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Saturday, July 4, 2026
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हेली यात्रा के नाम पर ठगी करने वाले को रुद्रप्रयाग पुलिस ने करायी जेल यात्रा।

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*हेली यात्रा के नाम पर ठगी करने वाले को रुद्रप्रयाग पुलिस ने करायी जेल यात्रा*

रुद्रप्रयाग :  वर्तमान समय में जनपद रुद्रप्रयाग में केदारनाथ धाम यात्रा प्रचलित है। उत्तराखण्ड के चार धामों में से जनपद में स्थित केदारनाथ धाम पहुंचने का मार्ग सबसे दुष्कर है। सड़क मार्ग से गौरीकुण्ड पहुंचने के उपरान्त तकरीबन 16 कि0मी0 की चढ़ाई पैदल या घोड़े या पालकी/कण्डी के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। हालांकि यहां तक पहुंचने हेतु हैलीकॉप्टर भी एक माध्यम है। जो कि जनपद रुद्रप्रयाग के स्थान गुप्तकाशी, फाटा, शेरसी इत्यादि स्थानों से संचालित होते हैं।
इस बार की यात्रा अवधि में हैलीकॉप्टर सेवाओं की बुकिंग को ऑनलाइन किया गया है। परन्तु कुछ लोग हैली टिकटों के नाम पर ऑनलाइन या मैनुअल तरीके से भोले भाले श्रद्धालुओं को ठगने का कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद के कस्बा फाटा में सामने आया जहां पर शिकायतकर्ता कमलाकर रामभाऊ चोगले पुत्र रामभाऊ काया चोगले निवासी 301 सरस्वती अपार्टमेंट, केटमनीवली गांव, कल्याण ईस्ट, ठाणे, महाराष्ट्र ने चौकी फाटा पर शिकायत दर्ज की गयी कि उनको दिनांक 10.05.2023 को फाटा में एक व्यक्ति मिला जिसने अपना नाम आशीष राजेन्द्र चौधरी बताया, जिसने उनको आश्वासन दिया कि वह उन लोगों को हैलीकॉप्टर के माध्यम से दर्शन करा देगा।
8 लोगों के टिकट बुक कराने के एवज में एक लाख रुपये की मांग की। इनके द्वारा प्रति व्यक्ति के ₹ 12500/- के हिसाब से ₹ 25000/- ऑनलाइन व ₹ 75000/- नगद कैश दिये गये। काफी इन्तजार करने के बाद भी इस व्यक्ति ने न तो इन लोगों को टिकट उपलब्ध कराये गये और न ही इनका पैसा वापस कराया गया, टाल-मटोल करता रहा व इनका फोन भी रिसीव नहीं किया गया। इनकी शिकायत के आधार पर थाना गुप्तकाशी पर मु0अ0सं0 16/2023 धारा 420 भा0द0वि0 का अभियोग पंजीकृत किया गया। विवेचनात्मक कार्यवाही के दौरान पुलिस द्वारा अभियुक्त आशीष राजेन्द्र चौधरी पुत्र राजेन्द्र एकनाथ चौधरी निवासी 39 दत्तवाड़ी महासोवा चौक सिंहगढ़ रोड़ थाना जिला पुणे, महाराष्ट्र को शेरसी से गिरफ्तार कर मा0 न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जहां से मा0 न्यायालय द्वारा अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस की श्री केदारनाथ धाम आ रहे श्रद्धालुओं से अपील है कि वे यदि हैलीकॉप्टर के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम यात्रा पर जाना चाहते हैं, तो वे इस बार की केदारनाथ धाम यात्रा हेतु आई0आर0सी0टी0सी0 द्वारा जारी अधिकृत वेबसाइट https://heliyatra.irctc.co.in से ही अपनी टिकट बुक करें।

उत्तरकाशी में गुलदार का आतंक ,आंगनबाडी कार्यकत्री को बनाया अपना निवाला ।

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*ब्रेकिगं न्युज -उत्तरकाशी – चिन्यालीसाैड विलाेक के बडी मणि मे बाघ का आतंक* आंगनबाडी कार्यकत्री श्रीमती सुनीता देेवी काे बाघ ने बनाया अपना नेवाला माैके पर ही माैत उत्तरखंड मे बाघ का आतंक दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है जिससे वन विभाग की घाेर लापरवाही साफ नजर आ रही है,

केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग व सार्वजनिक स्थानों पर हुक्काबाजी व नशे का सेवन करने वालों पर रुद्रप्रयाग पुलिस के स्तर से की जा रही मिशन मर्यादा के तहत प्रभावी कार्यवाही।

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केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग व सार्वजनिक स्थानों पर हुक्काबाजी व नशे का सेवन करने वालों पर रुद्रप्रयाग पुलिस के स्तर से की जा रही मिशन मर्यादा के तहत प्रभावी कार्यवाही।

जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस के स्तर से धार्मिक व तीर्थ स्थलों की पवित्रता बनाये रखन हेतु “मिशन मर्यादा” चलाया हुआ है। पुलिस द्वारा केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग, पड़ावों व सार्वजनिक स्थानों पर हुक्काबाजी व नशे का सेवन करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। गत दिवस सोनप्रयाग क्षेत्रान्तर्गत हरियाणा निवासी एक युवक हुक्केबाजी कर रहा था व सीतापुर की तरफ 02 युवकों द्वारा शराब पीकर हुड़दंग मचाया जा रहा था।
जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस के स्तर से इनके विरुद्ध उत्तराखण्ड पुलिस अधिनियम व कोटपा अधिनियम के तहत चालानी कार्यवाही की गयी है, साथ ही पुलिस के स्तर से इनको सख्त चेतावनी भी दी गयी है। मिशन मर्यादा के तहत जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस द्वारा कुल 29 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही की गयी है। जनपद रुद्रप्रयाग पुलिस की केदारनाथ धाम यात्रा व जनपद के अन्य धार्मिक व पर्यटक स्थलों पर आ रहे श्रद्धालुओं व पर्यटकों से अपील है कि यहां की पवित्रता एवं मर्यादा का ध्यान रखें, किसी भी प्रकार की गन्दगी न फैलायें, साथ ही मर्यादित आचरण करें। अमर्यादित आचरण करने पर पुलिस के स्तर से आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।

ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदरनाथ मंदिर निर्माण का क्या है रहस्य ।!

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केदारनाथ मंदिर का निर्माण किसने करवाया था इसके बारे में बहुत कुछ कहा जाता है। पांडवों से लेकर आदि शंकराचार्य तक।
आज का विज्ञान बताता है कि केदारनाथ मंदिर शायद 8वीं शताब्दी में बना था।
यदि आप ना भी कहते हैं, तो भी यह मंदिर कम से कम 1200 वर्षों से अस्तित्व में है।
केदारनाथ की भूमि 21वीं सदी में भी बहुत प्रतिकूल है।
एक तरफ 22,000 फीट ऊंची केदारनाथ पहाड़ी, दूसरी तरफ 21,600 फीट ऊंची कराचकुंड और तीसरी तरफ 22,700 फीट ऊंचा भरतकुंड है।
इन तीन पर्वतों से होकर बहने वाली पांच नदियां हैं मंदाकिनी, मधुगंगा, चिरगंगा, सरस्वती और स्वरंदरी। इनमें से कुछ इस पुराण में लिखे गए हैं।
यह क्षेत्र “मंदाकिनी नदी” का एकमात्र जलसंग्रहण क्षेत्र है। यह मंदिर एक कलाकृति है I कितना बड़ा असम्भव कार्य रहा होगा ऐसी जगह पर कलाकृति जैसा मन्दिर बनाना जहां ठंड के दिन भारी मात्रा में बर्फ हो और बरसात के मौसम में बहुत तेज गति से पानी बहता हो। आज भी आप गाड़ी से उस स्थान तक नही जा सकते I
फिर इस मन्दिर को ऐसी जगह क्यों बनाया गया?
ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों में 1200 साल से भी पहले ऐसा अप्रतिम मंदिर कैसे बन सकता है ?
1200 साल बाद, भी जहां उस क्षेत्र में सब कुछ हेलिकॉप्टर से ले जाया जाता है I JCB के बिना आज भी वहां एक भी ढांचा खड़ा नहीं होता है। यह मंदिर वहीं खड़ा है और न सिर्फ खड़ा है, बल्कि बहुत मजबूत है।
हम सभी को कम से कम एक बार यह सोचना चाहिए।
वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि यदि मंदिर 10वीं शताब्दी में पृथ्वी पर होता, तो यह “हिम युग” की एक छोटी अवधि में होता।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ जियोलॉजी, देहरादून ने केदारनाथ मंदिर की चट्टानों पर लिग्नोमैटिक डेटिंग का परीक्षण किया। यह “पत्थरों के जीवन” की पहचान करने के लिए किया जाता है। परीक्षण से पता चला कि मंदिर 14वीं सदी से लेकर 17वीं सदी के मध्य तक पूरी तरह से बर्फ में दब गया था। हालांकि, मंदिर के निर्माण में कोई नुकसान नहीं हुआ।
2013 में केदारनाथ में आई विनाशकारी बाढ़ को सभी ने देखा होगा। इस दौरान औसत से 375% अधिक बारिश हुई थी। आगामी बाढ़ में “5748 लोग” (सरकारी आंकड़े) मारे गए और 4200 गांवों को नुकसान पहुंचा। भारतीय वायुसेना ने 1 लाख 10 हजार से ज्यादा लोगों को एयरलिफ्ट किया। सब कुछ ले जाया गया। लेकिन इतनी भीषण बाढ़ में भी केदारनाथ मंदिर का पूरा ढांचा जरा भी प्रभावित नहीं हुआ।
भारतीय पुरातत्व सोसायटी के मुताबिक, बाढ़ के बाद भी मंदिर के पूरे ढांचे के ऑडिट में 99 फीसदी मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है I 2013 की बाढ़ और इसकी वर्तमान स्थिति के दौरान निर्माण को कितना नुकसान हुआ था, इसका अध्ययन करने के लिए “आईआईटी मद्रास” ने मंदिर पर “एनडीटी परीक्षण” किया। साथ ही कहा कि मंदिर पूरी तरह से सुरक्षित और मजबूत है।
यदि मंदिर दो अलग-अलग संस्थानों द्वारा आयोजित एक बहुत ही “वैज्ञानिक और वैज्ञानिक परीक्षण” में उत्तीर्ण नहीं होता है, तो आज के समीक्षक आपको सबसे अच्छा क्या कहता ?
मंदिर के अक्षुण खड़े रहने के पीछे :
जिस दिशा में इस मंदिर का निर्माण किया गया है व जिस स्थान का चयन किया गया है I
ये ही प्रमुख कारण हैं I
दूसरी बात यह है कि इसमें इस्तेमाल किया गया पत्थर बहुत सख्त और टिकाऊ होता है। खास बात यह है कि इस मंदिर के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया पत्थर वहां उपलब्ध नहीं है, तो जरा सोचिए कि उस पत्थर को वहां कैसे ले जाया जा सकता था। उस समय इतने बड़े पत्थर को ढोने के लिए इतने उपकरण भी उपलब्ध नहीं थे। इस पत्थर की विशेषता यह है कि 400 साल तक बर्फ के नीचे रहने के बाद भी इसके “गुणों” में कोई अंतर नहीं है।
आज विज्ञान कहता है कि मंदिर के निर्माण में जिस पत्थर और संरचना का इस्तेमाल किया गया है, तथा जिस दिशा में बना है उसी की वजह से यह मंदिर इस बाढ़ में बच पाया।
केदारनाथ मंदिर “उत्तर-दक्षिण” के रूप में बनाया गया है। जबकि भारत में लगभग सभी मंदिर “पूर्व-पश्चिम” हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मंदिर “पूर्व-पश्चिम” होता तो पहले ही नष्ट हो चुका होता। या कम से कम 2013 की बाढ़ में तबाह हो जाता। लेकिन इस दिशा की वजह से केदारनाथ मंदिर बच गया है।
इसलिए, मंदिर ने प्रकृति के चक्र में ही अपनी ताकत बनाए रखी है। मंदिर के इन मजबूत पत्थरों को बिना किसी सीमेंट के “एशलर” तरीके से एक साथ चिपका दिया गया है। इसलिए पत्थर के जोड़ पर तापमान परिवर्तन के किसी भी प्रभाव के बिना मंदिर की ताकत अभेद्य है।
टाइटैनिक के डूबने के बाद, पश्चिमी लोगों ने महसूस किया कि कैसे “एनडीटी परीक्षण” और “तापमान” ज्वार को मोड़ सकते हैं।
लेकिन भारतीय लोगों ने यह सोचा और यह 1200 साल पहले परीक्षण किया I
क्या केदारनाथ उन्नत भारतीय वास्तु कला का ज्वलंत उदाहरण नहीं है?
2013 में, मंदिर के पिछले हिस्से में एक बड़ी चट्टान फंस गई और पानी की धार विभाजित हो गई I मंदिर के दोनों किनारों का तेज पानी अपने साथ सब कुछ ले गया लेकिन मंदिर और मंदिर में शरण लेने वाले लोग सुरक्षित रहे I जिन्हें अगले दिन भारतीय वायुसेना ने एयरलिफ्ट किया था।
सवाल यह नहीं है कि आस्था पर विश्वास किया जाए या नहीं। लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि मंदिर के निर्माण के लिए स्थल, उसकी दिशा, वही निर्माण सामग्री और यहां तक ​​कि प्रकृति को भी ध्यान से विचार किया गया था जो 1200 वर्षों तक अपनी संस्कृति और ताकत को बनाए रखेगा।
हम पुरातन भारतीय विज्ञान की भारी यत्न के बारे में सोचकर दंग रह गए हैं I शिला जिसका उपयोग 6 फुट ऊंचे मंच के निर्माण के लिए किया गया है कैसे मन्दिर स्थल तक लायी गयी I
आज तमाम बाढ़ों के बाद हम एक बार फिर केदारनाथ के उन वैज्ञानिकों के निर्माण के आगे नतमस्तक हैं, जिन्हें उसी भव्यता के साथ 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचा होने का सम्मान मिलेगा।
यह एक उदाहरण है कि वैदिक हिंदू धर्म और संस्कृति कितनी उन्नत थी। उस समय हमारे ऋषि-मुनियों यानी वैज्ञानिकों ने वास्तुकला, मौसम विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, आयुर्वेद में काफी तरक्की की थी

केदारनाथ यात्रा में तीन लोगों के खिलाफ पशु कू्ररता में एफआईआर दर्ज

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केदारनाथ यात्रा में तीन लोगों के खिलाफ पशु कू्ररता में एफआईआर दर्ज
नियम विरूद्ध चलने वाले 123 घोड़े-खच्चर संचालकों के चालान
पिछली यात्रा की तुलना में इस बार घोड़े-खच्चरों की मौत में आई गिरावट

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा मार्ग में संचालित हो रहे घोड़े-खच्चरों के साथ किसी प्रकार से कोई पशु क्रूरता न हो तथा बीमार एवं कमजोर घोड़े-खच्चरों का संचालन यात्रा मार्ग में किसी भी दशा में न हो तथा घोड़े-खच्चरों को गरम पानी उपलब्ध कराने एवं उनकी निरंतर निगरानी करने के लिए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित द्वारा इस संबंध में पूर्व में ही पशुपालन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
डीएम मयूर दीक्षित ने अवगत कराया है कि जिलाधिकारी के निर्देशन में यात्रा मार्ग में संचालित हो रहे घोड़े-खच्चरों के साथ किसी प्रकार से कोई पशु क्रूरता न हो उसकी निगरानी के लिए 30 सदस्यीय म्यूल टास्क फोर्स तैनात की गई है तथा घोड़े-खच्चरों चिकित्सा सुविधा हेतु 7 पशु चिकित्सकों एवं 6 पैरावेट की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग में घोड़े-खच्चरों को गरम पानी उपलब्ध कराए जाने के लिए 18 स्थानों पर घोड़े-खच्चरों के लिए गीजर युक्त गरम पानी की चरहियों का निर्माण किया गया है जिसकी देखरेख विभिन्न चरियों पर तैनात म्यूल टास्क फोर्स द्वारा की जा रही है।
उन्होंने अवगत कराया है कि घोड़े-खच्चरों को चिकित्सा उपचार हेतु 4 स्थानों में अस्थाई पशु चिकित्सालय बनाए गए हैं जिनमें सोनप्रयाग, गौरीकुंड, बड़ी लिनचोली तथा केदारनाथ रुद्रा प्वाइंट पर एमआरपी बनाई गई है जिनमें तैनात डाॅक्टरों एवं पैरावेटों द्वारा घायल व बीमार घोड़े-खच्चरों का निरंतर स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार किया जा रहा है। जिसमें 09 मई, 2023 तक सोनप्रयाग में 60, गौरीकुंड में 310, लिनचोली में 66 एवं केदारनाथ में 45 घोड़े-खच्चरों का उपचार किया गया है। साथ ही कैंपों एवं यात्रा मार्ग पर कुल 8320 घोड़े-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पशु चिकित्सकों द्वारा 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हुए पशुओं का उपचार किया जा रहा है उन्होंने यह भी अवगत कराया है कि जिलाधिकारी के निर्देशन में इस यात्रा में गरम पानी सहित घोड़े-खच्चरों की देखभाल हेतु उचित प्रबंधन किया गया है, जिसमें यात्रा संचालन हेतु 441 घोड़े-खच्चर अयोग्य पाए गए हैं। साथ ही स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अयोग्य, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना लाईसेंस व बिना यात्रा पर्ची के पाए गए घोड़े-खच्चरों के मालिकों का चालान भी किया गया है जिसमें 09 मई, 2023 तक 123 घोड़े-खच्चर मालिकों का विभाग द्वारा चालान किया गया है तथा यात्रा मार्ग में सवारी के साथ चलने वाले लंगडे़ एवं बीमार घोड़े-खच्चरों के मालिकों के विरुद्ध पशु क्रूरता अधिनियम के तहत 3 व्यक्तियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

केदारनाथ पहुंचकर पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग ने पुलिस बल का बढ़ाया मनोबल, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को मौके पर ही किया गया सम्मानित।

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*केदारनाथ पहुंचकर पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग ने पुलिस बल का बढ़ाया मनोबल, उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को मौके पर ही किया गया सम्मानित।

इस वर्ष की केदारनाथ धाम यात्रा दिनांक 25 अप्रैल 2023 से प्रारम्भ हो गयी है, केदारनाथ धाम सहित यात्रा पड़ावों पुलिस बल सहित सहायक बल की तैनाती की गयी है। यात्रा व्यवस्था ड्यूटियों के सम्पादन हेतु नियुक्त पुलिस बल के मनोबल बढ़ाये जाने हेतु पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग स्वयं उनके बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करने के साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को उनके ड्यूटी स्थल पर सम्मानित भी कर रही हैं।
पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग द्वारा विगत के दिनों में यात्रा पड़ावों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित किये जाने की घोषणा की गयी थी। उनके द्वारा ऐसे कार्मिकों को केदारनाथ जाकर प्रशस्ति पत्र एवं नगद पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया है।
कार्मिकों से संवाद स्थापित करते हुए उच्च मनोबल के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। केदारनाथ धाम सहित यात्रा पड़ावों में नियुक्त पुलिस बल को अतिरिक्त सामग्री भिजवायी गयी है। उनके द्वारा पुलिस कार्मिकों को अवगत कराया गया कि यहां की विषम परिस्थितियों के हिसाब से उनकी हर जरूरत की चीजों को पूरा कराया जा रहा है। साथ ही वहॉं पर तैनात कार्मिकों को आश्वस्त किया गया कि आप सभी लोग यहॉं की विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे हैं, आगे इसी प्रकार का कर्तव्य निर्वहन करने वाले कार्मिकों को समय-समय पर सम्मानित किया जायेगा। ड्यूटी पर नियुक्त कार्मिकों को उनके कर्तव्य निर्वहन के साथ ही अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखे जाने के निर्देश दिये गये हैं। इस दौरान उनके द्वारा केदारनाथ में नियुक्त पुलिस बल को मन्दिर दर्शन हेतु आये श्रद्धालुओं के सुगम व सरल तरीके से दर्शन कराने हेतु बनी व्यवस्थाओं में प्रभावी तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वहन किये जाने के निर्देश दिये गये। केदारनाथ धाम में अचानक मौसम खराब हो जाने पर बर्फबारी होने के सूचना नीचे के यात्रा पड़ावों को दिये जाने के निर्देश दिये गये, ताकि वहॉं तक आ रहे श्रद्धालुओं को पहले से ही जागरुक किया जाये। भैरव गधेरे व कुबेर गधेर ग्लेशियर पर ड्यूटी कर रहे पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, डीडीआरएफ जवानों की सराहना करते हुए कहा कि आप लोगों के द्वारा अलग ही जीवटता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया जा रहा है।
केदारनाथ धाम से सम्बन्धित ड्यूटियों के पर्यवेक्षण हेतु एस0टी0एफ0 उत्तराखण्ड से आये पुलिस उपाधीक्षक श्री विवेक कुमार जिनकी ड्यूटी समयावधि आज तक की थी, उनके द्वारा शुरुआती 15 दिवसों में दिये गये योगदान की सराहना करते हुए उनको भी प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इस दौरान उनके द्वारा चौकी प्रभारी केदारनाथ सहित उनकी टीम, एस0डी0आर0एफ0 निरीक्षक व उनकी टीम तथा एन0डी0आर0एफ0 की टीम को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। अपने इस भ्रमण के दौरान उनके द्वारा केदारनाथ धाम पहुंचे श्रद्धालुओं से संवाद कर उनके अनुभव भी जाने गये।

मानसिक रूप से परेशान युवक को रुद्रप्रयाग पुलिस ने सकुशल उसके परिजनों से मिलवाया

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कस्बा रुद्रप्रयाग में दर दर की ठोकरें खा रहे एक युवक के सम्बन्ध में कोतवाली रुद्रप्रयाग पुलिस को सूचना मिली, पुलिस कार्मिक उसके पास पहुंचे तो वह काफी असहज नजर आ रहा था। नाम पता पूछने पर भी कुछ नहीं बता रहा था, बल्कि वह पुलिस से भागना चाह रहा था। अपने अनुभव से पुलिस कार्मिकों को महसूस हुआ कि यह बेचारा किसी न किसी कारण से परेशान जरूर है। उसके पास एक फोन भी था, जिस पर कि सिम तो नहीं थी पर इत्तेफाक से उसमें कुछ नम्बर अवश्य थे। इन फोन नम्बरों पर सम्पर्क किया गया तो सामने से कॉल रिसीव होती है, परन्तु सही से रिस्पान्स नहीं हो पाता है। पुनः कॉल मिलाने पर पुलिस द्वारा इस युवक के हुलिये के बारे में बताते हुए बात की तो सामने वाले की आवाज में अलग ही उम्मीद के भाव सुनाई दिये और कहने लगे साहेब कहां से बोल रहे हैं, और जिसके बारे में बता रहे हो वो ठीक तो है न!!!
हम तो काफी परेशान हो गये थे, पुलिस कार्मिकों द्वारा बताया कि यह हमारे पास सुरक्षित है, परन्तु कुछ भी नहीं बता पा रहा है। पुलिस कार्मिकों से उस व्यक्ति के अनुरोध पर व्हट्सएप वीडियो कॉल की तो इस युवक पर भले ही कुछ फर्क न पड़ा हो पर सामने वाले के भाव समझे जा सकते थे, क्योंकि यह युवक कोई नहीं बल्कि उनके परिवार का बालक था, जो पिछले लम्बे समय से मानसिक रूप से बीमार चल रहा था, परन्तु यह इतनी दूर आ जायेगा ऐसी किसी को उम्मीद नहीं थी। यहाँ की उनको लोकेशन भेजी गयी और बताया गया कि हम लोग उत्तराखण्ड पुलिस से हैं, और आप बेफिक्र होकर आईये।
इस बीच पुलिस ने इस युवक का अच्छे से ध्यान रखा, भोजन करवाया गया। आज परिजनों के आने पर उनके सुपुर्द कराया गया। परिजनों द्वारा युवक का नाम विनायक आत्माराम बोरे पुत्र आत्माराम शंकर बोरे मुम्बई बताया। अपने पाल्य को सकुशल पाकर परिजनों ने रुद्रप्रयाग पुलिस का आभार प्रकट किया गया है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से परिवहन विभाग द्वारा तैयार किये गये ऑटोमैटिक नम्बर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम (ए.एन.पी.आर) का शुभारंभ किया।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से परिवहन विभाग द्वारा तैयार किये गये ऑटोमैटिक नम्बर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम (ए.एन.पी.आर) का शुभारंभ किया।

इससे प्रदेश के प्रमुख मार्गों में यातायात के नियमों के अनुपालन एवं कर अपवंचन संबंधी प्रकरणों की ऑनलाईन मॉनिटरिंग की सुविधा होगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यातायात के नियमों के पालन एवं सड़क सुरक्षा की दृष्टि से यह एक अच्छी शुरूआत है।

ए.एन.पी.आर कैमरे लगने से लोग यातायात के नियमों का पालन भी करेंगे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि ए.एन.पी.आर कैमरे के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए।

इस कैमरे में अभी शुरूआती चरण में जो लोग यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनको चेतावनी के एस.एम.एस भेजे जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ए.एन.पी.आर कैमरे लगाने की जहां भी आवश्यकता पड़ रही है, स्थानों का चयन कर वहां इसकी सुविधा उपलब्ध कराई जाय।

उन्होंने कहा कि ए.एन.पी.आर कैमरे लगने से जीएसटी एवं अन्य विभागों को भी मदद मिलेगी व कर चोरी की रोकथाम भी इससे संभव होगी।

इससे जहां चेक पोस्टों पर जाम से निजात मिलेगी, आवागमन भी सरल होगा। इस व्यवस्था के प्रारम्भ होने से वाहन दुर्घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी।

सचिव परिवहन अरविन्द सिंह ह्यांकी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि मोटर यान अधिनियम, 1988 में संशोधन करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग किये जाने की व्यवस्था की गई है।

उत्तराखण्ड में राज्य की सीमा पर स्थापित सभी चैक पोस्टों को समाप्त कर दिया गया है।

राज्य में इलैक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करने हेतु प्रथम चरण में राज्य की सीमा पर ए०एन०पी०आर० स्थापित करने की योजना बनाई गयी जिसके लिये राज्य सड़क सुरक्षा कोष से रूपये 4.61 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।

सचिव परिवहन ने जानकारी दी कि योजना के अन्तर्गत ए०एन०पी०आर० पोर्टल से प्राप्त डाटा को जीएसटी विभाग को उपलब्ध कराने हेतु इन्टीग्रेशन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गयी है, जबकि अन्य विभागों खनन, आबकारी, पर्यटन, शहरी विकास, वन विभाग तथा पुलिस के साथ इन्टीग्रेशन किया जाना भी प्रस्तावित है ताकि एक ही माध्यम से प्राप्त डाटा का सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा उपयोग किया जा सके।

इस व्यवस्था को पूर्णतः आटोमेटेड बनाया गया है जिसके लिए ए०एन०पी०आर० कैमरे के लिए तैयार सॉफ्टवेयर का इन्टीग्रेशन वाहन पोर्टल एवं ई-चालान पोर्टल से किया गया है।

इससे वाहन की नम्बर प्लेट के आधार पर चालान स्वतः जेनरेट हो सकेंगे, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप नहीं होगा।

केदारनाथ यात्रा पर आये श्रद्धालुओं की पुलिस के स्तर से निरन्तर मद्दत जारी ।

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केदारनाथ धाम से वापस आते हुए एक वृद्ध माता जी अपने परिजनों से बिछड़ गयी थी, यह माता जी गौरीकुण्ड शटल पार्किंग में ड्यूटीरत उप निरीक्षक रमेश चन्द्र बेलवाल एवं आरक्षी सुशील कुमार को काफी परेशान हालत में मिली। इनके साथ केवल इसी बात का फायदा यह रहा कि यह हिन्दी भाषा समझ पा रही थी और कुछ-कुछ शब्द बोल पा रही थी। परन्तु इनके परिजन कहॉं रह गये होंगे स्पष्ट बता पाने में असमर्थ थी। पुलिस टीम द्वारा इनसे आराम से बात कर इनको वहां पर उपलब्ध दुकान से खाने का चाय बिस्किट दिये गये। पुलिस टीम अब इनके परिजनों की तलाश में जुट गयी, अपने स्तर से सूचना को चौकी सहित निकटवर्ती पुलिस खोया पाया केन्द्रों पर दी गयी। शटल पार्किंग तक आ रहे लगभग हरेक यात्री से पूछताछ के उपरान्त ऐसे यात्रियों का समूह आया, जिनसे ये माता जी बिछड़ गयी थी। ये लोग अपनी स्थानीय भाषा में एक दूसरे से बात करने लगे, जिसका सार यही था कि तुम कहॉ से यहॉं तक आ गयी हो, हम तो कबसे रास्ते भर में ढूंढने में लगे हैं। खैर जो भी हो आपसी मिलन होने के बाद सबके चेहरे पर सुकून तो था ही साथ ही पुलिस टीम के लिए ढेर सार प्यार और आशीष वचन भी
जनपद ररद्रप्रयाग पुलिस का ऑपरेशन मुस्कान श्रद्धालुओं के चेहरे पर सुकून और राहत दे जा रहा है।

CM धामी की नई पहल अपणों स्कूल, अपणू प्रमाण पत्र नामक पहल को बढ़ाया आगे ।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन द्वारा दिशा निर्देश जारी किए गए ,

राज्य के समस्त विद्यालयों में कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रतिभाग किये जाने की आवश्यकता के दृष्टिगत स्थायी निवास जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय में ही उपलब्ध कराये जाएं,

सचिव शैलेश बगोली ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को दिशा निर्देश जारी किए,

छात्रों को आवश्यक प्रमाण-पत्र की आवश्यकता एवं इन प्रमाण-पत्रों को प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के दृष्टिगत राज्य के समस्त विद्यालयों में *अपणों स्कूल, अपणू प्रमाण* नामक पहल को आगे बढ़ाया जाए,

कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को स्थायी निवास, जाति एवं आय तथा अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र विद्यालय स्तर पर ही उपलब्ध कराये जाने का निर्णय लिया गया ,

उन्होंने आदेश जारी किये हैं कि जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मुख्य शिक्षा अधिकारी को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय,

समिति द्वारा जनपद स्तर पर कक्षा 11 एवं 12 में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की संख्या का आकलन किया जायेगा,

तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति से विद्यालय में भ्रमण करने वाली टीमों (पटवारी / लेखपाल / कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर) का तिथिवार रोस्टर तैयार करवाया जायेगा,

निवास स्थान, चरित्र, आय एवं पर्वतीय प्रमाण-पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्र निर्गत किये जाने की प्रक्रिया हेतु टाईम फ्रेम का निर्धारण करते हुए कार्ययोजना तैयार की जायेगी,

जनपद स्तर पर उक्त कार्यक्रम का साप्ताहिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी।

तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में खण्ड शिक्षा अधिकारियों को सम्मिलित करते हुए समिति का गठन किया जाय,

समिति द्वारा तैयार रोस्टर की सूचना से सम्बन्धित विद्यालयों को अवगत कराने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा,

प्रमाण-पत्रों हेतु आवश्यक दस्तावेजों की सूचना प्रधानाचार्यो, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध करायी जायेगी,

तहसील स्तर पर इस कार्यक्रम का दैनिक अनुश्रवण एवं निगरानी की जायेगी,

कार्यवाही के पश्चात तहसीलदार स्तर से दैनिक निगरानी के अंतर्गत तिथिवार रोस्टर के अनुसार पटवारी / लेखपाल / कानूनगो एवं सीएससी के डाटा एण्ट्री ऑपरेटर की टीम द्वारा सम्बन्धित विद्यालय का भ्रमण किया जायेगा तथा प्रधानाचार्य से प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए प्रमाण-पत्र हेतु आवश्यक शुल्क / दस्तावेज, ऑनलाईन / ऑफलाईन माध्यम से तहसीलदार / उपजिलाधिकारी कार्यालयों को प्रेषित किये जायेंगे,।

आवश्यक शुल्क / दस्तावेज प्राप्त होने के उपरान्त तहसीलदार/ उपजिलाधिकारी कार्यालय द्वारा प्रमाण-पत्र निर्गत करते हुए उक्त प्रमाण-पत्र, छात्र-छात्राओं को वितरित किये जाने हेतु एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से सम्बन्धित विद्यालय के प्रधानाचार्य को उपलब्ध करा दिया जायेगा,

जिला स्तरीय समिति द्वारा समस्त उप जिलाधिकारी, तहसीलदार तथा खण्ड शिक्षा अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए सम्पूर्ण कार्यवाही की प्रभावी मॉनिटरिंग की जायेगी एवं किसी प्रकार की समस्या / कठिनाई उत्पन्न होने पर समिति के स्तर से सम्बन्धित को तात्कालिकता के आधार पर यथावश्यक दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे,

यह समस्त कार्यवाही अधिकतम दो माह के भीतर सम्पादित कराते हुए, प्रत्येक जनपद की साप्ताहिक सूचना, जिलाधिकारी द्वारा शासन को सलग्न प्रारूपानुसार अनिवार्य रूप से संप्रेषित कराया जाना सुनिश्चित करें।