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Monday, July 6, 2026
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कर्तव्यपथ पर अपने जीवन को बलिदान देने वाले पुलिस कर्मियों को शत शत नमन।

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  • जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस ने शहीद  पुलिस जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए किया याद*पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग के निर्देशन में व पुलिस उपाधीक्षक ऑपरेशन्स की उपस्थिति में “पुलिस स्मृति दिवस” के अवसर पर आज  21 अक्टूबर, 2023 को रिजर्व पुलिस रतूड़ा के शहीद स्मृति स्थल पर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुये जवानों की स्मृति मे श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
    जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस परिवार द्वारा इस अवसर पर राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए शहीद हुये पुलिस एवं अर्द्धसैनिक बलों के जवानों को याद कर उनको शत्-शत् नमन किया गया।
    गत वर्ष 01 सितंबर 2022 से इस वर्ष 31 अगस्त 2023 तक भारत देश में अब तक कुल 189 पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के अधिकारी/कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए हैं। जिसमे हमारे राज्य से उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए जवानों के नाम एवं उनकी वीरता को पढ़कर सुनाया गया। उत्तराखण्ड पुलिस के निम्न जवान कर्तव्य की वेदी पर अपना सर्वस्व न्यौछावर किये हुए हैं-
    1. उप निरीक्षक नागरिक पुलिस श्री प्रदीप सिंह रावत, जनपद चमोली
    2. आरक्षी 573 ना. पु. श्री चमन सिंह तोमर, जनपद उत्तरकाशी
    3. आरक्षी 153 ना.पु. श्री जवाहर सिंह, जनपद हरिद्वार
    4. आरक्षी 639 ना.पु. श्री लक्ष्मण सिंह जनपद उधम सिंह नगर

तदोपरान्त जनपद पुलिस कार्मिकों द्वारा पुलिस शहीद स्मारक पर वीरगति को प्राप्त हुये जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गयी।

*पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास :-* 21अक्टूबर 1959 का दिन था, लद्दाख के हॉट-स्प्रिंग के पास CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) की पेट्रोलिंग पार्टी के तीन ऑफिसर्स को भारत-तिब्बत बॉर्डर पर चीनी सैनिकों ने अपनी हिरासत में ले लिया, अगले दिन जब उनकी तलाश में सीआरपीएफ की टीमें गई तो उन पर पहले से घात लगाकर बैठे चीनी सैनिकों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी । सीआरपीएफ के जवानों ने भी उस हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन उस अचानक हुए हमले में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए तथा सात अन्य जवान घायल हो गए, उसी दिन से उन 10 वीर सीआरपीएफ जवानों की शहादत को याद करते हुए प्रत्येक वर्ष संपूर्ण भारतवर्ष में अपने कर्तव्य पथ पर प्राणों की आहुति देने वाले शहीद पुलिस कर्मियों को श्रद्धान्जलि अर्पित करने हेतु 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

रुद्रप्रयाग नगर पालिका के 6 नाराज सभासदों ने सौंपा डीएम को इस्तीफा

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रुद्रप्रयाग नपा के छह नाराज सभासदों ने सौंपा डीएम को इस्तीफा
में विरोध लेकिन इस्तीफा कार्यकाल समाप्ति की और के समनपाय ही क्यों,आखिर क्यों?

रुद्रप्रयाग। नगर पालिका रुद्रप्रयाग में बीते छह महीने से बोर्ड बैठक न कराने सहित अन्य कई मांगों से नाराज छह सभासदों ने देर सांय अपना इस्तीफा जिलाधिकारी को सौंप दिया। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि इस्तीफा स्वीकार किया गया या नहीं। इधर, नगर पालिका अध्यक्ष का कहना है कि बोर्ड बैठक बुलाई गई थी किंतु सभासदों ने चर्चा के बजाय विरोध किया।

शासन-प्रशासन के साथ ही नपा अध्यक्ष पर लगाया बोर्ड बैठक न कराने का आरोप

रुद्रप्रयाग नगर पालिका में 7 निर्वाचित सभासद है। छह सभासद बीते कई समय से नगर पालिका अध्यक्ष से बोर्ड बैठक न बुलाने और उनके क्षेत्र में विकास कार्य न कराने, बजट को निर्माण कार्यो पर खर्च न करने सहित अन्य मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं। इसके लिए कई बार सभासद नगर पालिका में भी विरोध दर्ज कर चुके हैं। शुक्रवार को दोपहर में नगर पालिका की बोर्ड बैठक बुलाई गई किंतु इसमें भी गरमा गरम बहस हुई। सभासदों ने बताया कि नपा अध्यक्ष बोर्ड बैठक के बीच में ही चली गई जिससे छह सभासद जिलाधिकारी को अपना इस्तीफा सौंपने कलक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी को दिए इस्तीफे में सभासदों ने कहा कि छह महीने से बोर्ड बैठक होने और अध्यक्ष के बोर्ड बैठक में छोड़कर चले जाने के कारण इस्तीफा दिया गया है। कहा कि पूर्व में कई बार पत्र के माध्यम से अधिशासी अधिकारी व अध्यक्ष नपा को बोर्ड बैठक कराने के लिए लिखित रूप में अवगत किया गया, किंतु फिर भी बोर्ड बैठक न होने पर सभासदों ने नगर पालिका कार्यलय पर धरना दिया गया जिसके बाद 20 अक्तूबर आज बोर्ड बैठक कराए जाने का निर्णय लिया गया किंतु अध्यक्ष द्वारा बोर्ड बैठक में बिना चर्चा छोड़कर चले जाने से साफ प्रतीत हो रहा है कि उनका जन समस्या व जनता के हितों से कोई वास्ता नहीं है।

अध्यक्ष पर लगाया बोर्ड बैठक में बीच में छोड़कर चले जाने का आरोप

कहा कि वे नगर पालिका अधिनियम का उल्लखन कर रहे है। नगर पालिका अधिनियम में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक माह में बोर्ड बैठक की जानी अनिवार्य है। बोर्ड बैठक न होने से समस्त सभासद जनता से जुड़े मुददों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। इधर, नगर पालिका अध्यक्ष गीता झिंक्वाण ने बताया कि सभासदों को शुक्रवार आज बोर्ड बैठक में बुलाया गया था किंतु उन्होंने विरोध के बजाय कोई सकारात्मक चर्चा नहीं की जिससे इसका कोई लाभ नही हुआ। इस्तीफा देने वाले सभासदों में लक्ष्मण कप्रवान, संतोष रावत, सुरेंद्र रावत, अमरा देवी, रुकमणि भंडारी, उमा देवी शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर नगर पालिका के कार्यकाल को अब महज डेढ़ महीना करीब रह गया है। ऐसे में सभासदों के इस्तीफे से नपा के क्रियाकलापों पर ज्यादा असर पड़ने वाला नहीं है। सरकार द्वारा यदि नपा चुनाव लोकसभा चुनाव के बाद कराया गया तो यह भी निश्चित है कि नपा के कार्यकाल समाप्त होते ही प्रशासक अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठ सकते हैं।

केदारनाथ यात्रा में चोर गिरोह भी हो रखा सक्रिय ।

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रुद्रप्रयाग – विश्व विख्यात केदारनाथ धाम की यात्रा दिनों अपने चरम पर है. ऐसे में यात्रा पड़ावों में चोर भी सक्रिय हो गए हैं. ये चोर लाइन में लगे यात्रियों और यात्रा पड़ावों में लगे टेंटों को ब्लेड से काटकर मोबाइल चोरी कर रहे हैं. मोबाइल चोरी की घटनाओं पर पुलिस भी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है. यात्रा पड़ावों में हो रही चोरी की घटनाओं से देवभूमि भी शर्मशार हो रही है.बता दें कि केदारनाथ यात्रा के शुरूआती पड़ाव से ही चोर तीर्थयात्रियों को लूटना शुरू कर रहे हैं. यात्रा पड़ाव के सोनप्रयाग में शटल सेवा वाहन को लेकर तीर्थयात्रियों की लंबी कतार लगी रहती है. जबकि, यहीं से यात्रियों को केदारनाथ धाम के लिए छोड़ा जाता है. यहां पर पुलिस का बैरियर भी लगा है. साथ ही यहीं पर यात्रियों के रजिस्ट्रेशन भी होते हैं. ऐसे में चोर केदारनाथ यात्रा के अहम पड़ाव सोनप्रयाग से ही मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं.
बताया ये भी जा रहा है कि केदारनाथ यात्रा के शुरू होने से अब तक यात्रियों के सैकड़ों मोबाइल चोरी हो गए हैं. जिनकी शिकायतें राजस्व उप निरीक्षक से लेकर पुलिस से की गई है, लेकिन राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन यात्रियों के मोबाइल ढूंढने में लापरवाही दिखा रहा है. जिस कारण मोबाइल चोर सक्रिय होकर घूम रहे हैं.
यात्रा पड़ाव के सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक मोबाइल चोर सक्रिय होकर घूम रहे हैं, जिन पर पुलिस की कोई नजर नहीं है. ऐसे में ये बेस कैंप, छानी कैंप और केदारनाथ धाम में टेंट लगाकर रोजगार कर रहे टेंट संचालकों के टेंटों में रात्रि के समय यात्रियों के मोबाइल चोरी कर रहे हैं.
केदारनाथ में जीएमवीएन के स्वागत मैनेजर एमएस फर्स्वाण ने बताया कि केदारनाथ यात्रा पड़ावों में मोबाइल चोर सिरदर्द बने हुए हैं. ये चोर रात के समय टेंटों को ब्लेड से काटकर मोबाइल चोरी कर रहे हैं।
केदारनाथ धाम में प्राइवेट टेंटों को काटकर चोरों ने फोन चोरी किए. जबकि, ललित राम दास महाराज के आश्रम में भी मोबाइल चोरी की घटनाएं सामने आई हैं. केदारनाथ धाम में आपदा के बाद से रह रहे बाबा ललित राम दास महाराज ने बताया कि इस प्रकार के अनैतिक कार्य से पूरी देवभूमि बदनाम हो रही है. चोरी की घटना की शिकायत राजस्व उप निरीक्षक केदारनाथ से की गई है.
वहीं पुलिस अधीक्षक, रुद्रप्रयाग विशाखा भदाणे ने कहा कि
केदारनाथ यात्रा पड़ावों में मोबाइल चोरी की शिकायत पर त्वरित एक्शन लेकर चोरी हुए मोबाइलों की ढूंढखोज की जा रही है. साथ ही चोरों को भी पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

महान सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत की कहानी।

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पिथौरागढ़ / मुनस्यारी।

19 वीं शताब्दी के महान अन्वेषक पंडित नैन सिंह रावत कि आज जयंती है। अपनी जान को जोखिम में डालकर पंडित नैन सिंह रावत ने तिब्बत का सर्वे कर दुनिया को तिब्बत के बारे में जानने का अवसर दिया। पंडित नैन सिंह रावत के अन्वेषण तक तिब्बत के बारे में कोई भी बाहर वाला किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं रखता था। 21 अक्टूबर 1830 को पैदा हुए पंडित रावत ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। भारत सरकार ने पंडित के नाम पर डाक टिकट जारी कर उन्हें सम्मान दिया।
पंडित में सिंह रावत के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी देने के लिए इस इस वर्ष से मुनस्यारी में उनकी जयंती मनाई जा रही है।
19वीं शताब्दी में पैदा हुए महान अन्वेषकों में से पंडित नैन सिंह रावत का नाम एक है।
इनके अन्वेषण की ख्याति को देखते हुए इन्हें “द पंडित” के नाम से संबोधित किया गया। परतंत्र भारतीय मूल के प्रथम व्यक्ति थे, जिन्हें
भू- वैज्ञानिक कार्य के लिए रॉयल ज्योग्रेफिकल सोसाइटी द्वारा उन्हें प्रथम विक्टोरिया पदक से विभूषित भी किया गया।
विकासखंड मुनस्यारी के ग्राम पंचायत बसंतकोट के भटकूड़ा गांव में 21 अक्टूबर 1830 को पंडित नैन सिंह रावत का जन्म हुआ।
इनके पिताजी का नाम लाटा था। पंडित नैन सिंह रावत के चचेरे भाई मान सिंह रावत ने भी इनके साथ अन्वेषण का कार्य किया।
कुशाग्र बुद्धि के होने के कारण पंडित बंधुओ ने 1855 से 1856 में श्लाघ इट वाइट बांधुओं के साथ दुभाषिये और सर्वेक्षक के रूप में तुर्किस्तान की यात्रा की।
तिब्बती भाषा का ज्ञान तथा कार्य कुशलता से प्रभावित होकर जर्मन बंधु उन्हें अपने साथ यूरोप ले जाना चाहते थे, लेकिन पहाड़ से प्रेम तथा चचेरे भाई मान सिंह रावत के विरोध के कारण दोनों भाइयों को रावलपिंडी से वापस लौटना पड़ा।
सन 1863 में इन्हें चचेरा भाई मान सिंह रावत के साथ देहरादून बुलाया गया।
सुपरिटेंडेंट कर्नल जे.टी. वाकर तथा ग्रेट ट्रिगोनोमैट्रिकल सर्वे में एक अन्वेषण के रूप में नियुक्ति किया गया।
भारतीय सीमा के बाहरी क्षेत्र में कार्य करने के लिए पंडित बंधुओ को टोपोग्रेफिकल आवजर्वेशन का प्रशिक्षण कार्य दिया गया।
तिब्बत की भौगोलिक स्थिति का ज्ञान बाहर वालों को नहीं था।
यूरोपीय जगत को तिब्बत में प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण मार्च 1865 को दोनों पंडित बंधुओ को नेपाल होते हुए लहासा के सर्वेक्षण हेतु भेजा गया।
पंडित के चचेरे भाई मान सिंह रावत को मध्य में ही अपनी यात्रा स्थगित कर स्वदेश लौटना पड़ा, लेकिन पंडित नैन सिंह रावत ने एक लद्दाखी की वेश में दावा नमग्यल के नाम से नौकर बनकर तिब्बत में प्रवेश करने पर सफल हो गया।
बुशहरी का वेश बनाकर लद्दाख के व्यापारी ल्होपच्याक के साथ 29 अक्टूबर 1865 को शिगात्से पहुंचे। केवल लद्दाखी और बुशहरी ही स्वतंत्र रूप से संपूर्ण तिब्बत में आवागमन कर सकते थे।
शिगात्से में पंडित नैन सिंह रावत टासी लाम्बो गोम्पा के रिंपोचे पंचेम लामा के दर्शन करने गये।उन्हें यह आशंका थी कि यह पवित्र पुरुष उनके गुप्त रहस्य को जान लेगा। परंतु यह जानकर आश्चर्य हुए कि पवित्र पद पर मात्र 11 वर्षीय बालक पदासीन है, जो प्रत्येक दर्शनार्थियों को प्राय: केवल एक ही प्रकार के तीन प्रश्न पूछ रहा है।
शिगात्से में दो माह तक सर्वेक्षण कार्य करने के पश्चात 25 दिसंबर को हुए एक औद्योगिक नगर ग्यानत्से पहुंचे। 10 जनवरी 1866 को पंडित नैन सिंह ने ल्हासा पहुंचकर दो कमरे का एक मकान किराए पर लिया। उसके बाद आवजर्वेशन का कार्य प्रारंभ किया।
100 दिन तक ल्हासा में रहकर वहां की भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति का अध्ययन करने की पश्चात उसी लद्दाखी व्यापारी के साथ ल्हास लद्दाख मार्ग का सर्वेक्षण करते हुए त्रादाम पहुंचे।
मार्ग व्यय की कमी के कारण उन्हें अपनी घड़ी भी बेचनी पड़ी।
21 जून 1866 को ऊंटा धुरा पार कर पंडित नैन सिंह रावत मिलम गांव पहुंचे और यहां से देहरादून वापस चले गए।
पंडित नैन सिंह रावत ने अपनी इस यात्रा द्वारा काठमांडू- ल्हास- मानसरोवर तक की 1200 मील लंबी दूरी का सर्वेक्षण तथा 21 स्थानों पर अक्षांश और 33 स्थान की समुद्र तल से ऊंचाई ज्ञात कर विश्व के लिए ऐतिहासिक कार्य किया।
साथ ही उन क्षेत्रों की रोचक तथा ज्ञानवर्धक वर्णन अपनी डायरी में अंकित किया।
संपूर्ण तथ्यों का सारांश कर्नल मान्टोगोमरी द्वारा सोसाइटी के जनरल में 38 वें खंड में किया गया है। इनकी इस महान यात्रा से प्राप्त उपलब्धियां के उपलक्ष में 1868 में सोसाइटी ने उन्हें एक स्वर्ण घड़ी घड़ी प्रदान की।
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मुनस्यारी।
जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने बताया कि पहली बार पंडित नैन सिंह रावत की मातृभूमि मुनस्यारी में उनकी जयंती मनाई जा रही है।
उन्होंने पंडित नैन सिंह के जन्म स्थान भटकूड़ा गांव में एक स्मारक तथा संग्रहालय बनाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर को उत्तराखंड में राजकीय दिवस घोषित करते हुए प्रत्येक सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों में पंडित नैन सिंह रावत की जयंती मनाई जाने का आदेश जारी करने के लिए सरकार से बातचीत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पंडित नैन सिंह रावत के बारे में जानकारी रखे। इसके लिए प्रतिवर्ष उनकी जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में विभिन्न विभागों द्वारा नाबार्ड से ऋण के लक्ष्यों के सम्बन्ध में समीक्षा की।

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देहरादून

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में विभिन्न विभागों द्वारा नाबार्ड से ऋण के लक्ष्यों के सम्बन्ध में समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्वीकृत प्रस्तावों के सापेक्ष विभागों द्वारा डिस्बर्शमेंट की प्रगति संतोषजनक नहीं है।

सभी विभागों को इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने नाबार्ड को भी प्रस्तावों की स्वीकृति में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के सचिवों एवं विभागाध्यक्षों को ऋण वितरण एवं अदायगियों में तेजी लाने के लिए साप्ताहिक समीक्षाएं किए जाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि विभागों को वितरण और अदायगियों में आ रही समस्याओं का निवारण कर शीघ्र कार्यों को पूर्ण किया जाए।

उन्होंने विभागीय सचिवों को आरआईडीएफ के अंतर्गत प्रस्तावों को विभागीय कैलेंडर से जोड़ते हुए स्वीकृति से लेकर डिस्बर्शमेंट तक निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराया जाए।

उन्होंने प्रोजेक्ट कम्प्लीशन रिपोर्ट्स भी शीघ्र जमा कराए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अच्छे प्रस्ताव लगातार तैयार कर प्रस्ताव वित्त को भेजे जाने के साथ ही डीपीआर नाबार्ड को भी भेज दी जाए, ताकि समय पर नाबार्ड की भी संस्तुति मिल सके।

उन्होंने प्रत्येक सप्ताह और पाक्षिक रूप से प्रस्तावों की लगातार मॉनिटरिंग किए जाने के निर्देश दिए।

उन्होंने पीएम गति शक्ति उत्तराखण्ड पोर्टल पर भी लगातार अपडेट किए जाने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि नाबार्ड से लिए जाने वाले 1090 करोड़ के ऋण के लक्ष्य के सापेक्ष विभागों ने 907.93 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को भेज दिए हैं, नाबार्ड ने 501.20 करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। शेष प्रस्तावों का परीक्षण प्रगति पर है।

उन्होंने बताया कि 900 करोड़ के डिस्बर्शमेंट के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक विभागों द्वारा मात्र 273.82 करोड़ का डिस्बर्शमेंट किया गया है।

फर्जी रजिस्ट्री घोटाले के मुख्य आरोपी केपी सिंह की जेल में मौत ।

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  1.  बिग ब्रेकिंग

फर्जी रजिस्ट्री घोटाले के मुख्य आरोपी की जेल में मौत

केपी सिंह ने सहारनपुर जेल में ली आखिरी सांसे

फर्जी रजिस्ट्री में करोड़ों रुपए का हुआ था घोटाला

केपी सिंह के पास घोटाला संबंधित थी कई जानकारी

दून पुलिस ने की केपी सिंह की मौत की पुष्टि

हृदय रुकने के कारण हुई मौत

केपी सिंह सहारनपुर में रखे देहरादून के रिकॉर्ड में अधिवक्ता विरमानी व इमरान के साथ मिलकर करता था घपला

वकील विरमानी व इमरान समेटेक दर्जन से अधिक लोगों के साथ है जेल में बंद

केपी सिंह की पत्नी भी जेल में है बंद

सफेदपोश के नाम आने से पहले मुख्य आरोपी की मौत बनी सनसनी

आज की बड़ी खबर ,48 खनन पट्टों को लेकर निकल गए टेंडर पर हाईकोर्ट ने दिए निर्देश,

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नैनीताल

नैनीताल हाई कोर्ट से आज की बड़ी खबर,

खनन विभाग के आदेश को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा निर्णय,

48 खनन पट्टों को लेकर निकल गए टेंडर पर हाईकोर्ट ने दिए निर्देश,

हाई कोर्ट के द्वारा खनन पट्टों की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने के दिए गए आदेश,

खनन विभाग के द्वारा 48 पट्टों पर निकल गए थे खनन के लिए टेंडर,

खनन विभाग के इस आदेश को दी गई थी हाई कोर्ट में चुनौती,

कोर्ट ने कहा इस मामले में पर्यावरणीय प्रभाव कि नहीं ली गई थी अनुमति,

मामले में अगले सनी 27 दिसंबर को होगी,

पहाड़ो में जंगली जानवरों के हमले नही हो रहे है कम,देवप्रयाग में 56 वर्षीय महिला पर भालू ने किया हमला।

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भालू के हमले के घायल महिला को दिया तत्परता से ट्रीटमेंट

न्यूरो संबंधी केस को देखते हुए महिला को किया एयर लिफ्ट

विधायक विनोद कंडारी ने हेलीकाप्टर की व्यवस्था कर महिला को पहुंचा एम्स ऋषिकेश

श्रीनगर गढ़वाल.

उत्तराखंड के देवप्रयाग विधानसभा स्थित हिंडोलाखाल क्षेत्र के बिटूला गांव की 56 वर्षीय महिला सुधा देवी उम्र 56 साल पर भालू ने हमला कर दिया, भालू ने महिला के सिर से लेकर गर्दन के पास गंभीर रूप से नोंच लिया. परिजन व कीर्तिनगर प्रशासन किसी तरह से महिला को बेस चिकित्सालय लाए, जहां बेस अस्पताल के सर्जरी विभाग के डॉक्टर हरि सिंह ने तत्काल महिला का ट्रटीमेंट किया। 50 से अधिक टांगे महिला पर लगाये गये है। महिला की हालत स्थिर करने के बाद न्यूरो संबंधी केस को देखते हुए परिजन एम्स ऋषिकेश के लिए ले गये। विधायक विनोद कंडारी ने महिला को तत्काल इलाज मिले इसके लिए एयर लिफ्ट की व्यवस्था कराई और महिला को एम्स ऋषिकेश में पहुंचकर भर्ती कराया। परिजनों ने बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों द्वारा तत्काल इलाज करने तथा विधायक विनोद कंडारी द्वारा एयरलिफ्ट की व्यवस्था करने पर आभार जताया।
बेस अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजेय विक्रम सिंह ने भी इमरजेंसी विभाग में पहुंचकर मरीज को दी जानी वाली जरूरी आवश्यकता को तत्काल पूरा कराया। सर्जरी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. हरि सिंह ने बताया कि महिला के सिर से पूरी खाल उतरी हुई थी, जबकि आंख पर गहरे घाव तथा गले तक नोंचा गया था, जिस पर तत्काल ट्रीटमेंट दिया गया। 50 से अधिक टांगे लगाये गये। जबकि महिला के छाती पर भी भालू ने घाव किये थे। महिला पहले से बेहतर होने पर न्यूरो सर्जन की आवश्यकता को देखते हुए परिजन एम्स ऋषिकेश ले गये। एम्बुलेंस से देर होने पर मनमोहन सिंह ने एयरलिफ्ट कराने की बात कहने पर भाजपा जिला मंत्री नरेन्द्र कुंवर ने विधायक विनोद कंडारी से बात कर जल्द एयरलिफ्ट की कार्यवाही हो पायी।
हिंडोलाखाल क्षेत्र की महिला पर भालू के हमले की खबर लगते ही विधायक विनोद कंडारी ने महिला को एम्स ऋषिकेश के लिए हेलीकाप्टर की व्यवस्था कराई और हेलीकाप्टर आने पर महिला को स्वीत जीवीके हेलीपेड से एयरलिफ्ट कराकर एम्स ऋषिकेश ले जाया गया। विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि हेलीकाप्टर की सेवा उपलब्ध कराने के लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी सहित तमाम अधिकारियों का आभार प्रकट किया। जबकि महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाने पर कीर्तिनगर एसडीएम सहित महिला को तत्काल उपचार देने वाले बेस चिकित्सालय के डॉक्टरों का आभार प्रकट किया। महिला के पति सोहन लाल रतूड़ी ने बताया कि सुबह साढ़े दस बजे के करीब जंगल में बकरियों के साथ गयी थी, तो इसी दौरान भालू ने हमला किया था, आस-पास के लोगों द्वारा हल्ला करने पर भालू फरार हुआ। उन्होंने श्रीनगर बेस अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा तत्काल उपचार देकर खतरे से उभारने पर आभार प्रकट किया। जबकि विधायक विनोद कंडारी द्वारा हेलीकाप्टर की सुविधा कराने तथा एम्स में मौके पर मौजूद रहकर उपचार की कार्यवाही करने पर आभार प्रकट किया।

चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के शीतकालीन कपाट विधि विधान के साथ हुए बंद।

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गोपेश्वर। पंचकेदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट विधि विधान से शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। भगवान रुद्रनाथ की जयकारों के साथ उत्सव डोली गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई। बीते दो दिनों से हुई बर्फबारी के बाद आज धूप खिली है जिससे धाम में मौसम सुहाना बना हुआ है। वहीं श्रद्धालुओं को भी मौसम की दुश्वारियों का सामना नहीं करना पड़ा।

शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी

बुधवार को उच्च हिमालय में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट विधि विधान से सुबह 8:00 बजे शीतकाल के लिए बंद किए गए। सुबह कपाट बंद होने के बाद बाबा की उत्सव डोली यात्रा ने रात्रि विश्राम के लिए मोली खर्क के लिए प्रस्थान किया। 19 अक्टूबर को डोली सगर गांव होते हुए गंगोल गांव और 20 अक्टूबर को शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।

चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम की यात्रा सबसे दुर्गम मानी जाती है

चमोली जिले में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम की यात्रा सबसे दुर्गम मानी जाती है। यहां पहुंचने के लिए सगर गांव से 19 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। सगर जिला मुख्यालय गोपेश्वर से तीन किमी की दूरी पर है।

अगले माह बंद हो जाएंगे चारों धामों के कपाट

वहींं 24 अक्तूबर को दशहरा के दिन बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने के शुभ मुहूर्त की घोषणा की जाएगी। जबकि 15 नवंबर को भैया दूज के दिन केदारनाथ धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होंगे। गंगोत्री मंदिर समिति ने 14 नवंबर को गंगोत्री धाम के कपाट बंद करने की तिथि तय कर दी है।

विधायक भरत चौधरी ने किया ₹7.15 करोड़ की लागत से सड़कों के डामरीकरण के कार्यों का शुभारंभ। राज्य योजना के तहत स्वीकृत 3 सड़क मार्गों का होगा डामरीकरण।

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रुद्रप्रयाग//
जखोली विकास खण्ड में राज्य योजना के तहत स्वीकृत 3 मोटर मार्गों के डामरीकरण का शुभारंभ स्थानीय विधायक भरत सिंह चौधरी व जिला पंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह के द्वारा किया गया। जिसमें भरदार क्षेत्र में क्वीलाखाल-तलपण्डेरा 5 किमी लम्बी सड़क का ₹2.74 करोड़ की लागत से डामरीकरण होगा। तथा लस्या पट्टी में आश्रम घरदा मखेत 2.20 किमी लम्बी सड़क का 2.22 करोड़ की लागत से एवं आश्रम से राजकीय महाविद्यालय जखोली 3.25 किमी लम्बी सड़क का 2.17 करोड़ की लागत से डामरीकरण के कार्य किये जाएंगे। लंबे समय से स्थानीय जनता द्वारा सड़कों के डामरीकरण की मांग की जा रही थी। सड़कों के डामरीकरण के शुभारंभ के अवसर पर स्थानीय जनता द्वारा विधायक भरत चौधरी का फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया। एवं स्थानीय जनता व जनप्रतिनिधियों ने उनका अभिवादन करते हुए सड़क डामरीकरण के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। वही सड़क डामरीकरण के शुभारंभ के अवसर पर उपस्थित विधायक भरत चौधरी ने जनता को बधाई देते हुए कहा कि जनता की जो अपेक्षा और उम्मीद उनसे की गई थी उसको पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार हमेशा क्षेत्र के विकास के लिये समर्पित रही है। आज निरन्तर क्षेत्र में विकास कार्य संचालित हो रहे है। उन्होंने कहा कि जो सड़कें डामरीकरण से वंचित रह गई है, उनका भी शीघ्र डामरीकरण किया जाएगा। अवसर पर उन्होंने जनता की समस्याओं को भी सुना एवं उनका समाधान करने के लिए भी आश्वस्त किया। कार्यक्रम में उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अमरदेई शाह द्वारा सड़कों डामरीकरण शुभारंभ के लिए विधायक भरत सिंह चौधरी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए स्थानीय जनता को बधाई दी। एवं उन्होंने कहा कि जिले में ट्रिपल इंजन की सरकार कार्य कर रही और पूरे क्षेत्र में त्वरित गति से विकास कार्य संचालित हो रहे है।
कार्यक्रम में उपस्थित क्षेत्र पंचायत सदस्य ललूड़ी भूपेन्द्र भण्डारी द्वारा उपस्थित सभी अथितियों का आभार व्यक्त करते विधायक भरत सिंह चौधरी के सम्मुख अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को रखा गया जिसमें महाविद्यालय- ललूड़ी सड़क का ग्राम पंचायत देवल काश्तकारों को मुआवाजा दिलाने जिलापंचायत अध्यक्ष अमरदेई शाह से ललूड़ी ग्राम सभा की मसाण सौड़ तोक तक सड़क निर्माण को जिला योजना में रखे जाने सहित महाविद्यालय के छात्र/ छात्राओं की माँग पर उन्होंने अपनी क्षेत्र पंचायत निधि से 3 लाख रुपये महाविद्यालय गेट निर्माण हेतु देने की घोषणा की गई