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Sunday, March 15, 2026


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हर्बल व जड़ी-बूटी सेक्टर में नवाचार, वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर दिया जाए जोर- मुख्यमंत्री।

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित जड़ी-बूटी सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांवों में क्लस्टर बनाकर हर्बल क्षेत्र में व्यवस्थित रूप से कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उपलब्ध हर्बल एवं औषधीय उत्पादों के संवर्धन और प्रोत्साहन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जड़ी-बूटी और एरोमा सेक्टर में अग्रणी दो राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज़ का अध्ययन करने हेतु राज्य से विषय विशेषज्ञों की टीम भेजी जाए, जिससे उत्तराखंड में भी इन नवाचारों को लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि जड़ी-बूटी क्षेत्र में टर्नओवर बढ़ाने के लिए अनुसंधान, नवाचार, उत्पादन, विपणन और ब्रांडिंग पर समन्वित रूप से कार्य हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक हर्बल संपदा का केंद्र है। राज्य में इसकी अपार संभावनाओं को देखते हुए हर्बल इकोनॉमी को विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। किसानों को उनके उत्पाद का अधिकतम लाभ दिलाने, स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा महिलाओं को आर्थिकी से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि हर्बल उत्पादों की वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये पंतनगर विश्वविद्यालय के सहयोग भी लिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में भालू सहित अन्य जंगली जीवों से जनजीवन और फसलों को नुकसान पहुँच रहा है, वहाँ कृषि एवं वन विभागों की संयुक्त टीमें भेजी जाएं। ये टीमें लोगों को सुरक्षा उपायों और फसल संरक्षण के लिए जानकारी प्रदान करें।

बैठक में जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान के निदेशक डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों, दुर्लभ औषधीय प्रजातियों के संरक्षण, उत्पादन, और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी।

बैठक में कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी, उपाध्यक्ष जड़ी-बूटी सलाहकार समिति श्री भुवन विक्रम डबराल, श्री बलवीर घुनियाल, प्रमुख सचिव श्री आर.के. सुधांशु, सचिव श्री एस.एन. पांडेय, श्री वी. षणमुगम, अपर सचिव श्री विजय कुमार जोगदंडे, सुश्री वंदना, सुश्री अनुराधा पाल एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

स्वास्थ्य शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत-10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को दी गई मान्यता, पैरामेडिकल शिक्षा को मिलेगा नया स्वरूप।

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नए विषयों से बढ़ेगा युवाओं का दायरा, मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ, पैरामेडिकल तथा Allied Health शिक्षा में आएगी एकरूपता, पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया होगी सरल और पारदर्शी*

*हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल बनकर उभरे- डॉ. आर. राजेश कुमार*

उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक, पारदर्शी और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों और दूरदर्शी नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम–2021 (National Commission for Allied and Healthcare Professions Act – 2021) के तहत उत्तराखंड राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद के गठन की प्रक्रिया को तेजी देने हेतु सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक की शुरुआत में स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा–संवेदनशील राज्य में आधुनिक, प्रशिक्षित और प्रमाणित allied health workforce का विकास अत्यंत आवश्यक है। परिषद के गठन से न केवल शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि देशभर में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभाएगा।

*परिषद गठन पर विस्तृत चर्चा, चयन समिति के गठन का निर्णय*
बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना, भविष्य की आवश्यकताओं और कार्य प्रणालियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। यह तय किया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए “तलाश–सह–चयन समिति” बनाई जाएगी, जो निर्धारित योग्यताओं और अनुभवों के आधार पर नामों का चयन करेगी। स्वास्थ्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना, तकनीकी सहायता और मानव संसाधन की उपलब्धता तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि परिषद अपने दायित्वों का निर्वहन शीघ्र आरंभ कर सके।

वर्तमान में राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम–2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के माध्यम से संचालित होती है। यहाँ स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम चल रहे हैं। राष्ट्रीय अधिनियम लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत, रोजगारोन्मुख, और कौशल आधारित बनाया जाएगा। नए अधिनियम में कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है। इससे विद्यार्थियों को न सिर्फ व्यापक करियर अवसर प्राप्त होंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग्यता को उच्च पहचान मिलेगी।

*मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवाएँ*
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि अधिनियम के तहत कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे—
पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन आदि। इन विषयों के शामिल होने से राज्य के युवाओं को विस्तृत करियर विकल्प, निजी और सरकारी क्षेत्र में बेहतर प्लेसमेंट, तथा शोध और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं में अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और allied health services के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करेगा और भविष्य में राज्य एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।

*स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन हमारे लिए परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इससे पैरामेडिकल तथा allied health शिक्षा में एकरूपता आएगी, पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया बेहद सरल और पारदर्शी बनेगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताएँ शामिल होंगी, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल राज्य बनकर उभरे।

पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर में शीतकालीन यात्रा का मंत्रोच्चारण के साथ भव्य शुभारम्भ।

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ऊखीमठ।। पंचकेदार गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर में आज बृहस्पतिवार को शीतकालीन यात्रा का विधिवत एवं मंत्रोच्चारण के साथ भव्य शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर जीएमवीएन ऊखीमठ परिसर से लेकर ओंकारेश्वर मंदिर तक महिला मंगल दल, युवा मंगल दल तथा विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा मनोहारी कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं की झलक दिखाई दी और मार्गभर श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। मंदिर प्रांगण में भी भारी संख्या में भक्तजन मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, बद्री–केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण तथा जिलाधिकारी श्री प्रतीक जैन ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर शीतकालीन यात्रा का शुभारम्भ किया।
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि वे भगवान ओंकारेश्वर से क्षेत्र तथा प्रदेश के सभी लोगों की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचकर यात्रा का शुभारम्भ कर चुके हैं। इस वर्ष भी उसी उत्साह और भव्यता के साथ यात्रा का आरम्भ किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अधिक संख्या में श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करने आएँगे।

जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि आज से शीतकालीन यात्रा का विधिवत शुभारम्भ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि यात्रा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित कर दी गई हैं। सड़क, पेयजल, विद्युत, पार्किंग एवं सुरक्षा के सभी प्रबंधों को समय रहते दुरुस्त किया गया है। उन्होंने कहा कि शीतकालीन यात्रा का सीधा लाभ जिले की स्थानीय आर्थिकी पर पड़ता है तथा यात्रा से स्थानीय लोगों की आजीविका भी सुदृढ़ होती है।

श्री ओंकारेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने कहा कि यह मंदिर पंचकेदार की गद्दी स्थली है। यहाँ दर्शन करने से भगवान केदारनाथ के दर्शन का ही पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में ओंकारेश्वर मंदिर पहुँचकर पुण्य अर्जित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने विश्व दिव्यांग दिवस पर हल्द्वानी में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार समारोह, दिव्यांगजनों को किया सम्मानित

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*दिव्यांग जन दिव्यांग नहीं, समाज के दिव्य-अंग हैं-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगजन प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में ₹905.13 लाख की लागत से बनने वाले आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखण्ड,

उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड तथा समाज कल्याण आईटी सेल के बहुउद्देशीय कार्यालय भवन का शिलान्यास तथा प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र, नैनीताल (एलिम्को) का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने सभी दिव्यांगजनों को विश्व दिव्यांग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन असाधारण व्यक्तियों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने चुनौतियों को अवसर और संघर्षों को प्रेरणा में बदलकर समाज को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, लेकिन सपनों में नहीं”, और आज हमारे दिव्यांग भाई-बहन प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यांग नही समाज के दिव्य अंग है।

उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चौनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया तथा बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चौंपियन बनीं शीतल देवी जैसे प्रेरक उदाहरण साझा किए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम द्वारा कोलंबो में टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप-2025 जीतने पर भी गर्व व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकार दोनों दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमामय जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नए भवनों, अस्पतालों व बस अड्डों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं। कई पुराने भवनों में भी सुगम्यता हेतु आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं। साथ ही “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार और दिव्यांगजन हितैषी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन भी सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को ₹1500 मासिक पेंशन, दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को ₹700 मासिक भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली विशेष दिव्यांग पेंशन योजना व बौना पेंशन योजना के तहत ₹1200 मासिक पेंशन के साथ ही सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए क्षैतिज आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किये जाने, दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति तथा कृत्रिम अंगों हेतु ₹7000 अनुदान, दिव्यांग से विवाह करने पर ₹50,000 प्रोत्साहन राशि, दिव्यांग छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से उन्हें सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ प्रदान किया जा रहा है।

इसके साथ ही देहरादून स्थित आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था तथा ऊधमसिंह नगर में मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए पुनर्वास गृह का निर्माण किया गया है। देहरादून में राज्य का पहला “प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र” भी प्रारंभ किया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार दिव्यांग सर्वेक्षण भी प्रारंभ किया गया है, जिससे दिव्यांगजनों की वास्तविक संख्या व आवश्यकताओं का सही आकलन हो सकेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य के “यंग इनोवेटिव माइंड्स” से अपील की कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को विशेष स्थान दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित कर दिव्यांगजनों के जीवन को और सुगम बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे युवाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा 41 प्रतिभाशाली दिव्यांगजनों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका मनोबल भी बढ़ाया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदांगी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने किया बस टर्मिनल, मायावती आश्रम, कोलीढेक झील और एबट माउण्ट का निरीक्षण।

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*पर्यटन समृद्धि और विकास योजनाओं का जायजा : मुख्य सचिव ने दिये दिशानिर्देश*

*मुख्य सचिव ने किया बस टर्मिनल, मायावती आश्रम, कोलीढेक झील और एबट माउण्ट का निरीक्षण*

श्री आनन्द बर्द्धन, मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन ने आज चम्पावत जनपद में विभिन्न स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर विकास, पर्यटन गतिविधियों को गति देने हेतु विस्तृत समीक्षा की।

सबसे पहले मुख्य सचिव ने बस टर्मिनल चम्पावत का निरीक्षण किया। निर्माणदायी संस्था सीएनडीएस के अधिशासी अभियंता श्री गिरीश पंत ने प्रस्तावित बस टर्मिनल की समग्र जानकारी प्रस्तुत की। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि टर्मिनल के भीतर वाहनों की सुव्यवस्थित आंतरिक आवाजाही (इनसाइड सर्कुलेशन) सुनिश्चित की जाए तथा यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए।

इसके बाद मुख्य सचिव ने मायावती आश्रम का भ्रमण किया, जहाँ स्वामी दिव्य कृपानंद जी ने उन्हें आश्रम के विभिन्न स्थलों का अवलोकन कराया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जाएँ।

मुख्य सचिव ने कोलीढेक झील का निरीक्षण कर इसे आध्यात्मिक क्षेत्र (स्पिरिचुअल ज़ोन) तथा योग व वेलनेस हब के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्य विभाग को महाशीर मछली संरक्षण हेतु भी आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

इसके उपरांत उन्होंने एबट माउण्ट का निरीक्षण किया और इसे पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील क्षेत्र बताया। उन्होंने एबट माउण्ट से दिखाई देने वाली हिमालय की भव्य श्रृंखलाओं का अवलोकन किया तथा ऐतिहासिक चर्च व पूरे क्षेत्र की सम्पूर्ण जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान कुमाऊं मंडलायुक्त श्री दीपक रावत, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी श्री कृष्णनाथ गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

गोल्ज्यू कॉरिडोर का भ्रमण : मुख्य सचिव ने विकास कार्यों की प्रगति की ली समीक्षा।

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गोल्ज्यू मंदिर व बालेश्वर मंदिर के सौंद्रीकरण हेतु मुख्य सचिव ने दिए आवश्यक निर्देश*

मुख्य सचिव श्री आनन्द बर्द्धन ने आज चम्पावत स्थित ऐतिहासिक गोल्ज्यू मंदिर एवं प्राचीन बालेश्वर मंदिर में दर्शन कर क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

गोल्ज्यू मंदिर परिसर में उन्होंने प्रस्तावित गोल्ज्यू कॉरिडोर परियोजना का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। अधिशासी अभियंता लोनिवो श्री मोहन पलड़िया ने मुख्य सचिव को परियोजना के सभी घटकों, संरचनाओं और कार्ययोजना की विस्तृत प्रस्तुति दी।

मुख्य सचिव ने कॉरिडोर परिसर का स्वयं भ्रमण कर प्रस्तावित निर्माण, सौंदर्यकरण एवं सुगमता बढ़ाने वाले कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कॉरिडोर के समस्त विकास कार्य निर्धारित समयसीमा में, उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ।

इसके उपरांत मुख्य सचिव श्री बर्द्धन ने बालेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण कर मंदिर एवं नौले के सौंदर्यीकरण की आवश्यकताओं का अवलोकन किया। उन्होंने पुरातत्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर मंदिर के प्राकृतिक व सांस्कृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि गोल्ज्यू मंदिर एवं बालेश्वर मंदिर दोनों ही सांस्कृतिक आस्था और लोक परंपराओं के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन धरोहरों के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और बेहतर सुविधाओं के विकास से चम्पावत जिले में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं और अधिक सशक्त होंगी, जिससे स्थानीय रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।

निरीक्षण के दौरान कुमाऊं मंडलायुक्त श्री दीपक रावत, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. जी.एस. खाती, अपर जिलाधिकारी श्री कृष्णनाथ गोस्वामी, जिला पर्यटन अधिकारी लता बिष्ट, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

देहरादून राजभवन और नैनीताल राजभवन का नाम अब होगा लोक भवन

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देहरादून

देहरादून राजभवन और नैनीताल राजभवन का नाम अब होगा लोक भवन,

राज भवन उत्तराखंड का नाम लोक भवन उत्तराखंड के नाम से जाना जाएगा,

सचिन राज्यपाल रविनाथ रमन ने अधिसूचना की जारी,

ऐसे कितने यूनुस अंसारी जिनके दो दो स्थाई निवास प्रमाण पत्र बने है इनकी गहनता से जांच होनी आवश्यक।

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  • बड़ा खुलासा व बड़ा सवाल:-चमोली जनपद के एक विद्यालयमें नाबालिकों से छेड़छाड़ के आरोपी अतिथि शिक्षक यूनुस अंसारी के पास दो-दो स्थाई प्रमाणपत्र कैसे?

आखिर किसने बनाया युनूस का चमोली में स्थाई प्रमाणपत्र? क्या जांच करेगा प्रशासन?और भी कितने लोग जिनके पास उत्तराखंड और अन्य राज्यों के स्थाई निवास प्रमाणपत्र पत्र?

बता दें कि चमोली में नाबालिकों से छेड़छाड़ के आरोपी अतिथि शिक्षक यूनूस अंसारी का एक और बड़ा खुलासा हुआ है। यूनुस के पास दो-दो स्थाई प्रमाणपत्र हैं। मूल रूप से नजीबाबाद के रहने वाला यूनुस के पास चमोली का भी स्थाई प्रमाणपत्र मौजूद है। जिससे सिस्टम पर अब बड़े सवाल खड़े हो गए हैं कि आखिर मूल निवासियों के हकों को बेचने वाले कौन लोग हैं ?

वन विभाग को मिला नया मुखिया,रंजन कुमार मिश्र होंगे प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ़) उत्तराखंड

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देहरादून-

उत्तराखंड वन विभाग में नए मुखिया के रूप में रंजन कुमार मिश्र की नियुक्ति हो गई है,रंजन कुमार मिश्र प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) के पद पर नियुक्त हुए.इस नियुक्ति के साथ ही वे उत्तराखंड के वन संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे.रंजन कुमार मिश्र 1993 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं।

पेपरलीक मामले में बॉबी पंवार को सीबीआई ने किया तलब,सोमवार को सीबीआई के सामने होंगे पेश।

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देहरादून-

Uksssc पेपरलीक मामले में सीबीआई ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जिसमें मुख्य आरोपी खालिद उसकी बहन और पेपर सॉल्व करने वाली प्रोपेफर सुमन को गिरफ्तार कर लिया है वहीं अब इस मामले में बॉबी पंवार को सोमवार को तलब किया गया है।जिसकी जानकारी स्वयं बॉबी पंवार ने अपने फेसबुक वॉल पर दी है।

दरअसल बॉबी पंवार को प्रोफेसर सुमन ने सॉल्व पेपर वॉट्सएप के माध्यम से भेजकर पेपरलीक मामले की जानकारी दी थी।वहीं बॉबी पंवार पर आरोप है कि उनके द्वारा इस मामले में आयोग अथवा अन्य प्रशासनिक इकाई को तुरंत सूचना देने की बजाय राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से सनसनी बनाकर परीक्षा समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया में वायरल किया गया था। आरोपी खालिद जोकि परीक्षा केंद्र के अंदर ही पकड़ा जा सकता था और अन्य सबूत भी बरामद किए जा सकते थे उनकी जानकारी परीक्षा समाप्त होने की बाद ही सामने आई थी। वहीं मामले में बॉबी पंवार को सीबीआई ने सोमवार को तलब किया है।

बता दें 21 सितंबर को हुई उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान एक परीक्षा केंद्र में प्रश्नपत्र के तीन पन्ने आउट होने के बाद सबसे पहले बॉबी पॉवर के पास आए थे. जिसके बाद बॉबी ने मीडिया के सामने पेपर लीक का खुलासा किया था। 21 सितंबर को यूकेएसएसएससी ने स्नातक स्तरीय परीक्षा कराई थी। परीक्षा के दौरान पेपर का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। बेरोजगार संघ ने आरोप लगाया कि यह पेपर लीक हुआ है। पुलिस ने रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया, जांच की तो पाया कि यह पेपर हरिद्वार के बहादरपुर जट स्थित सेंटर से बाहर आया था। पेपर को वहां मौजूद एक परीक्षार्थी खालिद ने पहले से केंद्र में छिपाए मोबाइल के माध्यम से अपनी बहन साबिया को भेजा, साबिया ने इसे सहायक प्रोफेसर सुमन चौहान को भेजा, सुमन टिहरी गढ़वाल के शहीद श्रीमति हंसा धनई राजकीय महाविद्यालय में पढ़ाती थी। पुलिस ने 22 सितंबर को सुमन चौहान को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद खालिद को गिरफ्तार कर लिया गया। प्राथमिक पड़ताल के बाद खालिद की बहन साबिया को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच में पाया था कि सुमन इस षड्यंत्र में इरादतन शामिल नहीं हुई थी बल्कि उसे यह पता ही नहीं था कि यह पेपर किसी प्रतियोगी परीक्षा से संबंधित है।ऐसे में उसे जांच में सहयोग के नाम पर छोड़ दिया गया था। जिसके बाद सीबीआई जांच की मांग की गई।धरनास्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जांच की संस्तुति की। सरकार की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सीबीआई ने 26 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया। अब सीबीआई ने प्राथमिक जांच में सुमन चौहान को षड्यंत्र में शामिल पाते हुए शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है.आरोपी को शनिवार को स्पेशल जज सीबीआई की अदालत में पेश किया गया. जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।