रुद्रप्रयाग ।।*प्रदेश में काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों का स्थानांरण करने पर राजकीय शिक्षक संघ रुद्रप्रयाग द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा में प्रदेश के प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत स्वागत सम्मान समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया*स्वागत सम्मान समारोह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, सहकारिता, उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। 
उन्होंने कहा कि एक स्थान पर कई वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों की काउंसलिंग के माध्यम से स्थानांतरित किया गया है जिसमें लगभग 6300 शिक्षकों का स्थानांतरण किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों की काफी लंबे समय से पदोन्नति नहीं हुई है उन्हें शीघ्र ही इसका लाभ उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्राइमरी में शिक्षकों की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए प्राइमरी में शिक्षकों की नियुक्ति की जा रही है जिन प्राइमरी स्कूलों में 10 बच्चे अध्ययनरत हैं उनमें एक शिक्षक हैं तथा 20 से 25 तक छात्र संख्या वाले स्कूलों में 02 तथा 40 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में 03 तथा 75 से अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में 4 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही शीघ्र ही एलटी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया की जा रही है तथा प्रदेश में 2500 चतुर्थ श्रेणी की नियुक्ति जल्द ही की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जो शिक्षक गढ़वाल का कुमांऊ मंडल में तथा कुमाऊ मंडल का गढ़वाल में हैं इसके लिए शीघ्र ही अंर्तमंडलीय स्थानातरण शीघ्र ही किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई शिक्षकों द्वारा बीमार होने का आवेदन पत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं इसके लिए यह निर्णय लिया गया है कि इसमें मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। जिसमें ऐसे आवेदन करने वालों पर मेडिकल बोर्ड द्वारा विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिए जिन स्कूलों में फर्नीचर, कंप्यूटर एवं पुस्तकालय की आवश्यकता है उसके लिए वह प्रस्ताव देने को कहा ताकि ऐसे विद्यालयों में सभी सामग्री उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने कहा कि जो स्कूल क्षतिग्रस्त एवं जीर्ण शीर्ण हैं इसके लिए तत्काल प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर करने के लिए शिक्षकों के साथ बैठक करते हुए उनके सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपेक्षा की है कि शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे कि बच्चे का सर्वागीण विकास होने पर अपने जनपद एवं प्रदेश का नाम रोशन कर सके।
इस अवसर पर विधायक श्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि शिक्षा मंत्री द्वारा प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसे-ऐसे कार्य किए गए हैं जिनकी कभी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो उनसे मांग की गई थी उन सभी मांगों पर उन्होंने गंभीरता से कार्य करते हुए उनको पूरा किया है।
इस अवसर पर शिक्षक संघ के जनपदीय अध्यक्ष नरेश कुमार भट्ट ने शिक्षा मंत्री का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि मंत्री जी का आशीर्वाद सभी शिक्षकों को प्राप्त हुआ है तथा काउंसलिंग के माध्यम से शिक्षकों के स्थानांतरण किए गए हैं वह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि 35 सूत्रीय मांग पत्र मंत्री जी को सौंपा है जिस पर कई मांगों को पूरा किया गया है तथा कुछ ऐसी मांगें है जिन पर विचार नहीं किया जा सका है। उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि शेष मांगों पर मंत्री जी द्वारा जल्द ही विचार किया जाएगा।
इस अवसर पर प्राचार्य डायट सीपी रतूड़ी ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने पर शिक्षा मंत्री का आभार एवं साधुवाद किया तथा कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए सभी शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अमरदेई शाह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री द्वारा शिक्षण संस्थान के परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया।
इस अवसर पर राज्य मंत्री श्री चंडी प्रसाद भट्ट, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री सुमंत तिवारी, जिलाध्यक्ष भाजपा चमोली, पूर्व राज्य मंत्री मातवर सिंह रावत, ग्राम प्रधान मयकोटी अमित प्रदाली, अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा एसबी जोशी, मुख्य शिक्षा अधिकारी प्रमेंद्र कुमार बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अजय कुमार चौधरी, खंड शिक्षा अधिकारी जखोली यशवीर सिंह रावत सहित शिक्षक संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कुसुम एवं आलोक रौथाण द्वारा किया गया।









उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरों द्वारा क्षतिग्रस्त केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग को खोलने के लिए कार्य त्वरित गति से किया जा रहा है किन्तु मौसम साथ न देने के कारण मजदूरों की सुरक्षा के दृष्टिगत कार्य निरंतर नहीं हो पा रहा है।


जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नन्दन सिंह रजवार ने बताया कि सोनप्रयाग मन्दाकिनी नदी पर सेना द्वारा केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग में फंसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए जो पैदल पुल तैयार किया गया था, वह पुल कल बीती रात लगातार भारी बारिश होने से नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण बह गया है।

समिति ने सड़क संघर्ष का गठन करने पश्चात सड़क निर्माण के लिए शासन-प्रशासन व सरकार से पत्राचार कर मांग की जायेगी। यदि मंग पूरी नही हुई तो अग्रिम बैठक में आन्दोलन करने के लिए रणनीति बनायी जायेगी।बैठक में समस्त क्षेत्र लोगो ने कहा कि मोहनखाल-कानातोली- तक 13 किमी0 सड़क स्वीकृत थी,जिसमें से 10 किमी0 सड़क का निर्माण 1989/80 में किया गया था। इसी दौरान 1980/81 में वन अधिनियम बना तो इस सड़क का निर्माण बंद हो गया था। उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कार्यो में वन अधिनियम में सरलीकरण किया गया है। वक्ताओ ने कहा कि मोहनखाल-कानातोली-चोपता सड़क बनने से तीर्थाटन और पर्यटन की अपार संभावनाएं है। कहा कि इस सड़क के निर्माण से सैलानियों की चहल कदमी से स्थानीय लोगो को रोजगार भी मिलेगा, और स्थानीय लोगो का पलायन भी रुकेगा।







