रुद्रप्रयाग- रामबाडा़-खाम-चौमासी पैदल मार्ग से पांचवें दिन 46 यात्री व स्थानीय व्यक्ति चौमासी गाँव पहुंच गये हैं। प्रशासन व जीप टैक्सी यूनियन गुप्तकाशी व चौमासी गाँव के सभी ग्रामीणों के अथक प्रयासों से चौमासी गाँव पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय व्यक्तियों के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था अभी भी जारी है। अभी तक रामबाडा़-खाम-चौमासी पैदल मार्ग से 855 तीर्थ यात्री व स्थानीय लोगों चौमासी गाँव पहुंच गये हैं।
प्रशासन के सहयोग व चौमासी गाँव के ग्रामीणों के अथक प्रयासों से चौमासी गाँव से 6 किमी दूर खाम बुग्याल के निकट देवली में टैंट लगा दिया गया है तथा गाँव के दो युवक प्रतिदिन चौमासी गाँव से पैदल मार्ग से देवली पहुंचकर रामबाडा़-खाम-चौमासी आने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को विसलरी की बोतलें, बिस्कुट व नमकीन उपलब्ध करा रहे हैं। देवली पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को विसलरी, बिस्कुट व नमकीन चौमासी के ग्रामीणों द्वारा अपने निजी संसाधनों से उपलब्ध कराये जा रहे हैं। देवली में टेन्ट लगाने का चौमासी के ग्रामीणों का मुख्य उद्देश्य रात्रि के समय रामबाडा़-खाम से देवली पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को आसरा देना है! विगत दिनों जिला पंचायत सदस्य कालीमठ विनोद राणा व कांग्रेस सेवा दल के जिला महामंत्री दिनेश पुरोहित ने दो दिनों तक चौमासी से चार किमी आगे जाकर तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को चौमासी गाँव पहुंचाने में भरपूर मदद की गयी। वर्ष 2013 की आपदा के बाद भी कई हजारों तीर्थ यात्री व स्थानीय लोगों रामबाडा़-खाम पैदल मार्ग से चौमासी गाँव पहुंचे थे तब भी चौमासी के ग्रामीणों द्वारा तत्कालीन प्रधान सुरेन्द्र सिंह तिन्दोरी के नेतृत्व में चौमासी गाँव पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों की इसी प्रकार समर्पण भावना से सेवा की गयी थी।
आपदा के समय चौमासी के ग्रामीणों द्वारा इसी प्रकार निस्वार्थ भाव से सेवा करने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित जनपद के जनप्रतिनिधियों व विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रधान मुलायम सिंह तिन्दोरी सहित चौमासी के सभी ग्रामीणों की सेवा भाव की भूरी – भूरी प्रशंसा की है। प्रधान चौमासी मुलायम सिंह तिन्दोरी ने बताया कि अभी तक रामबाडा़ – खाम पैदल मार्ग से 855 तीर्थ यात्री व स्थानीय लोगों चौमासी गाँव पहुंच चुके हैं तथा चौमासी गाँव पहुंचने वाले हर तीर्थ यात्री व स्थानीय लोगों की ग्रामीणों द्वारा निःस्वार्थ व समर्पण भावना से सेवा की जा रही है। उन्होंने बताया कि चौमासी गाँव से 6 किमी दूर चौमासी – खाम – रामबाडा़ पैदल मार्ग पर देवली में टेन्ट लगा दिया है जिससे रात्रि के समय देवली पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को आसरा मिल सकें तथा बरसात के समय देवली में रात्रि प्रवास करने वालों को किसी प्रकार का कष्ट न हो। उन्होंने बताया कि देवली में जो टेन्ट लगा है वह प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया है तथा ग्रामीणों द्वारा स्वयं देवली तक टेन्ट पहुंचाकर लगा दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रति दिन गाँव के दो युवा बिसलरी की बोलते, बिस्कुट व नमकीन व अन्य खाद्य सामाग्री लेकर देवली पहुंचते है तथा रामबाडा़ – खाम पैदल मार्ग से देवली पहुंचने वाले तीर्थ यात्रियों व स्थानीय लोगों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।


पिछले बुधवार को केदारनाथ में आई आपदा से तमाम रास्ते बंद होने की वजह से वहां हजारों यात्री फंस गए थे। इनका रेस्क्यू करने के लिए वायुसेना का एक चिनूक व एक एम आई 17 हैलीकॉप्टर गौचर हवाई पट्टी में तैनात कर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का निर्णय लिया गया था। पिछले शुक्रवार को इन हेलीकाप्टरों ने गौचर हवाई पट्टी से उड़ान भरी थी। तब मात्र 15 लोगों का ही रेस्क्यू किया गया था। लेकिन इसके बाद क्षेत्र का मौसम खराब होने की वजह से चिनूक हैलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया था।सोमवार को मौसम खुलते ही वायुसेना के चिनूक हैलीकॉप्टर द्वारा 10 बजे तक केदारनाथ के दो चक्करों में 65 लोगों को गौचर हवाई पट्टी में लाया गया। यहां रेस्क्यू किए गए यात्रियों का मेडिकल चेकअप करने के उपरांत उन्हें भोजन कराने के बाद गंतव्य स्थान के लिए भेज दिया गया।



इन रास्तों को पुनर्स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है। वहीं डॉग टीम स्निफर डॉग की मदद से सर्च अभियान भी शुरू कर चुकी है।जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को वाश आउट क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार एव पुश्तों का निर्माण जल्द शुरू करवाने के निर्देश दिए। खाद्य विभाग को सभी स्थानों पर फूड पैकेट्स, पानी एव भोजन व्यवस्था निरंतर करने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा कमांडेंट एनडीआरएफ सुदेश कुमार, एसडीआरएफ मणिकांत मिश्रा पूरे रेस्क्यू पर नजर बनाए हुए हैं।
डीएम सौरभ गहवार ने बताया कि केदारनाथ पैदल मार्ग में घटी घटना के बाद से अब तक हेली सेवा से 2082, पैदल मार्ग से 6,546 और वैकल्पिक मार्ग चैमासी गांव 420 तीर्थयात्री पहुंच गए हैं. उन्होंने बताया कि अब तक हुए रेस्क्यू में 9099 तीर्थयात्रियों की जान को बचाया गया है।













