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Tuesday, September 29, 2026
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केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल का 10वाँ दीक्षांत समारोह धूम-धाम से मनाया गया।

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दीक्षांत समारोह में 150 शोध छात्र छात्राओं को पीएचडी डिग्री से नवाजा गया ।

59 गोल्ड मेडलिस्ट में से 47 लड़कियों ने मारी बाजी ।

4531 छात्र छत्राओं को स्नाकोत्तर डिग्रियां की गई प्रदान।

श्रीनगर गढवाल ।।केन्द्रीय विश्वविद्यालय का 10वाँ दीक्षांत समारोह धूम-धाम से मनाया गया। इस अवसर पर पहले इंडिया फाउंडेशन के चेयरमेन व नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत समारोह में मौजूद रहे। दीक्षांत समारोह में खास बात ये रही कि एक बार फिर यूनिवर्सिटी टॉपर मे लड़कियों ने बाजी मारी है। –

व उतराखंड के एक मात्र केन्द्रीय विश्वाविद्यालय भ्छठ गढवाल विश्वाविद्यालय का 10 वा दीक्षांत समारोह आज सम्पन्न हो गया है। दीक्षांत समारोह का उद्घाटन पहले इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष व नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ राजीव कुमार ने किया। स्वामी मन्थन प्रेक्षागृह चौरास मे आयोजित हुए कार्यक्रम की शुरूआत नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष, गढवाल विश्वविद्यालय की कुलपति एवं कुलाधिपति द्वारा संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्वलित कर किया गया।

जिसके बाद गढवाल विवि के प्रोफेसरों, संकाय अध्यक्षों द्वारा कुलसचिव के नेतृत्व में शोभा यात्रा भी निकाली।

दीक्षांत समारोह में केन्द्रीय गढवाल विश्वविध्यालय के तीनों कैम्पस व अन्य एफिलेटेड कॉलेजों के 150 शोध छात्र-छात्राओं को पीएचडी डिग्री प्रदान की गई वहीं 59 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मैडल दिए गये। खास बात यह है कि कुल 59 गोल्ड मैडलिस्टों में 47 लड़कियां थी। इसके अलावा 4531 स्नातकोत्तर की डिग्रीयां भी वितरित की गई। छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कुलपति ने इस मौके पर गढवाल विश्वाविद्यालय की उपलब्धियों को गिनाया, तो कुलाधिपति गढवाल विश्वविध्यालय ने कहा कि भौगोलिक व सामरिक पृष्टभूमि से महत्वपूर्ण माने जाने वाला गढवाल विश्वाविद्यालय देश के लिए एक थिंक टैंक के रूप मे उभर कर सामने आयेगा।

रुद्रप्रयाग जिले में तैनात जिलाधिकारी नहीं उठाते जनप्रतिनिधियों ,सामाजिक कार्यकर्ताओं व मीडियाकर्मियों का फोन ।

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भले ही उत्तराखण्ड में धामी सरकार ने अधिकारियों को गांव में रात्रि विश्राम व चौपाल लगाने के निर्देश दिये हो लेकिन जिले में बैठे सरकार के नुमाइंदे किसी का फोन उठाना अपनी शान के खिलाफ समझते हैं ।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सूरज नेगी ने राज्य के मुख्य सचिव पत्र लिखते हुए कहा कि उत्तराखंड की जनता ने लंबे संघर्षों की बदौलत व कई राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की शहादतो के बाद उत्तराखंड राज्य के निर्माण की लड़ाई जीती थी जिसमें राज्य की जनता ने बढ़ चढ़कर भाग लिया और यह सपना देखा कि अपना राज्य होगा समस्याओं की सुनवाई होगी मगर जब राज्य की निकम्मी अफसरशाही खाली समय काटने के लिए जनपदों की मुख्य जिम्मेदारियों पर कार्यरत होगी तो ऐसे में सकारात्मक परिणाम आने संभव नहीं है ऐसा ही वाकया जनपद रुद्रप्रयाग में हो रहा है श्री नेगी ने कहा कि वह राज्य में तैनात उन अफसरों का मनोबल नहीं गिराना चाहते जो शिद्दत के साथ अपने कार्यों में लगे हुए हैं लेकिन कई अफसर राज्य में सिर्फ कार्यों के नाम पर रस्म अदायगी कर रहे हैं ऐसा ही शासन द्वारा नियुक्त रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी कई लोगों के फोन उठाने को तैयार नहीं है श्री नेगी ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव द्वारा स्वयं कई बार मीडिया के सामने आकर कहा गया कि जिला स्तरीय अधिकारी जनसमस्याओं एवं उनके निस्तारण के लिए जनप्रतिनिधियों सामाजिक कार्यकर्ताओं जनता एवं मीडिया से जुड़े लोगों का फोन उठाएं और समस्याओं का निस्तारण करें।

मगर उसके ठीक उलट जिलाधिकारी द्वारा चार धाम यात्रा में अव्यवस्थाओं की शिकायत करने वाली जनता का फोन तक नहींउठाया गया और ना ही स्थानीय जनता व जनप्रतिनिधियों का फोन उठाया गया उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी के कंधों पर जनपद की व्यवस्थाओं को सुचारू रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई हो जब वही अधिकारी किसी के फोन को उठाने को राजी ना हो तो उनके नीचे कार्य करने वाले अधिकारियों की सच्चाई को आप समझ सकते हैं यही नहीं चार धाम यात्रा के समय केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ावों पर जमकर शराब की तस्करी हुई हेली कंपनियों ने भी खुलेआम मनमानी की यहां तक कि जिला पंचायत की पार्किंग में कई गैर कानूनी काम हुए पर जिला प्रशासन चुपचाप आंखें मूंदकर चैन की नींद सोया रहा बिना निविदा की ही केदारनाथ जाने वाले घोड़े कचरू की काठी पर वाटरप्रूफ गद्दी लगाने के नाम पर जिला प्रशासन की देखरेख में एक बड़े घपले को अंजाम दिया गया जिसकी जांच का भी अभी तक पता नहीं है कि जांच किस स्तर पर है यात्रा में लगी हैली कंपनीयों ने जमकर ओवरलोडिंग की और पट बंद होने के कुछ दिन पूर्व ही 7 लोग दुर्घटना के शिकार हो गए वही जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास में हीला हवाली की शिकायतों को जब ग्रामीणों द्वारा जिलाधिकारी से की जाती है तो उस पर भी कार्यवाही होती नहीं दिखती हैउल्टा शिकायत करने वाले ग्रामीणों पर ही मुकदमे दर्ज कर लिए जाते है उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर जनपद में होने वाले निर्माण कार्यों में बहुत ही घटिया निर्माण कार्य किए जा रहे हैं जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग सहित कई बाजारों में घटिया नालियों का निर्माण किया गया है जो कई स्थानों पर आधा अधूरा पड़ा है यही नहीं कुछ समय पूर्व एक कंपनी द्वारा निर्माण कार्य की सेटिंग गिरने से कुछ मजदूरों की मौत का मामला भी सामने आया मगर जिला प्रशासन ने कंपनी के मालिक के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की और लापरवाह इंजीनियरों का तबादला कर मामले का इतिश्री कर दिया गया वही रुद्रप्रयाग गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना हुआ है ग्रामीण मोटर मार्गो की स्थिति भी दयनीय है यही नहीं जनपद में शराब माफिया खनन माफिया बेरोकटोक अपनी गतिविधियों का अंजाम दे रहे हैं तथा सरकार को भी भारी राजस्व की क्षति पहुंचा रहे हैं मगर प्रशासन की कार्रवाई धरातल पर दिखी नहीं है क्योंकि प्रशासन के संरक्षण से ही इन कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है आम जनमानस की कहीं भी समय पर कोई सुनवाई नहीं है और फरियादी थक हार कर जनप्रतिनिधियों को कोस कर चुप बैठने को विवश हो गया है साथ ही दुर्भाग्य है कि प्रदेश के अधिकतर जन प्रतिनिधि या राजनीतिक दलों से जो लोग आगे आ रहे हैं उनकी पृष्ठभूमि या तो शराब व्यवसाय की है या फिर वह सरकारी विभागों में ठेकेदारी में लिप्त हैं या फिर खनन व्यवसाय से जुड़े हैं इसलिए प्रशासन भी ऐसे व्यक्तियों की निजी कमजोरी पकड़कर जनता की शिकायतों की अनदेखी करता है उन्होंने कहा कि प्रशासन को यह भी ध्यान में रखना चाहिए हर जनप्रतिनिधि सामाजिक कार्यकर्ता या राष्ट्रीय दलों से जुड़े नेता शराब व्यवसाय व्यवसाय या ठेकेदारी प्रथा या खनन व्यवसाय की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं इसलिए प्रशासन को अपना नजरिया बदलना होगा और स्वच्छ छवि वाले लोगों को जो ईमानदारी से जन समस्याओं को उठाते हैं उनको प्राथमिकता से सुनना ही होगा श्री नेगी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के 22 वर्ष बाद इस प्रकार की अफसरशाही को जनपद में बिठाया गया है जो बड़े खेद का विषय है पूर्व में नियुक्त जिलाधिकारीयों द्वारा पक्ष विपक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं विभिन्न संगठनों से जुड़े आंदोलनकारी व समस्त मीडिया से जुड़े लोगों के साथ समन्वय बनाकर समस्याओं का निस्तारण किया जाता रहा है मगर यह पहले आईएएस अफसर है जो शायद सबके साथ समन्वय न बनाकर चलते हुई सिर्फ सत्ताधारी दल व उनके चुनिंदा लोगों को ही सर्वे सर्वा समझकर जनपद में अपनी मर्जी से कार्य कर रहे हैं तभी तो जिलाधिकारी सहूलियत के हिसाब से फोन रिसीव करते हैं उन्होंने कहा कि अगर इसी मानसिकता के आला अफसरों ने सिर्फ समय बिताने के लिए रस्म अदायगी करनी है तो यह उत्तराखंड राज्य के लिए बेहद दुखद क्षण होगा आखिर अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली मेक कब सुधार लाएंगे उन्होंने मुख्य सचिव से उम्मीद जाहिर की है वह उनके द्वारा दिए गए पत्र में राज्य की मूल भावनाओं को साथ जोड़ते हुए नौकरसाहों को जनता के प्रति मूल जिम्मेदारियों का एहसास कराएंगे।

2.90 ग्राम स्मैक के साथ युवक को किया गया गिरफ्तार ।

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2.90ग्राम स्मैक के साथ युवक को किया गया गिरफ्तार ।

जनपड चमोली के ओली में सैन्य अभ्यास से भड़का चीन, भारत और चीन के बीच 1993 ओर 1996 में हुए समझौतों का उलंघन,

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जनपड चमोली के ओली में सैन्य अभ्यास से भड़का चीन,

भारत और चीन के बीच 1993 ओर 1996 में हुए समझौतों का उलंघन,

ओली में चल रहा है भारत और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभ्यास,

2020 में चीन ने किया था इन समझौतों का उलंघन,

गलवां घाटी की घटना के बाद से दोनों देशों के बीच बना है तनाव,

70 वर्षीय बुजुर्ग की बहादुरी देखिये भालू के हमले के बाद भी खुद को बचाया।

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बागेश्वर ।।बागेश्वर के धरमघर स्थित चुचेर के जंगलों में 70 वर्षीय बुजुर्ग पर दो भालू ने हमला कर दिया … जिसमें बुजुर्ग ने बहादुरी से लड़ते हुए अपने आप को भालु के हमलों से बचा लिया …इस दौरान 70 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना सुबह 7:00 बजे की बताई जा रही है जिसमें 70 वर्षीय बुजुर्ग चीड़ के छिलके लेने के लिए जंगल में गए थे ….. इसी बीच भालू ने उन पर हमला कर दिया… भालू ने उनका सिर बुरी तरीके से नोच डाला … जान जोखिम में होने के बाद भी 70 वर्षीय भगत सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और धारदार हथियार से भालू पर कई वार किए ।

शिक्षा विभाग से बड़ी खबर 10 से कम छात्र संख्या वाले स्कूल होंगे बन्द ।

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प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में पांच और मैदानी क्षेत्रों में 10 या इससे कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने का हुआ फैसला

स्कूलों के बच्चों को नजदीक के उत्कृष्ट स्कूलों में किया जाएगा एडजेस्ट।

राज्य में है 10 या इससे कम छात्र संख्या वाले करीब तीन हजार स्कूल

शिक्षा महानिदेशक की ओर से शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा को दिए आदेश

उत्कृष्ट स्कूलों में कम से कम चार शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे।

छात्र संख्या बढ़ने पर हर कक्षा में एक शिक्षक की तैनाती की जाएगी।

उत्कृष्ट स्कूलों के बच्चों को लाने एवं घर ले जाने के लिए एस्कोर्ट या ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में 5 और मैदानी क्षेत्रों में 10 या इससे कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद कर इन स्कूलों के बच्चों को नजदीक के उत्कृष्ट स्कूलों में भेजा जाएगा। राज्य में 10 या इससे कम छात्र संख्या वाले करीब 3000 स्कूल हैं।

शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी की ओर से शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा को दिए आदेश में कहा गया है कि उत्कृष्ट स्कूलों में कम से कम चार शिक्षक उपलब्ध कराए जाएंगे। छात्र संख्या बढ़ने पर हर कक्षा में एक शिक्षक की तैनाती की जाएगी। उत्कृष्ट स्कूलों के बच्चों को लाने एवं घर ले जाने के लिए एस्कोर्ट या ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जिन स्कूलों से छात्र – छात्राओं को समायोजित किया जा रहा है उन स्कूलों में काम करने वाली भोजन माताओं को हटाया नहीं जाएगा। जिन स्कूलों में छात्रों को भेजा जा रहा है, उन्हें उसी स्कूल में समायोजित किया जाएगा।

शिक्षा महानिदेशक ने कहा कि इस तरह के स्कूलों को चिन्हित करने की कार्रवाई शिक्षा सत्र 2023-24 से पहले कर ली जाएगी। चिन्हित विद्यालयों की सूची, छात्र संख्या व शिक्षकों का विवरण 15 जनवरी 2023 तक उपलब्ध करा दिया जाए।

आखिर गुलदार कब तक ग्रामीणों को अपना निवाला बनाता जाएगा,वन विभाग कब तक कुम्भकर्णीय नींद में रहेगा।

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उत्तराखण्ड में हर दिन गुलदार की घटनाएं सामने आती रही है ।कभी मवेशियों को तो कभी इंसान को अपना निवाला बनाते जा रहे ।ग्रामीण गुलदारों को पकड़ने की बात तो करते है लेकिन वन विभाग पकड़ने के बाद दूसरे क्षत्रो में छोड़ कर गुलदार पुनः तांडव करना शुरू कर देते हैं ।जिससे ग्रामीण क्षेत्रो में हमेशा भय का माहौल बना रहता है ।एक हप्ते से लगातार उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलो से गुलदार द्वरा बच्चे बुजुर्ग को अपना निवाला बनाता जा रहा है लेकिन वन विभाग द्वारा कोई नियंत्रण  ही किया जा रहा है अल्मोड़ा में पिछले 48 घण्टो में लगातार दो लोगो की जीवन लीला का गुलदार समाप्त कर चुका है ।पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-गुलदार टकराव ने चिंता बढ़ा दी है। अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में मां-बेटे समेत तीन से आमना सामना होने के बाद इसी ब्लाक के दैना गांव में गुलदार ने बुजुर्ग ग्रामीण को मार डाला। घटना के करीब 18 घंटे बाद बुजुर्ग का क्षतविक्षत शव बरामद किया गया है। शरीर का आधा हिस्सा गुलदार खा चुका था।इधर, नाराज ग्रामीणों ने शव नहीं उठाने दिया। डीएफओ महातिम सिंह यादव के हिंसक वन्यजीव को मानवजाति के लिए खतरा मान वन्यजीव प्रतिपालक को अवगत कराने व पिंजड़ा लगाने पर ही गांव वाले माने।

मामला मंगलवार शाम को तहसील क्षेत्र में कालीगाढ़ पट्टी की कुंवाली घाटी स्थित दैना गांव का है। यहां के 65 वर्षीय मोहन राम पुत्र स्व. प्रेमराम घर से करीब सौ मीटर दूर निचले भूभाग पर गाय को घर लाने के लिए निकले। तभी झाड़ियों में पहले से घात लगाए गुलदार ने बुजुर्ग पर हमला बोल दिया। मोहन राम को मार डालने के बाद वह उसे गधेरे की ओर घसीट ले गया।

उत्तराखण्ड में दो ऐतिहासिक विधेयक विधानसभा में पास।

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उत्तराखण्ड में दो ऐतिहासिक विधेयक विधानसभा में पास।

महिलाओं को सरकारी नौकरियों के क्षैतिज आरक्षण का बना कानून।

प्रदेश में धर्मान्तरण पर रोक सम्बंधित कानून बना।

उत्तराखंड में विधानसभा अनुपूरक बजट सत्र के दूसरे दिन दो महत्वपूर्ण विधेयक विधानसभा में ध्वनिमत से पास हो गए हैं। उत्तराखण्ड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक 2022 के पास होने के बाद प्रदेश में धर्मान्तरण को लेकर कठोर कानून की प्रविधान हो गया है। इसके अलावा उत्तराखण्ड लोकसेवा (महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण) विधेयक 2022 से प्रदेश में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था एकबार फिर से लागू हो जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। कुछ दिन पूर्व राज्य सरकार ने इन दोनों विधेयकों को कैबिनेट से मंजूरी दी थी। बुधवार को विधानसभा में इन विधेयकों के पास होने से प्रदेश में इसे लागू करने की जल्द अधिसूचना जारी हो जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभमि है यहां पर धर्मान्तरण जैसी चीजें हमारे लिए बहुत घातक है इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया था कि प्रदेश में धर्मान्तरण पर रोक के लिए कठोर से कठोर कानून बने। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि इस कानून को जल्द से जल्द प्रदेश में लागू किया जाए। वहीं उत्तराखण्ड में महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण विधेयक को लेकर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड निर्माण में मातृशक्ति का बहुत बड़ा योगदान है और सरकार ने यह पहले ही तय किया था कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश में मातृशक्ति का सम्मान करते हुए उन्हें इस क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिले।

क्या है धर्मान्तरण पर रोक संबंधी कानून

भारत के संविधान के तहत, धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत, प्रत्येक के महत्व को समान रूप से मजबूत करने के लिए धर्म, उत्तराखंड धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2018 में संशोधन आवश्यक है. इस अधिनियम के लागू होने के बाद दोषी पाए जाने पर न्यूनतम तीन साल से लेकर अधिकतम 10 साल तक के कारावास का प्रावधान किया गया है। इतना ही नही अपराध करने वाले को कम से कम पांच लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है, जो पीड़ित को दिया जाएगा. विधेयक के अनुसार, कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बल, प्रलोभन या कपटपूर्ण साधन द्ववारा एक धर्म से दूसरे में परिवर्तित करने का प्रयास नहीं करेगा। कोई व्यक्ति ऐसे धर्म परिवर्तन के लिए उत्प्रेरित या षडयंत्र नहीं करेगा।

क्या है महिला आरक्षण बिल

उत्तराखण्ड लोकसेवा (महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण) विधेयक 2022 के तहत राज्य में महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 20 से 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। यह प्रावधान उन महिलाओं के लिए किया जा रहा है। राज्य गठन के दौरान तत्कालीन सरकार ने 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण शुरू किया था। जुलाई 2006 में इसे 30 फीसदी कर दिया था। इसी साल हरियाणा की पवित्रा चौहान व अन्य प्रदेशों की महिलाओं को जब क्षैतिज आरक्षण का लाभ नहीं मिला तो उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगा दी थी, इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। बीते 4 नबंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाकर आरक्षण को बरकरार रखा। अब सरकार ने इस विधेयक को सदन में पास करवाकर इसे कानूनी रुप दे दिया है जो कि मौजूदा सरकार की बड़ी उपलब्धि के रुप में देखा जा रहा है।

केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओ का लाभ अंतिम छोर में निवास वाले व्यक्ति तक पहुंचे।।

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रुद्रप्रयाग ।। जनपद के अंतिम छोर में निवासरत व्यक्तियों को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा तहसील स्तर से जारी होने वाले प्रमाण-पत्रों एवं आम जनता की समस्याओं एवं शिकायतों का त्वरित निस्तारण हेतु जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने आज कलैक्ट्रेट सभागार में उप जिलाधिकारियों, तहसीलदारों, कानूनगो एवं राजस्व उपनिरीक्षकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया तथा तहसील स्तर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्राप्त की।
जनपद में संचालित योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति को उपलब्ध हो इसके लिए जिलाधिकारी गंभीरता से कार्य करते हुए निरंतर ब्लाॅक एवं तहसील स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ योजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं प्राप्त शिकायतों के त्वरित निस्तारण हेतु संबंधित अधिकारियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित कर अधिकारियों से योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है।
संवाद कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने सभी राजस्व उपनिरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि उनके स्तर से जो भी कार्य किए जा रहे हैं उन कार्यों का निर्वहन गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ करें। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रवासियों एवं जन प्रतिनिधियों द्वारा अकसर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं कि क्षेत्र में तैनात राजस्व उपनिरीक्षकों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है जिस पर उन्होंने सभी राजस्व उपनिरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए अपनी कार्यशैली में बदलाव लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी को सचेत करते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी भी अधिकारी एवं कर्मचारी की शिकायत प्राप्त होती है तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की होगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि उनके स्तर से जारी होने वाले आय प्रमाण-पत्रों को गंभीरता से देखें एवं जांच के उपरांत ही संबंधित व्यक्ति की वास्तविक आय अंकित कर आय प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी दशा में गलत आय प्रमाण-पत्र निर्गत न किया जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जनपद में आपदा के कारण जिन विभागों की जो भी योजनाएं क्षतिग्रस्त होती हैं उन योजनाओं का धरातल पर वास्तविक आंकलन किया जाए तथा नियमानुसार आंकलन प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि कार्य के शुरू होने एवं पूर्ण होने एवं उसकी गुणवत्ता के संबंध में स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराई जाए किसी भी दशा में कोई गलत सूचना एवं रिपोर्ट उपलब्ध न कराई जाए। गलत जानकारी उपलब्ध कराए जाने की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वन भूमि व राजस्व भूमि पर किसी व्यक्ति द्वारा अतिक्रमण किया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही करते हुए ऐसे व्यक्तियों को नोटिस निर्गत करते हुए उनके विरुद्ध वाद भी दायर करने के निर्देश दिए।
उन्होंने यह भी कहा कि तहसील स्तर पर जो पटवारी चैकियां क्षतिग्रस्त हैं तथा जिनका मरम्मत कार्य किया जाना है उनका तत्काल मरम्मत कार्य हेतु आंकलन प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए ताकि उसके लिए धनराशि निर्गत कराई जा सके। उन्होंने सभी राजस्व उपनिरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर खतौनी को संबंधित ग्रामीणों के समक्ष पढ़ा जाए तथा विरासतन दर्ज कराई जाए।

उत्तराखण्ड सरकार का 5440.43 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश ।

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उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है। सत्र पांच दिसंबर तक चलेगा। पहले दिन प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण को लेकर उत्तराखंड लोक सेवा (महिलाओं के क्षैतिज आरक्षण) विधेयक 2022 समेत 11 विधेयक सदन में पेश किए गए। विधेयक बुधवार को पास होंगे। वहीं, 5440.43 करोड़ का अनुपूरक बजट भी सीएम धामी और वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने पेश किया।

मंगलवार को सदन में प्रथम अनुपूरक बजट 2022-23 पेश करते हुए वित्त व संसदीय कार्य मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने बताया कि 2022-23 का मूल बजट 65 हजार 571 करोड़ का था। मुख्यतः मूल बजट के उपरान्त कुछ केन्द्रपोषित योजनाओं में केन्द्र सरकार से धनावंटन होने अथवा धनावंटन की प्रत्याशा के कारण तद्विषयक धनराशि का समावेश करने हेतु वचनबद्ध मदों में वर्ष के शेष माहों में धनराशि कम पड़ने की सम्भावना के दृष्टिगत राज्य अकस्मिकता निधि से स्वीकृत अग्रिमों की प्रतिपूर्ति करने तथा कुछ नई योजनाओं के कारण अनुपूरक बजट की आवश्यकता हुई है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि 5440.43 करोड़ रुपए के इस अनुपूरक बजट में लगभग रू0 3226.46 करोड़ मतदेय तथा 2213.97 करोड़ भारित से संबंधित प्रावधान है। भारित के अन्तर्गत पूंजीगत मद में वेज एण्ड मीन्स एडवांस तथा ऋणों का भुगतान तथा राजस्व मद में श्री राज्यपाल के कार्यालय, ऋण शोधन निधि तथा न्याय प्रशासन से संबंधित योजना है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि केन्द्र पोषित योजनाओं हेतु लगभग रू0 727 करोड़ के केन्द्रांश तथा लगभग रू0 301 करोड़ राज्यांश सहित कुल लगभग रू0 1028 करोड़ का प्रावधान है। वाह्य सहायतित परियोजनाओं हेतु लगभग रू0 106 करोड तथा नाबार्ड से सम्बन्धित योजनाओं हेतु लगभग रू0 40 करोड का प्रावधान है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि अनुपूरक बजट में लगभग रू0 2276.43 करोड़ राजस्व मद से संबंधित तथा रू0 3164 करोड़ पूँजीगत मद से संबंधित है। राजस्व की प्रमुख मद वेतन पारिश्रमिक पेंशन व अन्य सेवानिवृत्तिक लाभ, उपयोगिता बिल, सामाजिक पेंशन एवं अनुरक्षण आदि है जबकि पूंजीगत के अन्तर्गत प्रमुखतः बृहद निर्माण एवं वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) सम्मिलित है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि अनुपूरक बजट में लगभग 60 प्रतिशत धनराशि संसाधन सम्बद्ध (त्मेवनतबम सपदामक ) है। संसाधन सम्बद्ध योजनाओं में संसाधन सुनिश्चित होते है तथा उपलब्ध संसाधनों से ही व्यय होता है। केन्द्रपोषित योजना तथा वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) को रिसोर्स लिंक्ड कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि शेष लगभग 40 प्रतिशत धनराशि का व्यय मूल बजट में अनुमानित मुख्यतः वेतन आदि के सापेक्ष हो रही बचत से है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि प्रमुख राजस्व मदों में वेतन आदि मद में लगभग रू0 160 करोड़ तथा मजदूरी हेतु लगभग रू0 114 करोड़, सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन की मद में लगभग रू0 230 करोड़ का प्राविधान किया गया। है। सामाजिक सुरक्षा से सम्बन्धित पेंशन हेतु लगभग रू0 58 करोड़ का प्राविधान किया गया है। राज्य आन्दोलनकारी पेंशन मद में लगभग रू0 20 करोड़ का अतिरिक्त प्राविधान किया गया है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि हमारी सरकार ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास एवं अंत्योदय की भावना से प्रेरित होकर सामाजिक कल्याण की योजनाओं हेतु यथाआवश्यकता व विभागीय मांग के अनुरूप प्राविधान किया है। सामाजिक सुरक्षा के अन्तर्गत वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन, तीलू रौतेली पेंशन, निराश्रित विधवा पेंशन, परित्यक्त / निराश्रित महिला किसान पेंशन आदि विभिन्न पेंशन योजनाओं हेतु कुल मिलाकर लगभग रुपये 58 करोड़ की धनराशि का प्राविधान किया जा रहा है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि देश की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने के लिए हमारे सैनिक भाई सदैव तैयार रहते है। उनके आवागमन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सैन्य विश्राम गृहों के अनुरक्षण हेतु भी समुचित प्राविधान किये गये है। इसी प्रकार सैनिक कल्याण से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की पेंशन व पुरस्कार हेतु प्रावधान किये गये है।
वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि जनकल्याण की भावना के साथ महिला एवं बाल विकास हेतु विभिन्न योजनाओं में आवश्यक प्राविधान किया गया है। नंदा गौरा योजना हेतु लगभग रू0 131 करोड़ मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान के तहत रू0 13 करोड मुख्यमंत्री वात्सल्य योजनान्तर्गत रु0 18 करोड़ का प्राविधान किया जा रहा है। चिकित्सा व उपचार हेतु अटल आयुष्मान योजना के अन्तर्गत रु० 151 करोड़ का अतिरिक्त प्राविधान किया जा रहा है

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि युवा कल्याण हेतु न केवल स्टाइफण्ड / छात्रवृति हेतु प्राविधान किया गया है अपितु स्टेडियम निर्माण आदि के लिए आवश्यक प्राविधान किये गये है। लेब ऑन व्हील्स, सांइस सिटी आदि के क्षेत्र में प्रावधान करके भी युवाओं के उज्वल भविष्य के मार्ग को प्रशस्त करने का प्रयास किया गया है। एन०डी०ए० में चयनित छात्रों को पुरस्कार एवं संघ लोक सेवा आयोग एवं उत्तराखण्ड राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षाओं की कोचिंग हेतु मेधावी छात्र / छात्राओं को विशेष आर्थिक सहायता हेतु समुचित प्रावधान किये गये है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि पत्रकार कल्याण कोष की स्थापना के लिये रू0 1.50 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि हम पूँजीगत परिसम्पत्तियों के सृजन के लिए प्रयत्नशील है। इसी क्रम में इस अनुपूरक मांग में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना हेतु लगभग रू0 350 करोड़, लोक निर्माण विभाग में रू० 220 करोड़, शहरी विकास के क्षेत्र में लगभग रुपये 210 करोड़, पेयजल क्षेत्र में लगभग रूपये 130 करोड़, न्याय प्रशासन क्षेत्र में लगभग रूपये 56 करोड़, खेल और युवा कल्याण क्षेत्र में लगभग रूपये 40 करोड़ कृषि के क्षेत्र में लगभग रूपये 17 करोड़, पशुपालन के क्षेत्र में लगभग रू0 20 करोड़, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगभग रूपये 10 करोड़, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगभग रूपये 4 करोड़ को सम्मिलित करते हुए इन विभागों सहित पूंजीगत परिव्यय (केपिटल आउटले) हेतु समग्र रूप से लगभग रूपये 1154 करोड़ का प्राविधान किया गया है। इस में अनुरक्षण की धनराशि सम्मिलित नहीं है।

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि पूंजीगत परिसम्पत्तियों के सृजन से सम्बन्धित अधिकांश योजनाएं केन्द्रपोषित होने के कारण संसाधन सम्बद्ध है अर्थात सम्बन्धित योजनाओं में केन्द्र सरकार से धनराशि प्राप्त हो गयी है या प्राप्त होने की प्रत्याशा है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि महालेखाकार द्वारा दिए गए परामर्श के अनुसार वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) हेतु पहली बार अनुपूरक के माध्यम से अतिरिक्त मांग की जा रही है। रू० दो हजार करोड़ का प्रस्ताव वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) के अंतर्गत है । वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) पूंजीगत मद है। ऐसा करते हुए न केवल महालेखाकार द्वारा दिये गये सुझावों का अनुपालन होगा अपितु राज्य के कैश फ्लो के प्रतिकूल होने की स्थिति में वेज एण्ड मीन्स एडवांस (ॅड।) एडवांस के अन्तर्गत पूर्व की अपेक्षा रू० दो हजार करोड़ अधिक धनराशि नितान्त अस्थाई व्यवस्था के अन्तर्गत रिजर्व बैंक से लिया जा सकेगा। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि कृषि व सहायक गतिविधियों के विकास हेतु राजस्व पूँजीगत दोनों मदों में प्राविधान किया गया है। कृषि विभाग के अर्न्तगत जल पम्प, स्प्रिंकलर सेट, पाली हाउस विधिकरण योजना हेतु लगभग रु० 30 करोड़, जलवायु अनुकूल बरानी कृषि परियोजना हेतु लगभग रू0 12 करोड़ का प्राविधान किया जा रहा है

वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिए एम.एस.एम.ई. पॉलिसी से अपने उद्यमी भाईयों को लाभान्वित करने के लिए रू० 25 करोड़ का प्राविधान किया गया है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि परिवहन के क्षेत्र में सुचारू सेवाओं हेतु उत्तराखण्ड परिवहन निगम को पर्वतीय क्षेत्रों में संचालन हो रहे नुकसान ( हिल लॉस) को संज्ञान लिया गया है तथा लगभग रू0 20 करोड का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि ग्राम्य विकास के अर्न्तगत मनरेगा हेतु लगभग रू0 191 करोड, राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान हेतु लगभग रू0 48 करोड़ का प्राविधान किया जा रहा है। वित्त मंत्री डॉ अग्रवाल ने बताया कि शहरी विकास हेतु मलिन बस्ती विकास / नगरीय अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु लगभग रू0 15 करोड़ स्मार्ट सिटी हेतु लगभग रू0 114 करोड़ तथा वाह्य सहायतित परियोजना नगरीय अवस्थापना का सुदृढीकरण हेतु लगभग रू0 81 करोड़ का प्रविधान किया गया है।