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Friday, March 20, 2026


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भरतीय जनता पार्टी रुद्रप्रयाग के जिला अध्यक्ष बने महावीर पंवार ।

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उत्तराखण्ड भाजपा प्रदेश संगठन का आज विस्तारीकरण किया गया ।जिसमें गढ़वाल मंडल व कुमाऊ मण्डल से लेकर देहरादून नगरीय व शहरी क्षेत्र के जिला अध्यक्षो का चयन किया Anil ।

रुद्रप्रयाग से भाजपा के वरिष्ठ प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य महावीर सिंह पंवार को जिला अध्यक्ष चुना गया है ।

सरकार परिवर्तन पर नही विकास को देखते हुए करे समर्थन, CM धामी ।

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सरकार परिवर्तन पर नही विकास को देखते हुए करे समर्थन, CM धामी ।

हिमांचल—// उत्तराखंड उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री इन दिनों हिमांचल में चुनावी जनसभा व जनसम्पर्क करते हुए नजर आ रहे हैं ।जिस प्रकार उत्तराखण्ड विधान सभा मे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार पुनः रिपीट हुई है । उनकी लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा संगठन ने पड़ोसी राज्य हिमांचल में स्टार प्रचारक जनसभाएं कर रहे है ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आज कुल्लू में महा जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रचार के दौरान स्थानीय व्यापारी उत्तम शर्मा की चाय की दुकान पर चाय के साथ स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देव भूमि उत्तराखंड की देव तुल्य जनता ने गत विधानसभा चुनाव में रिवाज बदलकर पुनः दो तिहाई बहुमत वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार को स्थापित किया है ,उसी प्रकार हिमाचल की देवतुल्य जनता हिमांचल में रिवाज बदलकर पुनः भारतीय जनता पार्टी के भारी बहुमत वाली सरकार के पक्ष में मतदान करेगी।

रुद्रप्रयाग विधान सभा की दो और सड़कों को मिली स्वीकृति ।

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रुद्रप्रयाग ।रुद्रप्रयाग विधान सभा की दो और सड़कों को शासन से स्वीकृति मिली है ।क्षेत्रीय विधायक भरत सिंह चौधरी के अथक प्रयास से विकासखण्ड जखोली व रुद्रपयाग की सड़कों को स्वीकृति मिली है ।
राज्य योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र रुद्रप्रयाग को 2 सड़कों की प्रथम चरण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। जिसमें  विकासखंड जखोली के लस्या पट्टी के अंतर्गत घरगाड़ से मथ्या बजीरा स्यालदूरी रानाखर्क तक 3.00 किमी मोटर मार्ग का नव निर्माण (प्रथम चरण) व दूसरी अगस्तमुनि विकासखंड के बच्छणस्यूँ पट्टी के अंतर्गत खिर्सू खेड़ाखाल कांडई मोटर मार्ग के किमी-30 से स्यूणी से धारकोट हेतु 2.50 किमी लिंक मार्ग मोटर मार्ग  मंजूर हुआ है ।

इन दोनों सड़को के नवनिर्माण प्रथम चरण के लिये शासन द्वारा 8.25 की अनुमोदन धनराशि रखी गई है।इन दोनों सड़को के निर्माण होने से दर्जनों गांवों को यातायात में सुविधा मिलेगी ।लम्बे समय से क्षेत्रीय जनता इन लिंक सड़को के निर्माण की मांग करती आ रही थी । सड़को की स्वीकृति मिलने पर विधायक भरत सिंह चौधरी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट करते हुए क्षेत्रीय जनता को बधाईया दी है । कहा कि क्षेत्र वासियों द्वारा सड़क निर्माण की मांग की जा रही थी। शासन स्तर से प्रथम चरण की स्वीकृति प्रदान करवाई गई। जल्द ही सड़कों का प्रथम चरण में सड़कों सर्वेक्षण, संरेखण सहित वन स्वीकृति के कार्य पूर्ण होने के उपरांत द्वितीय चरण की स्वीकृति प्रदान करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बहुत कम गांव अब विधानसभा क्षेत्र के सड़क मार्ग से जुड़ने बाकी रह गए है। उन उनको जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। जल्द सभी गांव सड़क मार्ग से जुड़ जाएंगे। वही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशो पर 14 नवंबर तक सभी सड़को को गड्डा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए सभी विभागों को निर्देशित किया गया। जिससे की आमजन को आवाजाही सुगम हो सके।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान से उत्तराखंड में दो दिन बारिश-बर्फबारी के आसार ।

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उत्तराखंड में दो दिन बारिश-बर्फबारी के आसार

राज्य के पांच जिलों में रविवार और सोमवार को बारिश-बर्फबारी की संभावना

रविवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग में हल्की बारिश और बर्फबारी के आसार

जबकि सोमवार को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, देहरादून,

टिहरी में हल्की बारिश और बर्फबारी हो सकती है।

मौसम केंद्र के निदेशक डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते उत्तराखंड में बारिश के आसार बने हैं।

अगले कुछ दिनों में तापमान में कमी आ सकती है।

मैदानी इलाकों में कोहरे का असर देखने को मिल सकता है

उत्तराखंड के कई इलाकों में आज भूकंप के झटके किए गाय महसूस ।।

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उत्तराखंड के कई इलाकों में आज भूकंप के झटके किए गये महसूस ।

-देहरादून, टिहरी,उत्तरकाशी समेत कई जिलों में महसूस हुए भूकंप के झटके,

केवल 1 सेकेण्ड के लिए हलके झटके हुए महसूस

उत्तरकाशी में भूकंप के झटके महसूस किये गये, लोग निकले घरों से बाहर…..

समय 8 बजकर 33 मिनट पर
: 4.7 megnitude का आया भूकंप

चिन्यालीसौड़ से 33 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है  सेंटर

रुद्रप्रयाग जनपद की 18वीं पुलिस अधीक्षक के रूप में श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे ने सम्भाला कार्यभार ।।

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  • रुद्रप्रयाग जनपद की 18वीं पुलिस अधीक्षक के रूप में श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे ने सम्भाला कार्यभार ।।

नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे कार्यप्रभार सम्भालते ही बताई अपनी प्राथमिकता ।।

जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस प्रभारियों के साथ नवागत पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग द्वारा की गयी बैठक।
साथ ही
जनपदीय मीडिया से मुखातिब होते हुए बतायी गई अपनी प्राथमिकतायें।

रुद्रप्रयाग ।।रुद्रप्रयाग जनपद की नवनुयक्त पुलिस अधीक्षक अपने पुलिस कार्यालय पहुचते ही सभी थाना प्रभारियों , चौकी प्रभारियों सहित सभी यूनिट ,सेल सहित कर्मचारियों के साथ बैठक कर जनपद को अपराध मुक्त नशा मुक्त,व आने जाने वालों को यातायात को जाम मुक्त करने पर फोकस रहेगा ।जनपद के सभी पुलिस से सम्बंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी कर्तव्य निष्ठा के साथ साथ सहयोग भावना से कार्य करने पर बल दिया ।
जनपद रुद्रप्रयाग की 18 वीं पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे द्वारा पुलिस कार्यालय में आगमन करने के उपरान्त व्यवस्थित सलामी गार्द का मान प्रणाम स्वीकार किया गया। तदोपरान्त पुलिस कार्यालय से सम्बन्धित प्रभारियों से मुखातिब होने के उपरान्त पुलिस कार्यालय सभागार में सभी पुलिस प्रभारियों के साथ परिचयात्मक बैठक की गयी।
स्वयं अपना परिचय देते हुए अवगत कराया गया कि, वे वर्ष 2018 की आई0पी0एस0 अफसर हैं तथा यहां आने से पूर्व जनपद हरिद्वार में सहायक पुलिस अधीक्षक तथा जनपद देहरादून में पुलिस अधीक्षक़, अपराध के दायित्वों का निर्वहन किया गया है। तदोपरान्त सभी पुलिस प्रभारियों का परिचय प्राप्त करने के उपरान्त अपनी अपेक्षायें रखी गयीं-


• अवगत कराया गया कि वे जनपद में नियुक्त हरेक पुलिस कार्मिकों के मनोबल को बढ़ाये जाने एवं उनके कल्याण हेतु नियमित तौर पर कार्य किये जायेंगे। हरेक प्रकार की समस्याओं का यथासम्भव निराकरण किया जायेगा।
• जनपद के पर्यटक स्थलों पर आने वाले पर्यटकों की सुविधा हेतु जनपद में पर्यटन पुलिस प्रशिक्षण प्राप्त किये कार्मिकों को प्रभावी बनाया जायेगा।
• निर्देशित किया गया कि जनपद में कोई भी घटना होने पर तत्काल उन्हें अवगत कराते हुए त्वरित रिस्पान्स किया जाये।
• बाजार एवं कस्बों की यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखी जाये तथा पुलिस की दृश्यता (विजिबिलिटी) एवं सतर्कता (अलर्टनेस) होनी आवश्यक है।
• जनपद में नियुक्त कोई भी कार्मिक नशे की हालत में नहीं मिलना चाहिए, ऐसे हालातों में न केवल सम्बन्धित पुलिस कार्मिक अपितु सम्बन्धित प्रभारी की जिम्मेदारी भी तय की जायेगी।

तदोपरान्त जनपदीय मीडिया बन्धुओं से मुखातिब होते हुए अपनी प्राथमिकताओं के बारे में अवगत कराया कि यहां पर होने वाली श्री केदारनाथ धाम यात्रा के दृष्टिगत पुलिस के स्तर से सरल एवं सुगम बनाये जाने हेतु कार्य किये जायेंगे। समय रहते स्थानीय प्रशासन सहित अन्य विभागों से उचित समन्वय स्थापित किया जायेगा।
• यात्रा के समय होने वाले साइबर फ्रॉड पर प्रभावी अंकुश लगाये जाने हेतु अभी से ही जनजागरुता कार्यक्रम के माध्यम से कार्यवाही सुनिश्चित करायी जायेगी साथ ही जनपदीय सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी जनजागरुता पोस्ट तैयार की जायेंगी।
• अधीनस्थ कार्मिकों को साथ लेकर टीम भावना के साथ कार्य किया जायेगा।
• जनपद में आने वाले पर्यटकों की सुविधा हेतु पर्यटन पुलिस में नियुक्त कार्मिकों का सदुपयोग किया जायेगा।
आने वाले समय में आम जनमानस से जुड़ने हेतु जनपद के प्रत्येक थाने पर थाना दिवस का आयोजन किया जायेगा, जहां पर हर वर्ग के लोगों, सम्भ्रान्त व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का हरसम्भव निराकरण किया जायेगा।
• पीड़ित केन्द्रित पुलिसिंग के अनुरूप कार्य किया जायेगा। साथ ही सामुदायिक पुलिसिंग पर भी जोर दिया जायेगा।
• महिलाओं के साथ होने वाले हरेक प्रकार के अपराध की रोकथाम हेतु कार्ययोजना बनाकर जनजागरुता के माध्यम से अपराधों की रोकथाम एवं कानूनी जानकारियां प्रदान की जायेंगी, साथ ही वर्तमान समय में विवेचनाधीन महिला सम्बन्धी अपराधों की समीक्षा कर विवेचकों को आवश्यक निर्देश दिए जायेंगे।
• जनपद में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति की जानकारी ली जायेगी तदोपरान्त कुछ नये स्थलों का भी चिन्हीकरण कर हाई रिजोल्यूशन कैमरे लगवाये जायेंगे। स्थानीय व्यापार मण्डल से भी सीसीटीवी कैमरों को लगाये जाने के सम्बन्ध में वार्ता की जायेगी।
• किसी भी प्रकार के नशे की रोकथाम हेतु जनपदीय एण्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स एवं एसओजी की जिम्मेदारी तय की जायेगी तथा स्थानीय जनमानस को नशे की प्रवृत्ति से रोके जाने हेतु जनजागरुता कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
• वर्तमान समय की सबसे बड़ी समस्या साइबर अपराध के कुचक्र को तोड़े जाने हेतु आम जनमानस को जागरुक करने के साथ ही साइबर अपराधों पर नकेल कसने में सार्थक प्रयास किये जायेंगे।

इगास के मौके पर मुख्यमंत्री आवास में जीवन्त हुई लोक संस्कृति।

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इगास के मौके पर मुख्यमंत्री आवास में जीवन्त हुई लोक संस्कृति।

मुख्यमंत्री ने भेलो पूजन कर और भेलो खेलकर की कार्यक्रम की शुरूआत,लोकगीत व लोकनृत्य की लोक कलाकरो ने दी शानदार प्रस्तुति। लोक नृत्य में लोक कलाकारों के साथ मुख्यमंत्री भी हुए शामिल।मुख्यमंत्री ने सभी को दी इगास की बधाई, अपनी लोक परम्पराओं एवं लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का किया आह्वान।इगास पर्व के आयोजन की मुख्यमंत्री की पहल को सराहा गया प्रदेश भर में,


इगास पर्व पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर प्रदेश भर में सभी संस्थाओं एवं संगठनों के साथ आम जनता द्वारा इस पर्व में अपनी भागीदारी निभायी। इस दौरान प्रदेश में लोक संस्कृति एवं लोक परम्परा के इस पर्व पर उत्साह का माहौल दिखायी दिया। इगास के मौके पर मुख्यमंत्री आवास में भी लोकगीत लोकनृत्य एवं लोक संस्कृति के साथ लोक परम्पराओं के जीवन्तता की झलक देखने को मिली। मुख्यमंत्री स्वयं भेलो पूजन कर, भेलो खेलने के साथ लोक कलाकारों के साथ लोक नृत्य में भी शामिल हुए।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी को इगास की बधाई दी तथा सभी से अपनी लोक संस्कृति एवं लोक परम्पराओं को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण देश में सांस्कृतिक विरासत और गौरव की पुनर्स्थापना हो रही है। उसी तरह उत्तराखंडवासी अपने लोकपर्व इगास को आज बङे उत्साह से मना रहे हैं।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले से आजादी के अमृत काल में पंच प्रण के संकल्पों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया था। जिनमें से एक संकल्प यह है कि हम अपनी विरासत और संस्कृति पर गर्व करें। इगास पर्व का आयोजन उत्तराखंडी लोक संस्कृति से नयी पीढ़ी के जुड़ाव को और प्रगाढ़ बनाएगा, मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखण्डवासियों से भी अनुरोध किया कि वे भी अपने लोक पर्व को अपने गांव में मनाने का प्रयास करें तथा प्रदेश के विकास में सहभागी बने, सभी के सामुहिक प्रयासों से हम विकल्प रहित संकल्प के साथ उत्तराखण्ड को अग्रणी राज्यों में शामिल करने में सफल होंगे।

उत्तराखण्ड की पौराणिक परम्पराओ को जीवंत रखते हुए ग्रामीणों ने एकादशी के पर्व से शुरू किया पांडव नृत्य ।

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ढोल नगाड़ों के साथ संगम स्थली पर पहुंचें देव निशान
आज एकादशी पर्व पर संगम में स्नान के बाद गतंव्य को हुए रवाना
वर्षो से चली आ रही परम्परा का ग्रामीण कर रहे आज भी निर्वहन

रुद्रप्रयाग। भरदार क्षेत्र के दरमोला गांव में प्रतिवर्ष एकादशी पर्व से पांडव नृत्य की शुरूआत होती है। इसी कड़ी में एकादशी की पूर्व संध्या यानी गुरूवार देर सांय ग्रामीण ढोल नगाड़ों के साथ देव निशान रात्रि जागरण के लिए अलकनंदा-मंदाकिनी संगम स्थली पर पहुंचे तथा एकादशी पर्व पर आज देव निशान एवं ग्रामीण अपने गतंव्य को रवाना हुए। सदियों से चली आ रही इस अनूठी परम्परा को बरकरार रखने में ग्रामीण आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
गढ़वाल मंडल में प्रत्येक वर्ष नवंबर माह से लेकर फरवरी माह तक पाण्डव नृत्य का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक गांवों में पांडव नृत्य के आयोजन की अलग-अलग रीति रिवाज एवं पौराणिक परम्पराएं होती हैं। कहीं दो वर्षों तो कहीं पांच से दस वर्षों बाद पांडव नृत्य का आयोजन होता है, लेकिन भरदार क्षेत्र के ग्राम पंचायत दरमोला एकमात्र ऐसा गांव है। जहां प्रत्येक वर्ष एकादशी पर्व पर देव निशानों के मंदाकिनी व अलकनंदा के तट पर गंगा स्नान के साथ पांडव नृत्य शुरू करने परम्परा है। इस गांव में यह परम्परा सदियों पूर्व से चली आ रही है। एकादशी की पूर्व संध्या पर दरमोला व स्वीली, सेम के ग्रामीण भगवान बद्रीविशाल, लक्ष्मीनारायण, शंकरनाथ, नागराजा, चांमुडा देवी, हीत, भैरवनाथ समेत कई देवताओं के निशानों एवं गाजे बाजों के साथ अलकनंदा मंदाकिनी के संगम तट पर पहुंचते हैं।

यहां पर रात्रि को जागरण एवं देव निशानों की चार पहर की पूजा अर्चना की जाती है। ग्राम पंचायत दरमोला में दो स्थानों पर पांडव नृत्य करने की परम्परा है। एक वर्ष दरमोला तो दूसरे वर्ष तरवाड़ी में पांडव नृत्य का आयोजन होता है। इस वर्ष बृहस्पतिवार को स्नान के लिए देव निशान संगम स्थल पर पहुंचे तथा आज यानी एकादशी पर्व पर तड़के सभी देव निशानों एवं बाणों को गंगा स्नान कराने के उपरान्त उनका श्रृंगार किया गया । इसके बाद पुजारी एवं अन्य ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बाद देव निशानों की विशेष पूजा-अर्चना, हवन एवं आरती की गई। इस दौरान संगम तट पर दूर दराज क्षेत्रों से देव दर्शनों को पहुंचे भक्तों को देवता अपना आशीर्वाद भी दिया। इसके उपरान्त ही देव निशानों को गांव में ले जाकर पांडव नृत्य का आयोजन शुरु किया जाएगा। जिसको लेकर पांडव नृत्य समिति तैयारियां तैयारियों में जुटी हुई है। पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष भोपाल सिंह पंवार ने बताया कि दरमोला के राजस्व ग्राम तरवाडी में एकादशी पर्व से पांडव नृत्य का आयोजन शुरू होगा। गुरूवार को देव निशान स्नान के लिए संगम स्थली पर पहुुंचे। समिति की ओर से धार्मिक आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। एक ओर जहां ग्रामीण अपनी अटूट आस्था के साथ संस्कृति को बचा रहे है, वहीं दूसरी ओर आने वाली पीढ़ी भी इससे रूबरू हो रही है।
यह है मान्यता
रुद्रप्रयाग। मान्यता है कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु ने पांच महीनों की निन्द्रा से जागकर तुलसी से साथ विवाह संपन्न हुआ था। यह दिन देव निशान के गंगा स्नान के लिए शुभ माना गया है। बताया जाता है कि यदि इस दिन देव निशानों को गंगा स्नान के लिए नहीं लाया गया, तो गांव में कुछ न कुछ अनहोनी अवश्य होती है। इसलिए ग्रामीण इस दिन को कभी नहीं भूलते हैं। पांडवकाल का स्कन्द पुराण के केदारखंड में इसका पूरा वर्णन मिलता है।

आज उत्तराखण्ड के गांवों में भेलौ खेलकर मनाएंगे इगास के पर्व को ।

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आज उत्तराखण्ड के गांवों में भेलौ खेलकर मनाएंगे इगास के पर्व को ।

अलग-अलग मान्यताओं का प्रतीक है यह भव्य त्यौहार
घरों में कोठारों में नया अनाज भरने का होता दिन
बीते वर्षों से इगास के प्रति बढ़ा उत्साह

रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के गांवों में घरों के आंगन और खेत-खलियानों में भैलो खेलने के पर्व को ही इगास बग्वाल कहा जाता है। दीपावली के ग्यारह दिन बाद यह पौराणिक पर्व मनाया जाता है। इस दिन का आकर्षण पारंपरिक भैलो होता है। साथ ही लोग अपने घरों को दिए से सजाते हैं। इस दिन को घरों में कोठार (अनाज रखने के ‌लिए लकड़ी का वर्तन) में नया अनाज भी भरा जाता है। रुद्रप्रयाग जनपद के बच्छणस्यूं, रानीगढ़, धनपुर, तल्लानागपुर सहित जखोली ब्लॉक के भरदार क्षेत्र और ऊखीमठ ब्लॉक के केदारघाटी के गांवों में इगास का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन गांवों में पशुपालक अपने घरों में दूध और दही रखने के लिए नए वर्तन भी रखते हैं। साथ ही विशेष रूप से दही को मथकर मक्खन निकाला जाता है। इगास कई प्राचीन परंपराओं से भी जुड़ी है। इस दिन रक्षाबंधन के पर्व पर बहिनों द्वारा अपने भाईयों की कलाई पर बांधी गई रखी को निकालकर गाय की पूंछ पर बांधने की परंपरा भी है। इसे हरिबोधनी एकादशी के रूप में भी मनाया जाता है। इगास के दिन गांवों में पशुपालक अपने पशुओं की पूजा-अर्चना कर तिलक लगाकर उन्हें पींडा (चावल व झंगोरा से बना पौष्टिक आहार) खिलाते हैं। इसके अलावा इगास के दिन गढ़वाल के कई गांवों में बर्त खींचने की परंपरा भी है। बर्त का अर्थ मोटी रस्सी है, जो बबूल, बबेडू या उलेंडू के घास से बनाई जाती है। लोक परंपराओं व किवदंतियों के तहत बर्त खींचने को समुद्र मंथन और बर्त को वासुकी नाग का प्रतीक माना जाता है।

क्या है इगास बग्वाल रुद्रप्रयाग।

उत्तराखंड के गढ़वाल परिक्षेत्र में चार बग्वाल मनाई जाती हैं। पहली बग्वाल कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और दूसरी अमावश्या को मनाई जाती है। यह पर्व दीपावली के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। गढ़वाल में तीसरी बग्वाल, बड़ी बग्वाल से ठीक 11 दिन बाद कार्तिक माह की शुल्क पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, जिसे इगास कहा जाता है। गढ़वाली में एकादशी को इगास कहा जाता है, इसलिए इसे इगास बग्वाल भी कहते हैं। इसके अलावा बड़ी दीपावली के ठीक एक माह बाद मार्गर्शीष माह की अमावश्वा को मनाई जाने वाली बग्वाल को रिख बग्वाल कहते हैं। यह गढ़वाल के जौनपुर, थौलधार, प्रतानगर, रंवाई, चमियाला और जौनसारी में मनाई जाती है।

इगास पर्व को लेकर लोक परंपराएं
रुद्रप्रयाग। मान्यतानुसार भगवान श्रीराम राम के 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटने की सूचना गढ़वाल क्षेत्र के लोगों को 11 दिन बाद मिली थी, इसलिए यहां ग्यारह दिन बाद दिपावली मनाई जाती है। रिख बग्वाल को लेकर भी यही मान्यता है कि वहां के लोगों को श्रीराम के अयोध्या लौटने की सूचना एक माह बाद मिली थी। गढ़वाल में इगास को लेकर एक अन्य मान्यता यह भी है कि दिवाली के समय टिहरी गढ़वाल राजा के वीर योद्घा वीर भड माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में सेना ने दापाघाट, तिब्बत का युद्ध जीतकर विजय प्राप्त की थी और दिवाली के ठीक ग्यारहवें दिन वह अपने घर पहुंचे थे। युद्ध जीतने और सैनिकों के घर पहुंचने की खुशी में उस समय दिवाली मनाई थी।

इगास को लेकर धार्मिक मान्यता
रुद्रप्रयाग। ईगास बग्वाल की एकादशी को देव प्रबोधनी एकादशी भी कहा गया है। इसे ग्यारस का त्यौहार और देवउठनी ग्यारस या देवउठनी एकादशी के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि शंखासुर नाम का एक राक्षस था। उसका तीनो लोकों में आतंक था। देवतागण उसके भय से विष्णु के पास गए और मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना की। विष्णु ने शंखासुर से युद्ध किया। युद्ध लंबे समय तक चला और भगवान विष्णु ने शंखासुर को मार दिया। इस युद्घ में भगवान विष्णु काफी थक गए थे और क्षीर सागर में चार माह के शयन के बाद कार्तिक शुक्ल की एकादशी तिथि को नींद से जागे। इस अवसर पर देवताओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और इसे देवउठनी एकादशी कहा गया।

क्या होता है भैलो

रुद्रप्रयाग। इगास के दिन भैलो खेलने का विशेष रिवाज है। गांवों में चीड़, भीमल, देवदार और हींसर की लकड़ी से भैलो बनाते हैं। इन लकड़ियों के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक साथ रस्सी अथवा जंगली बेलों से बांधा जाता है। फिर इसे जला कर घुमाते हैं। इसे ही भैला खेलना कहा जाता है। परम्परानुसार बग्वाल से कई दिन पहले गांव के लोग लकड़ी की दली, छिला, लेने ढोल-बाजों के साथ जंगल जाते हैं। जंगल से दली, छिल्ला, सुरमाड़ी, मालू अथवा दूसरी बेलें, जो कि भैलो को बांधने के काम आती है, इन सभी चीजों को गांव के पंचायती चौक में एकत्र करते हैं। सुरमाड़ी, मालू की बेलां अथवा बाबला, स्येलू से बनी रस्सियों से दली और छिलो को बांध कर भैला बनाया जाता है। जनसमूह सार्वजनिक स्थान या पास के समतल खेतां में एकत्रित होकर ढोल-दमाऊं के साथ नाचते और भैला खेलते हैं। भैलो खेलते हुए अनेक मुद्राएं बनाई जाती हैं, नृत्य किया जाता है और तरह-तरह के करतब दिखाये जाते हैं। इसे भैलो नृत्य कहा जाता है।

भैलो गीत
सुख करी भैलो, धर्म को द्वारी, भैलोधर्म की खोली, भैलो जै-जस करीसूना का संगाड़ भैलो, रूपा को द्वार दे भैलोखरक दे गौड़ी-भैंस्यों को, भैलो, खोड़ दे बाखर्यों को, भैलोहर्रों-तर्यों करी, भैलो।
इस अवसर पर कई प्रकार की लोककलाओं की प्रस्तुतियां भी होती हैं। क्षेत्रों और गांवों के अनुसार इसमें विविधता होती है। सामान्य रूप से लोकनृत्य, मंडाण, चांचड़ी-थड़्या लगाते, गीत गाते, दीप जलाते और आतिशबाजी करते हैं। कई क्षे़त्रों में उत्सव स्थल पर कद्दू, काखड़ी मुंगरी को एकत्र करने की परम्परा भी है। फिर एक व्यक्ति पर भीम अवतरित होता है। वो इसे ग्रहण करता है। कुछ क्षेत्रों में बग्ड्वाल-पाण्डव नृत्य की लघु प्रस्तुतियां भी आयोजित होती हैं।

 

इनका कहना है —डॉ. नंद किशोर हटवाल, लोकसंस्कृति कर्मी और वरिष्ठ साहित्यकार।
आधुनिक विकास की चकाचौंध में मूलभूत सुविधाओं से वंचित गांवों से होते पलायन से पहाड़ की कई परंपराएं हाशिए पर सिमट गईं हैं, जिसमें इगास का पर्व भी शामिल है। लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से इगास के प्रति शासन स्तर पर जागरूकता दिखाई गई है, जो शुभ संकेत है। समय आ गया है कि हमें अपने पारम्परिक त्यौहारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए एकजुट होकर आने आना होगा। अन्यथा हम अपनी इस अनमोल सांस्कृतिक विरासत को खो देंगे। इनको सहेजने की नितांत आवश्यकता है।

तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट सात नवम्बर को शीतकाल के लिये बन्द होंगे ।

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तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाटसात नवम्बर को शीतकाल के लिये बन्द होंगे ।


रुद्रप्रयाग-पंचकेदारों में प्रसिद्ध तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 7 नवम्बर सोमवार को पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे शीतकाल के लिये विधिविधान के साथ बन्द किये जायेंगें।बद्री-केदार मन्दिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद तुंगनाथ भगवान की चल विग्रह डोली इसी दिन प्रथम पड़ाव चोपता पहुंचेगी तथा यहां रात्रि विश्राम करेगी।दूसरे दिन आठ नवम्बर को देव डोली बणतोली होते हुए भनकुण्ड पहुंचेगी जहां दूसरा रात्रि प्रवास होगा।9 नवम्बर को प्रातः देवडोली भनकुण्ड से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मार्ककण्डेय मन्दिर मक्कूमठ पहुंच जायेगी।

पूजा अर्चना के पश्चात डोली मन्दिर के गर्भगृह में विराजमान हो जायेगी।इस अवसर पर प्रबन्धक बलबीर नेगी,मठापति राम प्रसाद मैठाणी,चंद्रमोहन बजवाल,पुजारी अतुल मैठाणी,रविन्द्र मैठाणी,अजय मैठाणी डोली यात्रा के साथ मौजूद रहेंगे।
रुद्रप्रयाग-पंचकेदारों में प्रसिद्ध तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट 7 नवम्बर सोमवार को पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे शीतकाल के लिये विधिविधान के साथ बन्द किये जायेंगें।बद्री-केदार मन्दिर समिति के मीडिया प्रभारी डॉ हरीश गौड़ ने बताया कि

तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद तुंगनाथ भगवान की चल विग्रह डोली इसी दिन प्रथम पड़ाव चोपता पहुंचेगी तथा यहां रात्रि विश्राम करेगी।दूसरे दिन आठ नवम्बर को देव डोली बणतोली होते हुए भनकुण्ड पहुंचेगी जहां दूसरा रात्रि प्रवास होगा।9 नवम्बर को प्रातः देवडोली भनकुण्ड से अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मार्ककण्डेय मन्दिर मक्कूमठ पहुंच जायेगी।पूजा अर्चना के पश्चात डोली मन्दिर के गर्भगृह में विराजमान हो जायेगी।इस अवसर पर प्रबन्धक बलबीर नेगी,मठापति राम प्रसाद मैठाणी,चंद्रमोहन बजवाल,पुजारी अतुल मैठाणी,रविन्द्र मैठाणी,अजय मैठाणी डोली यात्रा के साथ मौजूद रहेंगे।