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Tuesday, September 29, 2026
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गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिये हुए बन्द।

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उत्तरकाशी। माँ गंगा के कपाट गंगोत्री धाम के कपाट आज 12:01 पर बंद हो चुके है. माँ गंगा कि डोली 12:05 पर गंगोत्री धाम से अपने शीतकालीन आवास मुखीमठ के लिए प्रस्थान हो चुकी है. अब श्रद्धालु माँ गंगा के दर्शन मुखीमठ में कर सकेंगे।

 

माँ गंगा कि डोली पदयात्रा करते हुए जांगला से मुखीमठ (मुखवा )में विराजमान होगी. माँ गंगा के दर्शन के लिए पूर्व गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण गंगोत्री धाम पहुंचे. साथ ही भारतीय सेनिको द्वारा सह सम्मान शहित माँ गंगा कि डोली को मुखीमठ (मुखवा )कि और प्रस्थान किया गया।

गंगोत्री धाम के कपाट विधिविधान से अन्नकूट पर्व पर अभिजीत मुहूर्त पर ठीक 12:01 मिनट पर बंद हो चुके है ।गंगोत्री धाम में अब तक 624451 श्रदालु व् यमनोत्री धाम में 485635 श्रद्धालु कर चुके है।

उत्तराखण्ड के चार धामो में गंगोत्री धाम के कपाट आज होंगे बन्द ।

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उत्तराखण्ड के चारो धामो के शीतकालीन कपाट बंद होने की प्रकिया आज से शुरू हो गईं है ।अन्नकूट के महा पर्व पर आज माँ गंगा के कपाट अगले छः माह के लिए बन्द हो जाएंगे । आज दोपहर 12 .01 मिनट पर कपाट विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शीतकाल के लिये बन्द कर दिए जाएंगे । 12:00 बजे मां गंगा की उत्सव डोली आर्मी के बैंड ओर हजारों श्रद्धालुओं के साथ माँ गंगा के जय जय कारों के नारे के साथ शीतकाल के स्थान मुखवा के लिए रवाना होगी । गंगोत्री धाम से मां गंगा की डोली आज विश्राम देवी मंदिर में करेगी। जहां से कल सुबह 27 अक्टूबर को भैयादूज के मौके पर माँ गंगा की उत्सव डोली मुखवा (मुखीमठ) में पहुँचेगी । शीतकालीन में माँ गंगा के दर्शन श्रद्धालु मुखवा में कर सकेंगे । इस वर्ष चारधाम यात्रा में रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालु गंगोत्री धाम पंहुंचे है ।  इस वर्ष तीन मई अक्षय तृतीया के मौके पर चारधाम यात्रा की शुरुआत हुई थी ।

6 राज्यो मार्गो को नेशनल हाइवे बनाने की फाइल केंद्र में अटकी,

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6 राज्यो मार्गो को नेशनल हाइवे बनाने की फाइल केंद्र में अटकी,

बीते दिनों मुख्यमंत्री , केंद्रीय मंत्री से मिलकर लगा चुके है गुहार,

केंद्र सरकार वर्ष 2016 में दे चुकी है सैद्धान्तिक सहमति,

छ राज्यो की है 524 किमी लंबाई,

प्रस्तावित सड़कें —
खैरना – रानीखेत 34 किमी
बुआखल – देवप्रयाग 49 किमी
देवप्रयाग-गजा-खाड़ी 70 किमी
बिहारीगढ़ – रोशनाबाद 33 किमी
पाण्डुखाल-नागचुलाखाल-उफरीखाल-बैजरो 64 किमी
लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-नैनीडांडा-मोहन-रानीखेत 274 किमी

सिंचाई विभाग के कर्मचारियो के लिए आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा,

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सिंचाई विभाग के कर्मचारियो के लिए आवासों पर बाहरी लोगों का कब्जा,

कइयों ने रिटायरमेंट के बाद भी नही छोड़ा आवास,

सिंचाई विभाग के आवासों अन्य विभागों के कर्मचारियों का कब्जा,

यमुना कालोनी स्थित 983 आवासों में से 553 एरिगेशन विभाग के पास, 274 यूजेवीएनएल के पास, 99 राज्य संपन्ति के पास, 30 मामले ऐसे जहां रिटायरमेंट के बाद भी है कब्जा,

664 पदों पर शीघ्र होगी सीएचओ की भर्ती: डॉ0 धन सिंह रावत

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664 पदों पर शीघ्र होगी सीएचओ की भर्ती: डॉ0 धन सिंह रावत

सूबे के सभी वेलनेस सेंटरों पर नियुक्त किये जायेंगे सीएचओ

विभागीय अधिकारियों को दिये जल्द तैनाती के निर्देश

प्रदेशभर में संचालित सभी वैलनेस सेंटरों पर आम लोगों को और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी

वेलनेस सेंटरों पर 664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की होगी तैनाती

स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को दिए निर्देश

शहरी विकास विभाग में 38 अफसरों और कर्मियों के हुए तबादले,

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शहरी विकास विभाग में 38 अफसरों और कर्मियों के हुए तबादले,

36 अधिकारी और कर्मियों के तबादलो पर रोक जारी,

काबीना मन्त्री ने 18 सितंबर को किये थे 74 तबादले,

संसोधन के बाद 74 में से 38 के हुए तबादले,

परिवहन विभाग मे अधिकारियों की हुई पदोन्नति ,

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देहरादून से परिवहन विभाग से बड़ी खबर,

परिवहन विभाग मे अधिकारियों की हुई पदोन्नति ,

संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन के पद पर तैनात राजीव मेहरा को उप परिवहन आयुक्त परिवहन आयुक्त कार्यालय देहरादून भेजा गया ,

द्वारिका प्रसाद सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन देहरादून को संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन अल्मोड़ा बनाया गया,

परिवहन विभाग के अंतर्गत कई स्थानांतरण भी किए गए,

दिनेश चंद्र पठोई को संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन देहरादून से संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन पौड़ी बनाया गया ,

सुनील कुमार शर्मा को संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन देहरादून से संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन देहरादून बनाया गया,

शैलेश तिवारी संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अल्मोड़ा को संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन देहरादून के पद पर भेजा गया ,

अल्मोड़ा में तैनात गुरदेव सिंह को संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन अल्मोड़ा बनाया गया ,

सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी पिथौरागढ़ नवीन कुमार सिंह को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रशासन देहरादून के पद पर भेजा गया ,

बद्रीनाथ धाम के कपाट सूर्यग्रहण सूतक काल के समाप्ति के बाद फिर खुले ।

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पुष्कर नेगी

चमोली।बदरीनाथ धाम के कपाट सूर्यग्रहण सूतक काल के समाप्ति के बाद खुले,

ठीक 5 बजकर 32 मिनट पर खुले बदरीनाथ मन्दिर के कपाट,जोशीमठ के नृसिंह नव दुर्गा मंदिर,वासुदेव मन्दिर, लक्ष्मी नारायण मन्दिर, त्रिपुरा सुंदरी माता मन्दिर के कपाट भी खुले,
विधि विधान पूर्वक मन्दिर की साफ सफाई ओर शुद्धिकरण प्रक्रिया के बाद खुले बदरीनाथ धाम के कपाट, आज सुबह ब्रह्मा मुहूर्त में प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर ग्रहण सूतक काल शुरू होने पर बन्द हो गए थे बदरीनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों के कपाट,

सिंह द्वार पर जय बदरी विशाल के उद्घोष के बाद आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए बद्रीनाथ मन्दिर के कपाट, तीर्थयात्री तन्मयता के साथ कर रहे है भगवान बदरी विशाल के दर्शन पूजन,
कब क्या हुआ,,,,,,,,
सुबह 2 बजकर 30 मिनट पर खुले कपाट,
सुबह 3 बजे भगवान बदरी विशाल का अभिषेक प्रारंभ हुआ.
सुबह 4.15 बजे तक अभिषेक पूजा व बालभोग के बाद मंदिर बंद हुआ
शाम 5.32 के बाद मंदिर खुला शुद्धिकरण सफाई की प्रक्रिया के बाद 6.15 बजे के शाम को ग्रहणान्त अभिषेक पूजा हुई
रात्रि 9 बजकर 30 मिनट पर शयन आरती के बाद होंगे नियमित बन्द।

ईगास पर्व पर सार्वजनिक अवकाश की सीएम धामी ने की घोषणा ।

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उत्तराखण्ड के लोकपर्व ईगास-बग्वाल/ बूढ़ी दीपावली को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अवकाश की घोषणा की है। यह दूसरा मौक़ा होगा जब उत्तराखण्ड में लोकपर्व ईगास को लेकर अवकाश घोषित किया गया हो, इससे पूर्व पिछले वर्ष भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा ईगास बग्वाल की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईगास बग्वाल उत्तराखण्ड वासियों के लिए एक विशेष स्थान रखती है, हम सब का प्रयास होना चाहिए कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को जीवित रखें।

ज्ञात हो कि सदियों से गढ़वाल में दीपावली को बग्वाल के रूप में मनाया जाता है। जबकि दीपावली (बग्वाल) के ठीक 11 दिन बाद गढ़वाल में एक और दीपावली मनायी जाती है, जिसे ईगास कहा जाता है। वहीं कुमाऊं के क्षेत्र में इसे बूढ़ी दीपावली कहा जाता है। ईगास पर्व दीपावली से 11 दिन बाद आने वाली एकादशी को मनाया जाता है। इस पर्व के दिन सुबह मीठे पकवान बनाये जाते हैं जबकि रात में स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा अर्चना के बाद भैला जलाकर उसे घुमाया जाता है और ढोल नगाड़ों के साथ आग के चारों ओर लोक नृत्य किया जाता है। दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

एक पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान राम 14 वर्ष बाद लंका विजय कर अयोध्या पहुंचे तो लोगों ने दिये जलाकर उनका स्वागत किया और उसे दीपावली के त्योहार के रूप में मनाया। लेकिन कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में लोगों को इसकी जानकारी 11 दिन बाद मिली। इसलिए यहां पर दीपावली के 11 दिन बाद यह दीवाली (इगास) मनाई जाती है।

वहीं दूसरी और सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार गढ़वाल के वीर भड़ माधो सिंह भंडारी टिहरी के राजा महीपति शाह की सेना के सेनापति थे। करीब 400 साल पहले राजा ने माधो सिंह को सेना लेकर तिब्बत से युद्ध करने के लिए भेजा। इसी बीच बग्वाल (दीपावली) का त्यौहार भी था, परन्तु इस त्यौहार तक कोई भी सैनिक वापिस ना आ सका। सबने सोचा माधो सिंह और उनके सैनिक युद्ध में शहीद हो गए, इसलिए किसी ने भी दीपावली (बग्वाल) नहीं मनाई। परन्तु दीपावली के ठीक 11वें दिन माधो सिंह भंडारी अपने सैनिकों के साथ तिब्बत से दवापाघाट युद्ध जीत वापिस लौट आए।

कहा जाता है कि युद्ध जीतने और सैनिकों के घर पहुंचने की खुशी में उस समय दिवाली मनाई थी। उस दिन एकादशी होने के कारण इस पर्व को इगास नाम दिया गया और उसी दिन से गढ़वाल क्षेत्र में दीपावली के 11 दिन बाद इगास पर्व मनाया जाता है। इगास पर्व के दिन लोग घरों की लिपाई-पुताई कर पारम्परिक पकवान बनाते है। गाय-बैलों की पूजा की जाती और रात को पूरे उत्साह के साथ गाँव में एक जगह इकठ्ठे होकर भैलो खेलते। भैलो का मतलब एक रस्सी से है, जो पेड़ों की छाल से बनी होती है। इगास-बग्वाल के दिन लोग रस्सी के दोनों कोनों में आग लगा देते हैं और फिर रस्सी को घुमाते हुए भैलो खेलते हैं।

ईगास बग्वाल के दिन भैला खेलने का विशेष महत्व है। यह चीड़ की लीसायुक्त लकड़ी से बनाया जाता है। यह लकड़ी बहुत ज्वलनशील होती है। इसे दली या छिल्ला कहा जाता है। जहां चीड़ के जंगल न हों वहां लोग देवदार, भीमल या हींसर की लकड़ी आदि से भी भैलो बनाते हैं। इन लकड़ियों के छोटे-छोटे टुकड़ों को एक साथ रस्सी अथवा जंगली बेलों से बांधा जाता है। फिर इसे जला कर घुमाते हैं। इसे ही भैला खेलना कहा जाता है।

श्री बदरीनाथ धाम ,श्री केदारनाथ धाम सहित चारधाम के छोटे बड़े मंदिर आज सूर्यग्रहण के दौरान बंद रहेंगे।

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•श्री बदरीनाथ धाम 25 अक्टूबर।

मंदिर खुला 2.30 बजे।
प्रात: अभिषेक 3 बजे।
मंदिर बंद हुआ प्रात: 4 बजकर 15 मिनट पर

शाम को मंदिर खुलेगा 5 बजकर 32 मिनट पर
रात्रि को शुद्धिकरण अभिषेक
शाम 6 बजकर 15 मिनट पर।

शयन आरती के बाद रात्रि को मंदिर बंद होगा 9.30 बजे लगभग।

•श्री केदारनाथ धाम

• रात्रि महामृत्युंजय पाठ/ अभिषेक 24 अक्टूबर रात्रि 10 बजे।

• मंदिर खुला 25 अक्टूबर प्रात: 3 बजे
4 बजे प्रात: तक देव दर्शन।बालभोग चढाया गया।

• प्रात: 4 15 मंदिर के कपाट बंद हो गये।

• शाम 5 बजकर 32 मिनट पर मंदिर खुलेगा।
साफ सफाई, शुद्धिकरण हवन के बाद 7 बजे भगवान का अभिषेक श्रृंगार, शयन आरती के बाद 8.30 बजे शायंकाल को
श्री केदारनाथ मंदिर बंद हो जायेगा।

• श्री गंगोत्री एवं श्री यमुनोत्री मंदिर समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार मंदिर ग्रहणकाल में आज बंद रहेंगे।

• चारधाम के सभी छोटे-बड़े मंदिर ग्रहणकाल के अनुसार आज बंद हैं।
• ग्रहण की समाप्ति शायंकाल 5 बजकर 32 मिनट के बाद सभी मंदिरों के कपाट खुलेंगे। हवन शूद्धिकरण के पश्चात अभिषेक-शयन पूजायें होंगी