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Saturday, March 14, 2026


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रुद्रप्रयाग में खनन माफिया का खुला खेल! करोड़ों की राजस्व लूट, नदियां हो रही खुर्द बुर्द, अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा काला कारोबार!

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रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड), 11 फरवरी 2026: उत्तराखंड, रुद्रप्रयाग जनपद में खनन माफिया का आतंक चरम पर चल रहा है lअलकनंदा और मंदाकिनी जैसी जीवनदायिनी नदियां अवैध खनन की भेंट चढ़ रही हैं, वहीं सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है। सूत्रों और जांच रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है कि जिले में 8 निजी क्रेशर और 4 ई-टेंडरिंग खनन पट्टे चल रहे हैं, लेकिन इनकी आड़ में निर्धारित क्षेत्र और मात्रा से कहीं ज्यादा खनन हो रहा है। नतीजा? नदियां खुर्द-बुर्द हो रही हैं, सड़कें खतरे में हैं, और पर्यावरण का विनाश हो रहा है!

गंगा के उद्गम स्थल के करीब रुद्रप्रयाग में यह काला कारोबार फल-फूल रहा है। जांच में पता चला है कि खनन पट्टों में निर्धारित घन मीटर से अधिक सामग्री निकाली जा रही है, जिससे नदियों का प्रवाह बाधित हो रहा है और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। क्रेशरों में भंडारण की सीमा से ज्यादा माल रखा जा रहा है, और रॉयल्टी में भारी हेराफेरी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह सब राजस्व विभाग, खनन विभाग, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से संभव हो रहा है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि माफिया दिन-रात मशीनें चलाते हैं, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं। करोड़ों की कमाई में सबका हिस्सा है!

उत्तराखंड में अवैध खनन का यह सिलसिला नया नहीं है। जून 2024 में रुद्रप्रयाग प्रशासन ने अवैध खनन पर बड़ा एक्शन लिया था, जहां एक स्टोन क्रेशर को सीज कर 23 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। लेकिन इसके बावजूद कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी जुलाई 2025 में हरिद्वार में गंगा नदी पर अवैध खनन के लिए 48 स्टोन क्रेशर बंद करने के आदेश दिए थे, जो दर्शाता है कि पूरे राज्य में यह समस्या कितनी गंभीर है। एक स्टिंग ऑपरेशन ने उत्तराखंड में माइनिंग माफिया की धमकियों और अवैध गतिविधियों को उजागर किया है, जहां पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे यह सब चल रहा है।

राजस्व की लूट का आंकड़ा चौंकाने वाला है। उत्तराखंड सरकार ने अवैध खनन की निगरानी और रॉयल्टी वसूली को प्राइवेट कंपनियों को सौंपा है, लेकिन इससे समस्या और बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च 2025 में राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का मुद्दा उठाया था, जिससे सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। सीपीसीबी की रिपोर्ट में गंगा नदी पर अवैध खनन की पुष्टि हुई है,जो पर्यावरणीय आपदा की ओर इशारा करती है। रुद्रप्रयाग में हाल ही में ऊखीमठ में खनन और राजस्व विभाग ने अवैध खनन के खिलाफ कार्यवाही की, लेकिन यह सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है।

सरकार और प्रशासन को इस माफिया राज को तुरंत रोकना चाहिए, वरना देवभूमि का विनाश तय है। जांच की मांग तेज हो रही है – क्या अब कार्रवाई होगी या यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का किया शुभारंभ,मुख्यमंत्री ने डीबीटी के माध्यम से 484 लाभार्थियों को भेजी ₹3 करोड़ 45 लाख 34,500 की धनराशि

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*राज्य की लाखों महिलाओं के संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास को मिलेगी नई दिशा*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने योजना का शुभारंभ करते हुए प्रथम चरण में जनपद बागेश्वर ( 42 लाभार्थी) , देहरादून (191), नैनीताल (75), पौड़ी (66), टिहरी ( 23) एवं उधमसिंहनगर ( 87) के कुल 484 लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में ₹ 3 करोड़ 45 लाख 34,500 की धनराशि डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में भेजी। इसके साथ मुख्यमंत्री ने विभागीय कैलेंडर का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी और उन्हें सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा राज्य की लाखों महिलाओं के संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास को नई दिशा दी जा रही है। महिलाओं के बिना किसी भी राष्ट्र और समाज की उन्नति संभव नहीं है। महिला के सशक्त होने से परिवार के साथ पूरा समाज सशक्त होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत कुल 484 लाभार्थियों को प्रथम किश्त के रूप में ₹ 3 करोड़ 45 लाख 34,500 की धनराशि दी जा रही है। शेष 7 जनपदों की 540 महिलाओं को भी लगभग ₹ 4 करोड़, महीने के अंत तक डीबीटी के माध्यम से भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा इस योजना में हमने विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा या किसी भी कारण से अकेले जीवन का भार उठाने वाली महिलाओं के साथ एसिड अटैक, आपराधिक घटना की पीड़िता, ट्रांसजेंडर्स को भी शामिल किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा इस योजना के शुरू होने से राज्य की नारी शक्ति अब नेतृत्व की भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए निरन्तर कार्य किए जा रहे हैं । महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी, बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी योजना के साथ ही ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करने जैसे कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, राज्य की मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता, नौकरियों में प्रदेश की महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से राज्य की मातृशक्ति को नए अवसर प्रदान किए जा रहें हैं। साथ ही मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के अंतर्गत महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में लगभग 5 लाख महिलाएँ 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह बनाकर अपना व्यवसाय कर रही हैं। 7 हजार से अधिक ग्राम्य संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठनों के माध्यम से राज्य की महिलाएँ सामूहिक नेतृत्व की एक अद्वितीय मिसाल भी पेश कर रही हैं। प्रदेश की 1 लाख 68 हजार से अधिक बहनों ने लखपति दीदी’ बनकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बिक्री के लिए एक सशक्त इकोसिस्टम विकसित करने का काम किया है। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता को लागू करने का ऐतिहासिक कार्य भी किया है।

कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अब महिलाओं को किसी और के ऊपर निर्भर न रखकर खुद आत्मनिर्भर बनेंगी साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ेगी। उन्होंने कहा निश्चित ही यह योजना एकल महिलाओं की तस्वीर बदलने का काम करेंगी।

सचिव चंद्रेश यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना एक सशक्त महिला उद्यमी योजना है। उन्होंने बताया योजना के अंतर्गत अधिकतम धनराशि ₹ 2.00 लाख तक के कार्य / परियोजना स्वीकृत किए जा रहे हैं। लाभार्थी द्वारा स्वयं के श्रोतों / लोन के रूप में ली गयी धनराशि के सापेक्ष 75 प्रतिशत अथवा ₹1.50 लाख (जो भी अधिकतम हो) धनराशि की सब्सिडी प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया योजना के अंतर्गत परियोजना हेतु महिला को विभागीय अनुदान धनराशि 75% देय होगी एवं महिला का स्वयं का अंशदान 25% अनिवार्य रूप से देय होगा।

इस अवसर पर डायरेक्टर श्री बी एल राणा , श्री विक्रम , श्रीमती आरती, श्री मोहित चौधरी एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने की कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा,कुंभ से संबंधित सभी तैयारियां, अक्टूबर माह तक पूरी हो : मुख्यमंत्री

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में कुम्भ मेला-2027, हरिद्वार की तैयारियों के सम्बन्ध में समीक्षा बैठक की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कुंभ से संबंधित सभी तैयारियों को अक्टूबर माह तक पूरा किया जाए। साथ ही कुंभ की आवश्यकताओं को देखते हुए सभी प्रकार के निर्माण कार्य तय समय के अंदर पूरे हों। सभी निर्माण कार्य की गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए। शासन स्तर पर कुंभ से संबंधित कोई भी कार्य/फाइल लंबित न रहे। किसी भी कार्य को लंबित रखने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदही तय की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है की कुंभ मेले का भव्य दिव्य और सफल आयोजन हो।

मुख्यमंत्री ने सचिव, पीडब्ल्यूडी को अगले 24 घंटे के अंदर कुंभ मेले के लिए टेक्निकल पद के अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र में बने सभी पुलों का ऑडिट किया जाए। साथ ही कुंभ क्षेत्र में स्थित सभी घाटो का सौंदर्यकरण और आवश्यकता अनुसार पुनर्निर्माण कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा श्रद्धालुओं के लिए हर की पैड़ी के साथ ही अन्य सभी घाटों में भी स्नान की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मेला क्षेत्र की स्वच्छता के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाए। सभी प्रमुख स्थानों पर शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था हो। पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बलों, जल पुलिस की तैनाती हो। साथ ही सुरक्षा के मद्देनजर ड्रोन, सीसीटीवी , एवं अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग भी हो। उन्होंने कहा मेले के दौरान कानून व्यवस्था, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन की विस्तृत कार्य योजना अलग से बनाई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला क्षेत्र में विभिन्न अखाड़ों को भूमि आवंटन तय समय पर किया जाए। इसकी मेलाधिकारी स्वयं मॉनिटरिंग करें। साथ ही सभी अखाड़ों, मठों ,संत समाज, संस्थाओं, समितियां एवं स्थानीय लोगों से परस्पर्म समन्वय किया जाए। साथ ही उनके सुझावों के अनुरूप मेले की तैयारी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ के दौरान लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए कुंभ क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अतिक्रमण की खिलाफ अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन संबंधित मामलों पर जल्द अनुमति ली जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अन्य प्रदेशों से भी परस्पर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिया। उन्होंने कहा मेले से संबंधित सभी विकास कार्य कागजों के साथ धरातल में भी दिखाई देने चाहिए। मुख्यमंत्री ने आवास व टेंट सिटी की तैयारी समय से पूरी करने एवं मेला क्षेत्र में अस्थायी अस्पताल, एम्बुलेंस व मोबाइल चिकित्सा दल की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कुंभ मेला हमारी संस्कृति, आस्था और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है। इस आयोजन को सफल बनाना हम सभी का कर्तव्य है। जो भी श्रद्धालु राज्य में आए वह अच्छा अनुभव यहां से लेकर जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, विधायक श्री मदन कौशिक, विधायक श्री आदेश चौहान, विधायक श्रीमती रेनू बिष्ट, विधायक श्रीमती अनुपमा रावत, विधायक श्री रवि बहादुर, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष श्री विश्वास डाबर, मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, डीजीपी श्री दीपम सेठ, प्रमुख सचिव एल. फैनई, श्री आरके सुधांशु, सचिव श्री शैलेश बगौली, सचिव श्री नितेश झा, कुंभ मेलाधिकारी सोनिका सिंह एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

भाजपा की नीति–रीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़े लोग, पौड़ी से हुआ बड़ा राजनीतिक जुड़ाव

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देहरादून

*भाजपा की नीति–रीति से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में पार्टी से जुड़े लोग, पौड़ी से हुआ बड़ा राजनीतिक जुड़ाव*

*प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री धामी के कुशल व दूरदर्शी नेतृत्व, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रभावशाली नीतियों से हुए प्रभावित*

*बलवीर रोड स्थित भाजपा मुख्यालय में ली गई भाजपा की सदस्यता*

*पार्टी की सदस्यता के पश्चात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से की मुलाकात*

बीजेपी की नीतियों से प्रेरित होकर विभिन्न वर्गों से जुड़े 25 से अधिक प्रमुख जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनसेवियों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

*मुख्यमंत्री ने सभी का पार्टी में स्वागत करते हुए देश – प्रदेश के विकास में अपना योगदान देने को किया प्रेरित*

भाजपा में शामिल होने वालों में प्रमुख रूप से ये रहे शामिल
1- श्रीमती हिमानी नेगी (नगर पालिका अध्यक्ष, पौड़ी)
2- श्री केशर सिंह नेगी (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, पौड़ी)
3- श्री प्रदीप असवाल (सभासद, नगर पालिका पौड़ी)
4- श्रीमती सुमित्रा देवी (सभासद, नगर पालिका पौड़ी)
5- श्री दिनेश नेगी (सभासद, नगर पालिका पौड़ी)
6- श्री सूरज सिंह (सभासद, नगर पालिका पौड़ी)
7- श्री शुभम (सभासद, नगर पालिका पौड़ी)
8- श्री दीपक कुकसाल (पूर्व प्रमुख, पौड़ी)
9- श्री संजय पटवाल (ज्येष्ठ प्रमुख, पौड़ी)
10- श्री वीरेंद्र तोपाल (पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख, पौड़ी)
11- श्री रघुवीर (क्षेत्र पंचायत, पौड़ी)
12- श्री मकान सिंह (पूर्व सभासद, पौड़ी)
13- श्री भास्कर तोमर (क्षेत्र पंचायत, पौड़ी)
14- श्री अरविंद (क्षेत्र पंचायत, पौड़ी)
15- श्री धीरज (प्रधान, पिसौली)
16- श्री रविंदर कुमार (पूर्व प्रधान, सिंडी)
17- श्री मोहन सिंह (प्रधान, भेंटा)
18- श्री मुकेश (सरपंच, बैंजवाड़ी)
19- श्री अनूप (पूर्व सरपंच, च्यूंचा)
20- श्री भूपेंद्र नवानी (व्यापार सभा, पौड़ी)
21- श्री सतपाल सिंह (सामाजिक कार्यकर्ता)
22- श्री आलोक (ठेकेदार संघ, पौड़ी)
23- श्री सुभाष (ठेकेदार संघ, पौड़ी)
24- श्री अनुराग (समाजसेवी)
25- श्री मनवर सिंह (वन पंचायत अध्यक्ष, कामारगढ़)

ओवर रेट पर बेची जा रही शराब, ठेकों से की जा रही शराब की अवैध सप्लाई, आबकारी विभाग की नींद खुलने का नाम नहीं l

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देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम की यात्रा मार्ग पर जहां लाखों श्रद्धालु केदारनाथ के दर्शन के लिए कठिन चढ़ाई चढ़ते हैं, वहीं एक अलग ही कारोबार फल-फूल रहा है। शराब माफिया ने केदार घाटी के ठेकों को अपना अड्डा बना लिया है। यहां सरकारी दरों से कई ज्यादा ओवर रेटिंग हो रही है, जबकि कई जगहों पर अवैध शराब की खुली सप्लाई चल रही है।

स्थानीय यात्रियों, दुकानदारों और कुछ श्रद्धालुओं की शिकायतों के अनुसार:
– विजय नगर, काकड़ा गाड़ और ऊखीमठ के आसपास स्थित अधिकांश शराब ठेकों में एक बोतल व्हिस्की या बीयर की कीमत MRP से कई ज्यादा वसूली जा रही है।
– कई ठेकेदार बिना बिल के नकद में शराब बेच रहे हैं और घटिया शराब की सप्लाई भी कर रहे हैं।
– पर्यटक सीजन में मांग बढ़ने का फायदा उठाकर माफिया काला बाजारी कर रहे हैं, जबकि गरीब घोड़े-खच्चर वाले और स्थानीय मजदूरों को भी इस लूट का सामना करना पड़ रहा है।

एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां ठेके वाले कहते हैं कि यात्रा का सीजन है, माल ढोकर लाना पड़ता है, इसलिए रेट ज्यादा हैं ।लेकिन असल में यह सब माफिया और कुछ ठेकेदारों, अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है। पुलिस दिखावे के लिए कभी-कभी छापेमारी करती है, लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे सोए हुए हैं।

हाल के महीनों में रुद्रप्रयाग पुलिस ने अवैध शराब तस्करी के कई मामले पकड़े हैं – नेपाली मूल के तस्करों से बोतलें बरामद हुईं, गौरीकुंड में दो नेपाली गिरफ्तार हुए, लेकिन लाइसेंस प्राप्त ठेकों में हो रही ओवर रेटिंग और और अवैध सप्लाई पर कोई सख्त कार्रवाई नजर नहीं आ रही।

उत्तराखंड सरकार ने 2025 में नई आबकारी नीति लागू की, जिसमें धार्मिक स्थलों के आसपास शराब बिक्री पर रोक और ओवर-रेटिंग पर लाइसेंस रद्द करने जैसे प्रावधान हैं, लेकिन केदार घाटी में इन नियमों का खुला उल्लंघन हो रहा है।

सवाल यह है:
– आबकारी विभाग के अफसरों की नींद कब खुलेगी?
– क्या केदारनाथ यात्रा सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए है या शराब माफिया के लिए भी सुनहरा अवसर ?
– मुख्यमंत्री धामी जी का “नशा मुक्त देवभूमि” का संकल्प यहां कितना लागू हो रहा है?

पुलिस को समय समय पर शराब के ठेकों में काम कर रहे लोगों का सत्यापन भी करना चाहिए, आम आदमी इनसे उलझना नहीं चाहता। कई बार इनसे ओवर रेट पर सवाल करने पर ये हाथापाई करने पर उतर जाते हैं। पूरी केदार घाटी में शराब माफिया का ये खेल केदार घाटी की पवित्रता को धूमिल कर रहा है।

स्थानीय लोग और श्रद्धालु अब तत्काल जांच, ठेकों की कीमतों की साप्ताहिक मॉनिटरिंग और माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो केदार घाटी की पवित्रता पर शराब माफिया की काली छाया और गहराती जाएगी। देवभूमि की गरिमा और श्रद्धालुओं की आस्था को बचाने की जिम्मेदारी अब प्रशासन पर है।

जनता के द्वार पहुंची रुद्रप्रयाग पुलिस: चौकी प्रभारी घोलतीर ने ग्राम सारी में चौपाल लगाकर ग्रामीणों

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पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग के निर्देशन में जनपद पुलिस द्वारा “पुलिस आपके द्वार” की भावना को चरितार्थ करते हुए जन-संवाद कार्यक्रमों में तेजी लाई जा रही है। इसी क्रम में आज, चौकी प्रभारी घोलतीर, उपनिरीक्षक सूरज कंडारी द्वारा ग्राम सभा सारी में ग्रामीणों के साथ एक विस्तृत चौपाल का आयोजन किया गया।

​गौरतलब है कि हाल ही में राजस्व पुलिस (पटवारी पुलिस) क्षेत्र से नियमित पुलिस क्षेत्र में सम्मिलित की गई 16 ग्राम सभाओं में सुरक्षा और सामंजस्य स्थापित करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
​चौपाल के मुख्य बिंदु-
• ​साइबर अपराध से बचाव: ग्रामीणों को वर्तमान में बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड, ओटीपी शेयरिंग और लुभावने लिंक्स से सावधान रहने के प्रति जागरुक किया गया। उन्हें बताया गया कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।
• ​नशा मुक्ति अभियान: ड्रग्स फ्री देवभूमि के संकल्प को दोहराते हुए पुलिस ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत किया। ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति अवैध नशे के कारोबार में संलिप्त पाया जाता है, तो उसकी सूचना गुप्त रूप से पुलिस को दें।
• ​सड़क सुरक्षा: पहाड़ी मार्गों पर यातायात नियमों के पालन, हेलमेट/सीटबेल्ट के प्रयोग और ओवरलोडिंग से बचने के निर्देश दिए गए।
• ​नियमित पुलिसिंग से परिचय: चूंकि यह क्षेत्र नया-नया नियमित पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आया है, इसलिए ग्रामीणों को पुलिस की कार्यप्रणाली, एफआईआर प्रक्रिया और आपातकालीन नम्बरों की जानकारी दी गई ताकि उनके मन से पुलिस का भय दूर हो और विश्वास बढ़े।

​चौकी प्रभारी सूरज कंडारी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि पुलिस उनकी सुरक्षा और सहायता के लिए सदैव तत्पर है। राजस्व क्षेत्र से नियमित पुलिस में हस्तांतरण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है। ग्रामीणों ने भी पुलिस की इस पहल का स्वागत किया और पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

 

श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर 7–8 फरवरी को केदारपुरी में संयुक्त निरीक्षणl

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श्री केदारनाथ धाम यात्रा 2026 की तैयारियों को लेकर 7–8 फरवरी को केदारपुरी में संयुक्त निरीक्षण*

*जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने विभिन्न विभागों को सौंपे दायित्व, उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल सिंह रावत नामित नोडल अधिकारी*

आगामी श्री केदारनाथ धाम यात्रा वर्ष 2026 के सफल संचालन तथा यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दिनांक 07 फरवरी से 08 फरवरी 2026 तक श्री केदारनाथ धाम (केदारपुरी) में विभिन्न व्यवस्थाओं एवं कार्यों का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। इस संबंध में जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन द्वारा विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देश जारी किए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान यात्रा मार्ग, केदारपुरी एवं गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक की समस्त व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा, ताकि यात्रा प्रारम्भ होने से पूर्व सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण कर लिए जाएं।

जिलाधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल रावत एवं तहसीलदार ऊखीमठ को यात्रा मार्ग पर स्थित समस्त दुकानों का निरीक्षण एवं चिन्हीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिशासी अभियंता निर्माण खण्ड गुप्तकाशी को पैदल यात्रा मार्ग की मरम्मत, बेंच, कूड़ादान, डण्डी-कण्डी काउंटर, तप्तकुण्ड आदि कार्यों के लिए आंगणन गठित कर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने को कहा गया है।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को यात्रा रूट की सुरक्षा, आपदा पूर्व तैयारी तथा संवेदनशील वृक्षों के कटान की कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिशासी अभियंता राष्ट्रीय राजमार्ग, लोनिवि रुद्रप्रयाग को रुद्रप्रयाग से गौरीकुण्ड तक सड़क मार्ग का निरीक्षण करने को कहा गया है।

विद्युत वितरण खण्ड रुद्रप्रयाग को विद्युत व्यवस्थाओं का निरीक्षण, जल संस्थान को जल, प्याऊ, चरियां एवं स्टैंड पोस्ट की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने, तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को डंडी-कंडी काउंटर (गौरीकुण्ड) एवं यात्रा व्यवस्थाओं के निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।

जिला समाज कल्याण अधिकारी को प्रीपेड काउंटरों का निरीक्षण एवं चिन्हांकन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला पंचायत को यात्रा मार्ग की साफ-सफाई, ट्रेचिंग ग्राउंड एवं कूड़ादान व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस उपाधीक्षक गुप्तकाशी/सोनप्रयाग को सुरक्षा व्यवस्था एवं पुलिस चेक पोस्ट सुदृढ़ करने को कहा गया है।

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी को घोड़े-खच्चरों के संचालन एवं उनके मेडिकल परीक्षण, उप प्रभागीय वनाधिकारी को वन भूमि संबंधी निरीक्षण, जिलापूर्ति अधिकारी को रहने एवं खाने की व्यवस्था, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत केदारनाथ को पंचायत स्तरीय साफ-सफाई एवं कूड़ादान व्यवस्था, तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को स्वास्थ्य सुविधाएं, मेडिकल कैंप एवं चेकअप पोस्ट की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

क्षेत्रीय प्रबंधक गढ़वाल मंडल विकास निगम को आवासीय एवं टेंट व्यवस्था तथा सुलभ इंटरनेशनल को यात्रा मार्ग की साफ-सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उक्त सभी व्यवस्थाओं के पर्यवेक्षण एवं निगरानी हेतु उपजिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल सिंह रावत को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निरीक्षण के दौरान अपने विभाग से संबंधित समस्त सूचनाओं सहित अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें।

साथ ही, पैदल यात्रा मार्ग के निरीक्षण के उपरांत सभी विभागों को अपने-अपने दायित्वों से संबंधित विस्तृत कार्ययोजना, समस्त औपचारिकताओं एवं अभिलेखों सहित, तीन दिवस के भीतर यात्रा व्यवस्था सेल को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करना होगा।

*मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का रुद्रप्रयाग जनपद दौराl

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*कमेड़ा में लगा “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” बहुउद्देशीय शिविर, 35 में से 20 समस्याओं का मौके पर समाधान, शेष पर समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश*

*अब आम जनमानस की शिकायत नहीं भटकेगी, शिविरों में मिलेगा समाधान- डॉ. आर. राजेश कुमार*

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में आम जनमानस तक केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेशभर में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रभारी सचिव रुद्रप्रयाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने जनपद का दौरा कर प्रशासनिक व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन के कुशल नेतृत्व में जनपद की 27 न्याय पंचायतों में चरणबद्ध रूप से बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में 05 फरवरी 2026 को न्याय पंचायत सतेराखाल के अंतर्गत ग्राम कमेड़ा में “प्रशासन गांव की ओर” बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की अध्यक्षता प्रभारी सचिव रुद्रप्रयाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने की।

*स्टॉलों का निरीक्षण, लाभ मौके पर देने के निर्देश*
प्रभारी सचिव ने शिविर स्थल पर पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि शिविरों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि पात्र लोगों को तत्काल लाभ पहुंचाना है।

*एक ही स्थान पर मिली योजनाओं की सुविधा*
शिविर में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, उद्योग, समाज कल्याण, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य विभाग (आयुष्मान आरोग्य शिविर), राजस्व विभाग, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास, पूर्ति विभाग सहित अनेक विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए। ग्रामीणों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई और पात्र लाभार्थियों को मौके पर ही सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।

*पेंशन, आयुष्मान और प्रमाण पत्र की सेवाएं मौके पर*
शिविर में वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन, आयुष्मान भारत योजना, राशन कार्ड, आधार से संबंधित सेवाएं, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, समान नागरिक संहिता पंजीकरण, राशन कार्ड ई-केवाईसी, एलपीजी केवाईसी, स्वरोजगार एवं आजीविका योजनाओं सहित अनेक सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को एक ही स्थान पर प्रदान किया गया, जिससे उन्हें विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े।

*जनसुनवाई में सामने आईं 35 समस्याएं*
शिविर के दौरान आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों द्वारा कुल 35 समस्याएं रखी गईं। इनमें से 20 समस्याओं का समाधान मौके पर ही कर दिया गया, जबकि शेष समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

*पेयजल, सड़क और बिजली की समस्याएं प्रमुख*
ग्रामीणों ने तल्ला नागपुर पेयजल पंपिंग योजना से पर्याप्त जलापूर्ति न होने, कमेड़ा के आंतरिक क्षेत्रों में पेड़ों से घरों को नुकसान की आशंका के कारण पेड़ कटान, खराल तोक से क्यार्क तक पैदल मार्ग निर्माण, सड़क मरम्मत, सोलर लाइट स्थापना, राशन कार्ड, विद्युत आपूर्ति, आवास, सड़क डामरीकरण, पेयजल व्यवस्था, मुआवजा और गौशाला से जुड़ी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। ग्राम प्रधान ऊषा देवी ने खराल, चांदियूं एवं गढ़धार क्षेत्र को नगर पालिका में सम्मिलित न करने का अनुरोध किया। वहीं ग्रामीण उमाशंकर सेमवाल ने लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा न मिलने की शिकायत दर्ज कराई।

*मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे प्रभारी सचिव*
इस अवसर पर प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है और वे मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में यहां उपस्थित हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन समस्याओं के समाधान के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है, उनका निस्तारण तय समय में सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

*ग्रामीणों से भी फॉलोअप की अपील*
प्रभारी सचिव ने ग्रामीणों से भी आग्रह किया कि वे अपनी समस्याओं के समाधान का नियमित फॉलोअप लेते रहें और किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर प्रशासन को अवगत कराएं। शिविर में जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह बिष्ट, ग्राम प्रधान कमेड़ा ऊषा देवी, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत, उपजिलाधिकारी रुद्रप्रयाग सोहन सिंह सैनी, पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध घिल्डियाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत, एसडीओ फॉरेस्ट देवेंद्र पुंडीर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामप्रकाश, मुख्य शिक्षा अधिकारी प्रमेन्द्र बिष्ट, खंड विकास अधिकारी अगस्त्यमुनि सुरेश शाह, जिला पर्यटन विकास अधिकारी राहुल चौबे, अधिशासी अभियंता लोनिवि इंद्रजीत बोस, अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग मीनल गुलाटी, जिला समाज कल्याण अधिकारी टी.आर. मलेठा, तहसीलदार प्रणव पांडे सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

*अब शिकायत नहीं भटकेगी, शिविरों में मिलेगा समाधान- डॉ. आर. राजेश कुमार*
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से सरकार आम जनता के बीच सीधे पहुंच रही है। इन बहुउद्देशीय शिविरों का उद्देश्य यह है कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनसमस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर और समयबद्ध ढंग से किया जाए। आज शिविर में अधिकांश समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया गया है और शेष समस्याओं के लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा दी गई है। सभी अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि तय समय में समाधान हो। सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है और यही इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

3.56 करोड़ की पेंटिंग मात्र 3 महीनों में उखड़ गई: गोरपा-कुरछोला मोटर मार्ग के बुरे हाल, ठेकेदार-विभाग की लापरवाही पर सवाल

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रुद्रप्रयाग जिले के जखोली विकासखंड में स्थित गोरपा-सिरवाड़ी-कुरछोला मोटर मार्ग के हालात एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यह 22 किलोमीटर लंबा ग्रामीण मार्ग, जो पीएमजीएसवाई और लोक निर्माण विभाग के तहत आता है, स्थानीय ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, लेकिन ठेकेदार और संबंधित विभाग की कथित लापरवाही के कारण यह अब बदहाल हो चुका है।

दिसंबर 2025 में इस मार्ग पर 3.56 करोड़ रुपये की लागत से सड़क की पेंटिंग का काम पूरा किया गया था। मात्र कुछ महीनों के भीतर ही यह निवेश व्यर्थ साबित हो रहा है। जगह-जगह पेंटिंग उखड़ चुकी है, सड़क की सतह टूट-फूट गई है, गड्ढे बन गए हैं और कई हिस्सों में मार्ग का अस्तित्व ही संकट में दिखाई दे रहा है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ठेकेदार ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया और काम में गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया। बारिश के मौसम में भी सड़क पर पानी जमा होने और ड्रेनेज की कमी से समस्या और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद मार्ग की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है, जिससे दैनिक आवागमन, स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीजों की एम्बुलेंस और कृषि उत्पादों की ढुलाई में भारी परेशानी हो रही है।

यह मार्ग रुद्रप्रयाग जिले के सिलगढ़ पट्टी के कई गांवों को जोड़ता है और पहले भी मानसून में बंद होने या भूस्खलन जैसी समस्याओं का सामना कर चुका है। विभागीय अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोग जांच, दोषियों पर कार्रवाई और तत्काल मरम्मत की मांग कर रहे हैं।

ऐसे मामलों में अक्सर ठेकेदारों पर ब्लैक लिस्टिंग या पेनल्टी की कार्रवाई की मांग उठती है, लेकिन क्या इस बार विभाग गंभीरता से कदम उठाएगा? यह देखना बाकी है। ग्रामीणों की शिकायत है कि सरकारी योजनाओं के तहत करोड़ों खर्च होने के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहते हैं।

रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे NH के मानकों को ताक पर रखकर हो रही अवैध कटिंग, NH के अधिकारियों ने साधी है चुप्पी।

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रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे NH के मानकों को ताक पर रखकर हो रही अवैध कटिंग, NH के अधिकारियों ने साधी है चुप्पी।

यह कटिंग न केवल नेशनल हाईवे के निर्धारित मानकों (जैसे हाईवे से निर्धारित दूरी, पर्यावरणीय बफर जोन, सड़क सुरक्षा नियम आदि) को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है, बल्कि इससे हाईवे की संरचना को खतरा, सड़क किनारे मिट्टी का कटाव, धूल-प्रदूषण और दुर्घटना का जोखिम बढ़ रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से NH की सड़क को भी नुकसान पहुंच रहा है, साथ ही स्थानीय पर्यावरण और जल स्रोतों पर गहरा असर पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) या संबंधित NH अधिकारियों की ओर से 19/01/2026 को कटिंग रोकने के लिए नोटिस भेजा गया था, बाबजूद इसके कटिंग अभी भी धड़ल्ले से जारी है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी इसे विभागीय मिलीभगत या लापरवाही मान रहे हैं।

एनएच अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिसे लेकर लोग नाराज हैं। क्षेत्र में पहले भी अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए गए हैं, जैसे दिसंबर 2025 में तिलवाड़ा और अगस्त्यमुनि बाजारों में पक्के निर्माणों को ध्वस्त किया गया था, लेकिन हाईवे किनारे की अवैध कटिंग पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।

स्थानीय निवासी मांग कर रहे हैं कि एनएच विभाग तत्काल जांच करे, मानकों का पालन सुनिश्चित करे और दोहरे मापदंड को खत्म किया जाए। यदि यह सिलसिला जारी रहा तो हाईवे की सुरक्षा और पर्यावरण को गंभीर खतरा हो सकता है, खासकर हिमालयी क्षेत्र में जहां भूस्खलन जैसी घटनाएं पहले से आम हैं।

प्रशासन से अपेक्षा है कि वह जल्द इस मुद्दे पर संज्ञान ले और आवश्यक कार्रवाई करे, ताकि हाईवे के मानकों की रक्षा हो सके और स्थानीय लोगों का विश्वास बना रहे।

ऐसे मामलों में तत्काल जांच, खनन गतिविधियों पर रोक, मशीनरी जब्ती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है, ताकि नेशनल हाईवे की सुरक्षा और आसपास के पर्यावरण को बचाया जा सके। यह सिर्फ तिलवाड़ा की समस्या नहीं, बल्कि पूरे रुद्रप्रयाग जिले में अवैध खनन के खिलाफ एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।