बागेश्वर के प्राचीन आदि बद्री मां भगवती मंदिर का नक्काशीदार मुख्य भवन आग की चपेट में आया, घटना से श्रद्धालुओं में शोक और मायूसी
नरेश भट्ट
बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के दूरस्थ बदियाकोट गांव में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। यहां स्थित प्राचीन आदि बद्री मां भगवती मंदिर में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि मंदिर के मुख्य भवन को भारी नुकसान पहुंचने की सूचना है। नवरात्र के पावन अवसर पर मां भगवती के मंदिर में आग लगने की घटना से क्षेत्र में शोक की लहर है। स्थानीय श्रद्धालु इस घटना से बेहद व्यथित हैं।
आस्था के केंद्र को पहुंची गहरी चोट
बदियाकोट का मां भगवती मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। पीढ़ियों से यहां के लोग मां भगवती के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते आए हैं। ऐसे में नवरात्र के दौरान मंदिर में आग लगने की घटना ने श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है।
मंदिर का मुख्य ढांचा लकड़ी से निर्मित था और इस पर की गई बारीक एवं आकर्षक नक्काशी इसकी विशिष्ट पहचान रही है। आग से मंदिर को पहुंचे नुकसान की खबर ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की पारंपरिक स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
निशुंभ वध से जुड़ी है धार्मिक मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां आदिशक्ति ने इसी क्षेत्र में निशुंभ दैत्य का वध किया था। इसी मान्यता के चलते इस स्थान को वधकोट के नाम से भी जाना जाता है। मां भगवती के प्रति गहरी आस्था के कारण यह मंदिर दानपुर क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा रही है।
आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं
मंदिर में आग लगने के वास्तविक कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक चर्चाओं में बिजली के शॉर्ट सर्किट अथवा पूजा के दौरान जलाए जाने वाले दीपक से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन भी सामने आना बाकी है।
धरोहर के संरक्षण की उठी चिंता
बदियाकोट मंदिर में लगी आग ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित प्राचीन मंदिरों और पारंपरिक लकड़ी की इमारतों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की उम्मीद है कि संबंधित विभाग मंदिर को हुए नुकसान का आकलन कर उसकी ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
नवरात्र के पावन दिनों में मां भगवती के इस प्राचीन धाम में लगी आग से श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंचा है। अब सभी की निगाहें मंदिर की वास्तविक स्थिति, आग के कारणों की जांच और भविष्य में इसके संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।








