित सफाई तथा व्यक्तिगत स्वच्छता की आदत विकसित करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित कर स्थानीय सब्जियों को उगाने और उन्हें पीएम पोषण योजना में शामिल करने के निर्देश दिए।
पखवाड़े के दौरान विद्यालयों में स्वैच्छिक रूप से विशेष भोज आयोजित करने तथा इसमें स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों और विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्यों का सहयोग लेने को भी कहा गया है। सीईओ ने सभी विद्यालयों में अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने और इसकी ब्लॉकवार रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
खतेणा गांव में धूमधाम से मनाई जन्माष्टमी, भव्य झांकी और मटकी फोड़ ने बांधा समां
रुद्रप्रयाग। तल्लानागपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत खतेणा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण की भव्य झांकी निकाली गई, जिसमें ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मटकी फोड़ (दही हांडी) प्रतियोगिता रही। युवाओं और बच्चों ने पूरे जोश के साथ प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा गांव भक्तिमय हो उठा।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ ही सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को भी मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह बिष्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोषी देवी, ग्राम प्रधान वासुदेव बिष्ट, सरपंच धर्मपाल सिंह, पूर्व सरपंच महिपाल नेगी, उप प्रधान लक्ष्मण रावत, महिला मंगल दल अध्यक्ष शारदा देवी समेत वीरपाल बुटोला, मोहन बिष्ट, हयात सिंह नेगी, दयाल सिंह रावत, रघुनाथ नेगी, दर्शन बिष्ट, दर्शन रावत, दिनेश रावत आदि मौजूद रहे।
आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी ग्रामवासियों और प्रतिभागियों का आभार जताया।
7 सितंबर को होगा कक्षा 2, 5 और 8 के विद्यार्थियों का दक्षता आधारित आकलन कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए बनेगी रेमिडियल टीचिंग की कार्ययोजना
7 सितंबर को होगा कक्षा 2, 5 और 8 के विद्यार्थियों का दक्षता आधारित आकलन
कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए बनेगी रेमिडियल टीचिंग की कार्ययोजना
रुद्रप्रयाग। राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की वास्तविक अधिगम स्थिति का पता लगाने के लिए दक्षता आधारित आकलन किया जाएगा। प्रथम चरण में जनपद के सभी राजकीय विद्यालयों में कक्षा 2, 5 और 8 के विद्यार्थियों का आकलन आगामी 7 सितंबर को किया जाएगा। आकलन में अपेक्षा से कम प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को चिन्हित कर उनके लिए सुधारात्मक शिक्षण (रेमिडियल टीचिंग) की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी अजय कुमार चौधरी ने बताया कि शासन के निर्देशों के तहत विद्यार्थियों की वास्तविक अधिगम स्थिति जानने के लिए दक्षता आधारित आकलन कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में निर्धारित दक्षताओं की स्थिति का पता लगाकर उनके शैक्षणिक स्तर में सुधार करना है।
उन्होंने बताया कि कक्षा 2 के विद्यार्थियों का हिंदी एवं गणित, कक्षा 5 में हिंदी, गणित एवं पर्यावरण तथा कक्षा 8 में हिंदी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान विषयों का आकलन किया जाएगा। आकलन के बाद विद्यार्थियों के प्रदर्शन का कक्षावार एवं दक्षतावार विश्लेषण किया जाएगा और कमजोर दक्षता वाले विद्यार्थियों के लिए सुधारात्मक शिक्षण की योजना बनाई जाएगी।
सीईओ ने सभी खंड एवं उप शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए कि दक्षता आधारित आकलन के प्रश्नपत्र जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), रतूड़ा से उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें अनिवार्य रूप से 6 सितंबर तक सभी राजकीय विद्यालयों में पहुंचाया जाए। प्रथम आकलन के बाद 28 सितंबर को मध्यावधि आकलन किया जाएगा। उन्होंने सभी विद्यालयों में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की आकलन परीक्षा में सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षता आधारित आकलन के संबंध में प्रत्येक कार्य दिवस विद्यालय की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी जाए। साथ ही अभिभावकों को भी इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए और विद्यालय प्रबंधन समितियों से सहयोग लिया जाए।
मध्यावधि समीक्षा के बाद कमजोर दक्षता वाले विद्यालयों में बीआरपी, सीआरपी, डायट फैकल्टी तथा शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ के माध्यम से सहयोग दिया जाएगा। कार्यक्रम के संचालन के लिए विकासखंड स्तर पर नोडल अधिकारी भी नामित किए गए हैं।
अगस्त्यमुनि विकासखंड के लिए डीओ माध्यमिक श्रीमती सोनी मेहरा, ऊखीमठ के लिए खंड शिक्षा अधिकारी यशवीर रावत तथा जखोली के लिए उप शिक्षा अधिकारी तनुजा देवड़ाड़ी को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। इनके सहयोग के लिए बीआरपी/सीआरपी को लगाया गया है। प्रत्येक तीन न्याय पंचायतों पर एक मेंटर की तैनाती की जाएगी।
इसके अलावा डायट प्राचार्य, मुख्य शिक्षा अधिकारी तथा एससीईआरटी से नामित अधिकारी आकलन प्रक्रिया का अनुश्रवण करेंगे। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने सभी राजकीय विद्यालयों से आकलन में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है।
मुख्य सचिव ने की प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा,रोपवे परियोजनाओं में तेजी लाने के दिए निर्देश.
रोपवे परियोजनाओं के लिए रोपवे रेग्यूलेषन और रूल्स शीघ्र हों जारीः मुख्य सचिव*
मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने बुधवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने ब्रिडकुल को प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं के प्रभावी संचालन एवं नियमन के लिए रोपवे रेग्यूलेषन और रूल्स शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में तेजी लाते हुए लंबित प्रक्रियाओं, भूमि संबंधी प्रकरणों एवं आपसी समन्वय से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे कनेक्टिविटी प्रदेश की पर्यटन एवं यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए सभी परियोजनाओं में समयबद्धता, गुणवत्ता एवं आपसी समन्वय पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि रोपवे परियोजनाओं में पार्किंग डेवलपमेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध हो सके।
मुख्य सचिव ने केदारनाथधाम एवं हेमकुंड साहिब रोपवे की प्रगति की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित एजेंसियों को परियोजना की आगामी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन एवं कार्यदायी संस्था के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए गए। नैनीताल क्षेत्र की रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने रानीबाग-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी-कैंचीधाम तथा रानीबाग-भीमताल-भवाली रोपवे परियोजनाओं में एनएचएलएमएल एवं यूकेएमआरसी को आपसी तालमेल से इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने यूकेएमआरसी के प्रोजेक्ट के फाइनल अप्रूवल की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी करने के साथ ही फाईनल डीपीआर तथा डीएफसी की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देष दिए।
मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग द्वारा निर्माण की जा रही परियोजनाओं जोशीमठ-औली-गोरसों, रैथल-बारसू तथा पुरकुल रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने इन परियोजनाओं की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने यमुनोत्री-जानकी चट्टी, हनुमानचट्टी-पूर्णागिरि एवं तपोवन-कुंजपुरा रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने इनसे सम्बन्धित लम्बित कार्यों को शीघ्र पूरा करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि भूमि सम्बन्धी विषयों का समाधान कर परियोजनाओं की आगे की कार्यवाही में किसी प्रकार का विलम्ब न हो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर सचिव श्री धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव श्री विनीत कुमार सहित एनएचएलएमएल एवं यूकेएमआरसी के अधिकारी एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।
भारी बारिश के बाद मकान में घुसा मलबा, एक ही परिवार के तीन लोग दबे
भारी बारिश के बाद मकान में घुसा मलबा, एक ही परिवार के तीन लोग दबे
अल्मोड़ा। जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में देर शाम बड़ा हादसा होने की सूचना है। बताया जा रहा है कि भारी बारिश के कारण पहाड़ी से अचानक मलबा खिसककर एक आवासीय मकान में जा घुसा। हादसे के समय मकान के भीतर मौजूद एक ही परिवार के तीन लोग मलबे की चपेट में आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके के लिए रवाना हुईं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के प्रयास किए गए।
यह घटना 31 अगस्त 2026 की देर शाम की बताई जा रही है, हालांकि घटना के समय, तीनों लोगों की स्थिति और रेस्क्यू के अंतिम परिणाम की आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं हो सकी है। आधिकारिक पुष्टि के बाद ही जनहानि अथवा घायलों से संबंधित विवरण स्पष्ट हो सकेगा।
लगातार बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और मलबा आने की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन की ओर से लोगों से संवेदनशील एवं भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है
राष्ट्रीय खेल दिवस पर कबड्डी में तिलवाड़ा बना चैंपियन, टाईब्रेकर में श्रीनगर को 5-4 से हराया
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर जनपद स्तरीय ओपन बालक वर्ग कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अगस्त्यमुनि स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता में जनपद की कुल 06 टीमों ने प्रतिभाग किया।
प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी मनोज सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला तिलवाड़ा और श्रीनगर की टीमों के मध्य खेला गया। निर्धारित समय तक दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया और स्कोर 23-23 से बराबर रहा, जिसके चलते मैच टाई हो गया।
इसके बाद विजेता के निर्णय के लिए 05-05 रेड का टाईब्रेकर लागू किया गया, जिसमें तिलवाड़ा की टीम ने 05-04 से जीत दर्ज कर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। फाइनल मैच काफी रोमांचक रहा और दर्शकों ने दोनों टीमों का उत्साहवर्धन किया।इस अवसर पर युवा कल्याण विभाग के प्रशिक्षक मनवर नेगी, दीपक सिंह रावत सहित अन्य खेल प्रेमी एवं खिलाड़ी मौजूद रहे।
पीएम पोषण योजना में सुरक्षा को लेकर सख्ती, रोजाना किचन-कम-स्टोर का निरीक्षण अनिवार्य
रुद्रप्रयाग। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के तहत विद्यालयों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता, गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) एवं पीएम पोषण के नोडल अधिकारी अजय कुमार चौधरी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, उप शिक्षा अधिकारियों तथा प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी कर विद्यालयों में किचन-कम-स्टोर की प्रतिदिन निगरानी करने को कहा है।
उन्होंने कहा कि लापरवाही अथवा सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण कई बार अप्रिय घटनाएं हो जाती हैं। गैस चूल्हे, खाना बनाने के बर्तन और अन्य उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने जैसी स्थिति से बचने के लिए विद्यालय स्तर पर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।
डीईओ बेसिक ने संस्थाध्यक्षों और विद्यालय स्तरीय प्रभारियों को किचन-कम-स्टोर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के साथ प्रतिदिन निरीक्षण करने के निर्देश दिए। भोजनमाताओं को भी स्वच्छता, सावधानी और सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट निर्देश देने को कहा गया है। खाना बनाने से पहले बर्तनों और उपकरणों की जांच तथा खाद्य सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखने पर विशेष जोर दिया गया।
बरसात में खाद्य सामग्री के रखरखाव पर जोर
बरसाती सीजन को देखते हुए खाद्य सामग्री की स्वच्छता, गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। खंड स्तरीय अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान पीएम पोषण योजना के मानकों के साथ स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी अनिवार्य रूप से जांच करने को कहा गया है।
अजय कुमार चौधरी ने कहा कि पीएम पोषण योजना के संचालन में भोजनमाता की भूमिका महत्वपूर्ण है और उनसे पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य कराया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के निर्धारित मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। विद्यालयों में नौनिहालों को परोसे जाने वाले पके भोजन की स्वच्छता, गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित संस्था की होगी।
उत्तराखंड में 35 विद्यालय होंगे इंटर स्तर पर उच्चीकृत, रुद्रप्रयाग के तीन स्कूल शामिल
उत्तराखंड में 35 विद्यालय होंगे इंटर स्तर पर उच्चीकृत, रुद्रप्रयाग के तीन स्कूल शामिल
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत करने की मंजूरी दी है। इनमें रुद्रप्रयाग जिले के तीन विद्यालय शामिल हैं। शासन की इस मंजूरी से पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने आसपास ही 12वीं तक की शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा।
रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र के दो और रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के एक विद्यालय का उच्चीकरण किया जाएगा। केदारनाथ क्षेत्र के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाड़व और शहीद राजेन्द्र सिंह राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कालीमठ को इंटर स्तर पर उच्चीकृत करने की स्वीकृति मिली है। वहीं रुद्रप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किरोड़ा को भी इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किया जाएगा।
ग्रामीण विद्यार्थियों को सबसे बड़ा लाभ
पहाड़ी क्षेत्रों में हाईस्कूल के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को अक्सर दूर-दराज के विद्यालयों या कस्बों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में इन विद्यालयों का उच्चीकरण होने से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को बड़ी राहत मिलेगी। उन्हें अपने क्षेत्र के नजदीक ही कक्षा 11 और 12 की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलेगा।
यह फैसला केवल विद्यालयों के स्तर में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच मजबूत होने और विद्यार्थियों के बीच पढ़ाई छोड़ने की संभावनाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
प्रदेश के 35 विद्यालयों को मिली मंजूरी
शासनादेश के अनुसार उत्तराखंड के विभिन्न जिलों के कुल 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटर स्तर पर उच्चीकृत करने की स्वीकृति दी गई है। इनमें रुद्रप्रयाग के तीन विद्यालय शामिल हैं। यानी प्रदेश स्तर पर होने वाले इस बड़े फैसले में रुद्रप्रयाग की हिस्सेदारी तीन विद्यालयों की
शिक्षा विभाग की व्यवस्था के तहत विद्यालयों तक पहुंच बढ़ाना और माध्यमिक स्तर पर विद्यालयों को सुदृढ़ करना शिक्षा की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन की शिक्षा संबंधी जानकारी में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों की पहुंच तथा विद्यालय सुदृढ़ीकरण को प्रमुख उद्देश्यों में रखा गया है। �
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**इस फैसले के बाद बाड़व, कालीमठ और किरोड़ा क्षेत्र के बच्चों के लिए 12वीं तक की शिक्षा का रास्ता स्थानीय स्तर पर और आसान होने की उम्मीद है।













