देहरादून। उत्तराखंड की खाली होने जा रही राज्यसभा सीट को लेकर भाजपा हाईकमान ने ऐसा फैसला लिया, जिसने प्रदेश की सियासत में चल रही तमाम अटकलों पर एक झटके में विराम लगा दिया। पार्टी ने तमाम चर्चित नामों को पीछे छोड़ते हुए नैनीताल के दिनेश आर्य को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने रविवार को उनके नाम पर मुहर लगाई।
राज्यसभा की एक सीट के लिए भाजपा के भीतर लंबे समय से कई नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के नाम भी चर्चा में थे, लेकिन हाईकमान ने आखिरकार संगठन की जमीन से जुड़े दिनेश आर्य पर भरोसा जताकर राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से चर्चा में ला दिया।

‘आखिरी पंक्ति’ से राज्यसभा तक पहुंचने का संदेश
दिनेश आर्य भाजपा संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और नैनीताल भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। वह राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष तथा मुख्यमंत्री के जनसंपर्क अधिकारी जैसे दायित्व भी संभाल चुके हैं।
भाजपा के भीतर इस फैसले को संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यानी पार्टी में लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने वाला कार्यकर्ता भी शीर्ष संवैधानिक संस्था तक पहुंच सकता है।
गढ़वाल बनाम कुमाऊं की चर्चाओं के बीच बदला समीकरण
राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर जिस तरह वरिष्ठ और बड़े राजनीतिक चेहरों के नामों की चर्चा चल रही थी, उसके बीच दिनेश आर्य का नाम सामने आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। हाईकमान के इस फैसले ने साफ कर दिया कि अंतिम टिकट तय करते समय केवल वरिष्ठता ही निर्णायक नहीं रही।
अब दिनेश आर्य के नाम के साथ उत्तराखंड की राजनीति में कुमाऊं प्रतिनिधित्व, संगठनात्मक पृष्ठभूमि और सामाजिक समीकरण भी चर्चा के केंद्र में हैं।
भाजपा की ओर से आर्य को उम्मीदवार बनाए जाने पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें बधाई दी है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होना प्रस्तावित है।








