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Thursday, March 19, 2026


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पहाड़ो में विकट परिस्थिति होने के बावजूद भी सरकारी तंत्र नही ले रहा सबक ।

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कल रात बारात से भरी बस खाई मे गिरने पर 15 घण्टो के व्यतीत हो जाने के बाद भी रेस्क्यू अभियान नही हो पाया पूरा ।
अभी भी कही बराती बताये जा रहे है खाई में ।
बस में सवार बताये जा रहे हैं 45 लोग ।
रेस्क्यू करने के लिये अन्य जनपदों से मांगी जा रही टीमें।

बीरोखाल । पल भर में खुशियों पर छाया मातम ।
बड़ी खबर पौड़ी जिले की बीरोंखाल की हैं ।जंहा कल रात्रि को बरात की बस खाई में गिर गयी थी ।रात को अंधेरा होने व विकट परिस्थिति होने से रेस्क्यू करने में दिक्कतें आ रही है । बस कोटद्वार के लालढांग से बीरोखाल के कांडा गांव जा रही बारात की बस कल रात करीब 7बजे 500 मीटर गहरी खाई मे जा गिरी ।

घटना पौड़ी जिले के बीरोखाल और रिखणीखाल के बीच सिमड़ी मे हुई, सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस रात ही घटनास्थल पर पहुंच गई थी जिसके बाद से ही बारतीओ को खाई से निकालने का काम किया जा रहा है साथ ही कोटद्वार से भी एस डी आर एफ की टीम घटना स्थल के लिए रवाना कर दी गई थी जिससे की बचाव कार्य तेज़ी से किया जा सके… हालांकि हादसे के कारणों का अभी तक पता नहीं लग पाया है लेकिन बस मे 45 से ज़्यदा बारतीओ के होने की सूचना है जिसमे से दो से 25 लोगो की मोके की खबर सामने आ रही है ।

 

और अभी भी रेस्क्यू अभियान जारी है ,मौत के आंकड़े इससे कई ज़्यदा भी हो सकते है, वहीं जिन लोगो को गंभीर चोटे आई है उनको कोटद्वार बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दियागया है, मालूली चोटे वालो को पास के अस्पताल मे ही उपचार दिया जा रहा है वही रेस्क्यू ऑपरेशन मे तेज़ी लाने के लिए आसपास के इलाकों से भी एस डी आर एफ की टीमें बुलाई जा रही है।

सरकार! हाकम का रिजॉर्ट अब कैसे हो गया अवैध, भर्ती घोटाले के बाद ही क्यों खुली सिस्टम की आंखें! कई वीवीआईपी, वीआईपी भी रह चुके रिजॉर्ट में।

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जिस विभाग की जमीन पर रिजॉर्ट बना था क्या उस विभाग की संलिप्तता की जांच नही होनी चाहिये।

हाकम सिंह के रिजॉर्ट बनाते समय उसके ऊपर किस सफेदपोश का हाथ था क्या उसकी जांच नही होनी चाहिये ।

क्या हाकम के रिजॉर्ट ध्वस्तीकरण होने से हाकम को सरंक्षण देने वालो को बचाया जा रहा है ।

नरेश भट्ट ।।

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में भर्ती घोटाले के मास्टर माइंड हाकम सिंह का रिजॉर्ट अब कैसे सरकार की नजरों में अवैध हो गया। जबकि यह पहले से ही 85 फीसदी वन भूमि पर अतिक्रमण कर बनाया गया था। लेकिन, सिस्टम ने आंख मूंद रखी थी। इस रिजॉर्ट को ध्वस्त करने से सरकार को मिला, यह सवाल हर किसी के जेहन में तैर रहा है।


उत्तरकाशी जनपद के मोरी ब्लॉक के सांकरी में बना हाकम सिंह का रिजॉर्ट को सरकार के आदेश पर प्रशासन, पुलिस की मौजूदगी में ध्वस्त कर दिया गया है। लेकिन सरकार की यह कार्रवाई कई सवाल भी छोड़ गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की तर्ज पर बुल्डोजर से धामी सरकार उत्तराखंड में अतिक्रमणकारियों पर नकेल कसना चाह रही है। लेकिन अभी तक यह कार्रवाई दो बड़े मामलों में सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर गई है। पहला, अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी पुलकित के रिजॉर्ट पर बोल्डोजर चलाती है, जबकि वहां हत्या से जुड़े कई सबूत थे।

लेकिन आनन फानन में रिजॉर्ट तोड़ने की कार्रवाई के साथ, आग भी लग जाती है। वहीं अब भर्ती घोटाले के मास्टर माइंड हाकम सिंह का रिजॉर्ट को ध्वस्त किया गया है। भारी भरकम फोर्स की मौजूदगी में सरकार की यह कार्रवाई गले नहीं उतर रही है। यह ठीक है की यह रिजॉर्ट वन भूमि में अवैध था। लेकिन जब यह बन रहा था, तब क्यों कार्रवाई नहीं की गई। अब, ही नापजोख में वन विभाग को अपने मुनरे टूटे नजर आ रहे हैं। जब, यहां देवदार के हरे हरे पेड़ों को काटकर और उन्हें तराश कर रिजॉर्ट में लग रहे थे, तब क्यों सिस्टम आंख मूंदे हुए था। बनने के बाद इस रिजॉर्ट में प्रदेश और जनपद के कई वीवीआईपी, वीआईपी भी रुके, लेकिन किसी को यह अवैध नहीं लगा। अब, इस रिजॉर्ट पर बुल्डोजर चलाया गया, तो इसका क्या लाभ मिला। क्या, उन युवाओं का भविष्य संवर जाएगा, जो हाकम सिंह लील चुका है। क्या, उन युवाओं का कठिन परिश्रम, कुछ बनने के सपने, उम्मीदें, उन्हें वापस मिल जाएंगे। इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

भर्ती में ऊधमसिंह नगर कोऑपरेटिव बैंक के अफसरों ने कर दिया खेला, चहेतो को फायदा पहुंचाने के लिए झोंक दी सरकार की आंख में धूल ।

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रुद्रपुर उधम सिंह नगर: उत्तराखंड में भर्ती घोटालों की लंबी फेहरिस्त है। ताजा मामला कॉपरेटिव बैंक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती में धांधली का सामने आया है। यहां अपनों को मलाई खिलाने के फेर में अधिकारियों ने जमकर गड़बड़ी की है।

सूत्रों की माने तो भर्ती में अफसरों ने अपने हिसाब से बदलाव कर दिए, इसके साथ ही तमाम अभ्यर्थियों के नंबर बदल दिए गए। इस खेल में खेल प्रमाण पत्रों पर खूब नंबर लुटाए गए और यह सब धामी 2 सरकार से पहले आचार संहिता लगने के बाद मौके का फायदा उठाकर किया गया। गड़बड़ी की शिकायतें सरकार को मिली तो दोबारा सहकारिता का जिम्मा मिलने पर धन सिंह रावत ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे।

उपनिबंधक नीरज बेलवाल और मान सिंह सैनी को जांच की जिम्मेदारी दी गई थी। इन दोनों अधिकारियों ने अब अपनी रिपोर्ट सहकारिता सचिव पुरुषोत्तम को सौंप दी है।
ऊधमसिंह नगर के साथ ही देहरादून पिथौरागढ़ की जांच भी की गई है। ऊधमसिंह नगर में बड़ी चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बैंकों ने अपने स्तर से भर्ती प्रक्रिया के मानकों में बदलाव तक कर दिया। नियम था कि स्कूल, कॉलेज व डिग्री कॉलेज में पाठ्यक्रम के अतिरिक्त संचालित गतिविधियों के भी नंबर दिए जाएंगे, लेकिन सिर्फ खेलकूद प्रमाण पत्र को मानते हुए ही नंबर दिए गए जबकि एनसीसी, एनएसएस समेत कई अन्य गतिविधियों के प्रमाण पत्र को शामिल नहीं किया गया। खेल प्रमाण पत्रों में खेला किया गया और फर्जी प्रमाणपत्रों तक को नंबर दे दिए गए। चहेतों को जिला फुटबॉल लीग के एक ही साल के कई सर्टिफिकेट के नंबर दिए गए जबकि लीग तो साल में एक ही बार होती है। जिन बरसों में लीग नहीं भी हुई, उनके नंबर भी दिए गए। अनुभव प्रमाण पत्रों में भी खेल किया गया। अनुभव के नंबर सहकारिता विभाग, सहकारी संस्थाओं व सहकारी परियोजनाओं में काम करने वालों को ही दिए जाने थे। एक वर्ष के अधिकतम दो नंबर और अधिकतम 10 नंबर दिए जाने थे, इसमें भी खेल करते हुए पात्र लोगों को नंबर नहीं दिए गए और अपात्र लोगों को नंबरों से नवाज दिया गया।
खास बात यह है कि देहरादून डीएसबी की भर्ती को रजिस्ट्रार कार्यालय ने 23 मार्च को मंजूरी दी और इसके महज कुछ घंटों में अभ्यर्थियों की जॉइनिंग भी करा दी गई, वहीं पर पिथौरागढ़ में भर्ती को रजिस्ट्रार स्तर से 21 फरवरी को मंजूरी मिली और 22 से 24 के बीच यहां जॉइनिंग भी करा दी गई।

उधम सिंह नगर में रजिस्टार ऑफिस से 21 फरवरी को मंजूरी मिलने के बाद 16 मार्च को जॉइनिंग करा दी गई। यहां शासन के ज्वाइनिंग न कराने के आदेश को भी ताक पर रखते हुए नियुक्ति दे दी गई। इस मामले में रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में है। भर्ती को मंजूरी देने से पहले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र मंगाए गए थे लेकिन सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने सारे प्रमाण पत्र की जांच भी की गई? अगर हां, तो फिर गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई ? गड़बड़ी पकड़नी ही नहीं थी तो फिर क्यों रिकॉर्ड के दौरान छेड़छाड़ की गई।

द्रौपदी का डांडा में फंसे 28 प्रशिक्षार्थियों में से 2 की मौत की खबर ।

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द्रौपदी का डांडा-2 पर्वत चोटी में हिमस्खलन होने के कारण नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी के 28 प्रशिक्षार्थियों के फंसे होने की सूचना मिली थी ।

उत्तरकाशी : नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के एडवांस प्रशिक्षण कोर्स के दौरान द्रोपदी का डांडा में एवलांच आने से दो प्रशिक्षकों के मौत की खबर आ रही है। दोनों प्रशिक्षक उत्तरकाशी निवासी बताए जा रहे हैं। साथ ही रेस्क्यू टीम अन्य प्रशिक्षुओं को रेस्क्यू करने में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि उत्‍तरकाशी के द्रौपदी का डांडा क्षेत्र में एडवांस प्रशिक्षण के लिए निम की 25 से ज्यादा लोगों की टीम गई थी। इस दौरान ही वहां से एवलांच की खबर आई है। 2 प्रशिक्षकों की मौत
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य ने कहा कि द्रौपदी का डांडा क्षेत्र में प्रशिक्षण के दौरान एवलांच आया है। जिसमें 2 प्रशिक्षकों की मौत हो गई है। अन्य घायलों को रेस्क्यू किया जा रहा है।

Avalanche : एयरफोर्स से किया संपर्क
एयरफोर्स से भी शासन ने संपर्क किया है। 3 हेलीकॉप्टर पूरे क्षेत्र की रेकी करेंगे। इसके साथ ही बचाव कार्य शुरू किया जाएगा। SDRF की टीम जल्द ही कैंप के लिए निकलेगी।

गलत तरीके से बनाई करोड़ो रूपये सम्पति का ध्वस्तीकरण।

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पेपर लीक के मास्टरमाइंड हाकम सिंह के अवैध रिजॉर्ट का हो रहा ध्वस्तीकरण।

Uksssc भर्ती परीक्षा के मुख्य आरोपी हाकम सिंह के रिसोर्ट पर हुई कार्यवाही,

सांकरी स्थित रिसॉर्ट पर हुई ध्वस्तीकरण की कार्यवाही,

हाकम सिंह का रिसोर्ट 85 प्रतिशत कब्जे की वन भूमि पर बना है।

उत्तराखंड के विकास में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरितः राज्यपाल।

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स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की भूरी-भूरी प्रशंसा
केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों पर जताई खुशी बोले, श्रमिकों से ही वस्तुकाल जीवित।
रिपोर्ट ।विनय बहुगुणा रुद्रप्रयाग

रुद्रप्रयाग। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तराखंड के विकास में महिलाओं की भूमिका सर्वोपरि है। उन्होंने समूहों में काम करने वाली महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री ऑनलाइन कर आजिविका को बढ़ावा देना चाहिए। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकिंग और बाजार मूल्य का अध्ययन जरूरी है।
जनपद के एक दिवसीय भ्रमण पर पहुंचे राज्यपाल ने 11-मराठा लाईट इंफेंट्री सभागार में राजस्व, पुलिस, वन, विकास और स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण में लगे श्रमिकों के समर्पण व सेवाभाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि विषम परिस्थितियों में उनके द्वारा केदारनाथ को संवारा जा रहा है। कहा कि श्रमिकों की मेहनत से ही निर्मित वस्तुकला युगों व पीढ़ियों तक जीवंत रहती हैं। कहा कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद धाम का एक अदभुत नजारा तीर्थयात्रियों को सम्मुख होगा। उन्होंने प्रशासन से कहा कि यात्रा को सुलभ व सरल बनाने के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत है। उन्होंने मंदिर परिसर में एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाने के निर्देश भी दिए, जिससे दर्शनों के लिए लाइन में खड़े यात्रियों को भगवान आशुतोष के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की जानकारी मिल सके।

उन्होंने कहा कि साढ़े ग्यारह हजार से अधिक फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में इस यात्राकाल में अभी तक 13 लाख श्रद्घालु पहुंच चुके हैं, जो अपने आप में रिकार्ड है। मंदिर के कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा 15 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने केदारनाथ में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रशंसा की। राज्यपाल ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि जिले में ककठिन परिश्रम से अपनी आजिविका में व्यापक रूप से परिवर्तन करने वाले दस लोगों की सफलता की कहानी को वीडियो और फोटाग्राफ के साथ प्रसारित करें, ताकि विश्व पटल पर उन्हें पहचान मिल सके। राज्यपाल ने जिले के सेवानिवृत्त सैनिकों, वीरता पुरस्कार विजेताओं, वीरांगनाओं से भी संवाद किया। कहा कि किसी भी समस्या व शिकायत पर वह जिला सैनिक कल्याण अधिकारी या राजभवन को पत्र लिख सकते हैं। इसके बाद उन्होंने रेडक्रास समिति के सदस्यों से भी बातचीत करते हुए कार्यों की प्रशंसा की। इस मौके पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार, एसपी आयुष अग्रवाल, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, सीएमओ डा. बीके शुक्ला, डीएफओ अभिमन्यु, एडीसी मेजर तरूण कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।


महिला समूहों की भूरी-भूरी प्रशंसा की
रुद्रप्रयाग। गुलाबराय मैदान में विभिन्न विभागों व संस्थाओं के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए राज्यपाल ने स्वयं सहायता समूहों के द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रशंसा की। कहा कि महिलाएं आजिविका के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित किया कि वह अपनी आजिविका को प्रतिमाह एक से डेढ़ लाख तक बढ़ाने के लिए कार्य करें। उन्होंने डिजिटल बैकिंग को लेकर भी स्वयं सहायता समूहों को प्रेरित किया। साथ ही स्वयं सहायता समूहों के साथ फोटो भी खिंचवाई।

सड़क सुविधा के अभाव में 75 वर्षीय बुजर्ग ने अपने बीमार बच्चे को अपनी पीठ पर लादक पहुंचाया अस्पताल।

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उत्तरकाशी – मोरी विकासखंड के बंगाण क्षेत्र में बदहाल सड़के स्थानीय निवासियों की जान पर भारी पड़ रही हैं। आराकोट-चिंवा बालचा मोटर मार्ग बंद होने के कारण एक बीमार युवक को पीठ पर लादकर करीब आठ किलोमीटर पैदल अस्पताल पहुंचाया गया।

वहीं पीएमजीएसवाई के अधिकारियों का कहना है कि मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन जोन विकसित हो गए हैं जिससे मार्ग अक्सर बंद हो रहा है।

आपको बता दें कि मानिया पुत्र दिगड़ू अपने रिश्तेदारों के घर बलावट गया था, शनिवार सुबह मानिया की तबियत बिगड़ गई।

जगह जगह सड़क अवरुद्ध होने के कारण गाड़ी की सुविधा नहीं मिल पाई, वहीं अचानक से शनिवार सुबर मानिया की तबियत बिगड़ गई। रिश्तेदारों ने मानिया को पीठ पर रखकर बलावट गांव से छह किलोमीटर दूर जागटा तक पहुंचाया। जागटा से छोटे वाहन में टिकोची लाए, जहां से मानिया को स्वजन प्राथमिक उपचार के लिए रोहडू हिमाचल प्रदेश लेकर गए।

आराकोट क्षेत्र जनपद उत्तरकाशी का सबसे सुदूरवर्ती क्षेत्र है, संचार और स्वास्थय सुविधाओं के लिए इस क्षेत्र के ग्रामीण हिमाचल प्रदेश पर निर्भर रहते हैं। यहां की सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं होने से ग्रामिणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

केदारनाथ धाम से लगभग 5 से 7 किलोमीटर दूर ऊपरी पहाडि़यों से बीते कुछ दिनों में हिमस्खलन।

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विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम से लगभग 5 से 7 किलोमीटर दूर ऊपरी पहाडि़यों से बीते कुछ दिनों पहले दो बार हिमस्खलन हुआ था, इस हिम स्खलन की वीडियो एवं खबरें तेजी से वायरल भी हुई, हालांकि इससे किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।

जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी नन्दन सिंह रजवार ने बताया कि आज 02 अक्टूबर 22 को एनडीआरएफ बी कंपनी केदारनाथ से कांस्टेबल महेश चंद्र, प्रवीण सिंह टीम के साथ में चोराबाड़ी-सरस्वती ग्लेशियर के लिए रवाना हुए। रेकी टीम ने ग्लेशियर का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि वर्तमान में उक्त ग्लेशियर की स्थिति सामान्य है और उस स्थान में किसी भी प्रकार की झील नहीं बनी है। किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि हिमालय क्षेत्र में छोटे-छोटे हिम स्लखन समय-समय पर होते रहते है। इससे डरने की कोई बात नहीं है।

हेमकुंड साहिब में बर्फबारी जारी, 10 अक्टूबर को बंद होंगे कपाट।

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बड़ी संख्या में सिख तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब पहुंच रहे हैं. इसी बीच हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा साहिब ट्रस्ट(Hemkund Sahib Gurdwara Sahib Trust) ने हेमकुंड साहिब के कपाट बंद करने की तिथि भी घोषित(Hemkund Sahib closing date) कर दी है. इस बार 10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होंगे।

चमोली: हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है. इस साल हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को बंद होंगे. हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा साहिब ट्रस्ट ने ये बात कही है. हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया अक्टूबर माह से धाम में बर्फ़बारी शुरू होने लगती है. जिसके कारण अक्टूबर माह के दूसरे सप्ताह के बीच हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तिथि घोषित कर दी जाती है।

इस वर्ष भी आगामी 10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब के कपाट आम श्रदालुओं के लिए बंद कर दिए जाएंगे। उन्होंने तीर्थयात्रियों से 10 अक्टूबर से पहले मत्था टेकने के लिए हेमकुंड आने वाले श्रदालुओ से अपील की है। अब तक हेमकुंड साहिब मे 2 लाख 18हजार श्रदालु मत्था टेक चुके हैं.
ऊंचाई वाले स्थानों में मौसम खराब होने के बाद लगातार बर्फबारी हो रही है। इस वर्ष 22 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुले थे।

15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब में दो इंच तक बर्फ जमी हुई है। यहां आए यात्री और पर्यटक इस खूबसूरत नजारा को देख अभिभूत हो रहे हैं। ऊंची पहाड़ियों पर बर्फ की सफेद चादर बिछ चुकी है। रात के समय यहां का तापमान शून्य से नीचे पहुंच रहा है। सिख श्रद्धालु कड़ाके की ठंड में ही पवित्र सरोवर में डुबकी लगा रहे हैं।

महामहिम राज्यपाल ने किए बाबा केदारनाथ के दर्शन।

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केदारनाथ के दर्शन कर रुद्रप्रयाग पहुंचे महामहिम ,रुद्रप्रयाग में दिनभर रहेंगे राज्यपाल ।

रुद्रप्रयाग- राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) गुरमीत सिंह ने आज सुबह ग्यारवें जोतिर्लिन भगवान केदारनाथ के दर्शन किए। देश और प्रदेश की खुशहाली के लिए महामहिम ने बाबा केदारनाथ से आशीर्वाद लिया। इस दौरान बदरी-केदार मंदिर समिति ने उन्हें प्रसाद भेंट किया।

राज्यपाल सुबह देहरादून से सीधे केदारनाथ पहुंचे जबकि साढ़े आठ बजे केदारनाथ से रुद्रप्रयाग गुलाबराय मैदान के लिए रवाना हुए। पौने 9 बजे राज्यपाल गुलाबराय मैदान पहुंचे जहां से वे आर्मी कैंट पहुंचे जहां 11 बजे से अफसरों की बैठक लेंगे। राज्यपाल का रुद्रप्रयाग में दिनभर का कार्यक्रम है।

इसके बाद सांय वे बदरीनाथ के लिए रवाना होंगे। राज्यपाल के कार्यक्रम को लेकर रुद्रप्रयाग में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने महामहिम के लिए कार्यक्रम तक सभी अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं।