पौड़ी । उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है और वन्यजीवों के हमले इंसानों की जान ले रहे हैं। ताजा मामला पौड़ी जनपद के खिर्सू विकासखंड के कोटी गांव का है, जहां गुलदार के हमले में 62 वर्षीय गिन्नी देवी की मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे मारने के आदेश जारी कर दिए हैं। पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर बड़े स्तर पर अभियान शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और वे सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
वन विभाग ने कार्रवाई तेज करते हुए दो विशेषज्ञ शूटरों को मौके पर बुलाया है। शूटर अरविंद कुमार शनिवार को ही गांव पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण कर रणनीति बना चुके हैं, जबकि दूसरा शूटर रविवार को पहुंचेगा। दोनों की संयुक्त टीम गुलदार को ढूंढने और मार गिराने के अभियान का नेतृत्व करेगी। डीएफओ अभिमन्यु सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए गांव में 8-8 कर्मचारियों की दो विशेष टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।
गुलदार की गतिविधियों की निगरानी के लिए जंगल और आसपास के इलाकों में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। जिन स्थाKनों पर उसकी आवाजाही की पुष्टि हो रही है, वहां शूटरों के लिए मचान तैयार किए जा रहे हैं। विभाग ग्रामीणों के संपर्क में बना हुआ है और उन्हें सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। घटना के बाद कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी कोटी गांव पहुंचे। उन्होंने मृतका के परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की और ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही गुलदार के आतंक से राहत मिलेगी। मंत्री ने वन अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने के निर्देश भी दिए। वहीं विभाग ने लोगों को समूह में रहने, बच्चों को अकेला न छोड़ने और किसी भी संदिग्ध हरकत की तत्काल सूचना देने की अपील की है।
















उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। घायल महिलाओं को प्राथमिक उपचार हेतु रणधार स्वास्थ्य केंद्र में लाया गया। उक्त घटना में एक महिला कीडी देवी पत्नी प्रेम सिंह, उम्र -55 को उपचार हेतु हायर सेन्टर रेफर किया गया जबकि अन्य महिलाओं को प्राथमिक उपचार के बाद डिस्चार्ज किया गया। बताया कि घटना के बाद मौके पर वन क्षेत्राधिकारी उत्तरी जखोली सहित वन विभाग की पूरी टीम को तैनात कर दिया गया हैं। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को सावधानी बरतने हेतु जागरूक किया गया है।

उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव से योग, औषधियों और जड़ी-बूटियों की भूमि रही है। यहां की पर्वतीय वनस्पतियों ने आयुर्वेद को मजबूत आधार प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य राज्य को वेलनेस टूरिज़्म और प्राकृतिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके लिए आयुर्वेदिक कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और योग ग्रामों को सशक्त किया जा रहा है।




